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प्रकाश जावड़ेकर से खास बातचीत, पर्यावरण कानूनों की अनदेखी उद्योगों को पड़ेगी भारी

Mon, 17 Aug 2020 09:33 AM IST
Sharad Gupta शरद गुप्ता
Updated Mon, 17 Aug 2020 09:33 AM IST
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Prakash javadekar says, Ignoring environmental laws will hit the industry badly
प्रकाश जावड़ेकर - फोटो : पीटीआई

पर्यावरण पर उद्योगों के पड़ने वाले प्रभाव को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जल्द ही जारी की जाने वाली अधिसूचना पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी नेता और विशेषज्ञ इसे पर्यावरण से कहीं अधिक उद्योगों के हित वाली नीति करार दे रहे हैं। इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण, सूचना व प्रसारण और भारी उद्योग मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने खास बातचीत में शरद गुप्ता को दिए। पेश हैं मुख्य अंश..

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पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव के मूल्यांकन (आईईए) की अधिसूचना 2020 के प्रारूप को लेकर काफी विवाद है। आपका क्या कहना है?

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हम यूपीए सरकार द्वारा 2006 में लाए गए नोटिफिकेशन में सुधार कर रहे हैं। इसकी जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि यूपीए सरकार ने ही इस अधिसूचना में 55 बार संशोधन किया और 200 से अधिक ऑफिस मेमोरेंडम निकाले। इनसे उपजे भ्रम को दूर करने के लिए हमने नई अधिसूचना जारी करने का फैसला किया। इस पर 3 महीने से अधिक समय तक लोगों की राय मांगी। ड्राफ्ट पर ही हंगामे का औचित्य नहीं है। अंतिम रूप देते समय सभी राय का ख्याल रखेंगे।

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क्या ड्राफ्ट सरकार का मंतव्य जाहिर नहीं करता है?

दरअसल, जयराम रमेश ने मुझे दो पत्र लिखे, राहुल गांधी ने ट्वीट किया और सोनिया गांधी ने एक लेख लिखा। सभी में एक ही चिंता थी कि सरकार पोस्ट फैक्टो अनुमति दे रही है। यूपीए ने ही 2010, 2012 और 2013 में ऑफिस मेमोरेंडम लाकर पोस्ट फैक्टो अनुमति की व्यवस्था की थी। उसके लिए अधिकतम सिर्फ एक लाख रुपये तक के जुर्माने की व्यवस्था थी। लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 2012 और 2013 इसे यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि अधिसूचना ऑफिस मेमोरेंडम से बदल नहीं सकते। हम तो उनकी फैलाई गंदगी साफ कर रहे हैं।

यानी आप भी पर्यावरण कानून के उल्लंघन का विनियमितीकरण करना चाहते हैं?

अरे नहीं। इस दौरान अदालत के तीन आदेश आए। पर्यावरण सुरक्षा कानून में व्यवस्था है कि उल्लंघन होने पर परियोजना बंद कर दी जाए।  झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि उल्लंघन को मेरिट पर परीक्षण कर ही फैसला लिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने दो फैसले दिए। उन्होंने कहा उद्योग को बंद करना ही एकमात्र समाधान नहीं है। उल्लंघन के अनुपात में ही दंड मिलना चाहिए। इसीलिए हम केवल एक लाख रुपये जुर्माने तक सीमित नहीं रहेंगे। हम उल्लंघन की सीमा और देरी को देखते हुए इतना कड़ा जुर्माना लगाएंगे ताकि उल्लंघन से पहले कई बार सोचना पड़ेगा। अब उल्लंघन करने वाले दो से चार हजार उद्योग हैं, तो उन्हें बंद कैसे किया जाएगा। पर्यावरण प्रबंधन की योजना बतानी होगी व आर्थिक दंड देना होगा। इसके बाद भी पर्यावरण अनुमति (ईसी) उसी तिथि से मिलेगी।  

उद्योगों से प्रभावित होने वाली जनता की सुनवाई क्या अब नहीं होगी? बी-टू कैटेगरी इसीलिए बनाई गई है?

यह हमने नहीं बनाई। यूपीए सरकार ने ही बनाई थी। इसमें शामिल उद्योगों के लिए जनता की आपत्ति लेने के लिए जनसुनवाई आयोजित न करने का निर्णय भी उन्हीं का था। फर्क सिर्फ इतना है कि उन्होंने राज्यों को यह तय करने का अधिकार दिया था कि कौन सी परियोजना बी-वन में रहेगी और कौन सी बी-टू में। इससे भ्रम पैदा होता था। हमने पूरे देश में एक समान प्रावधान करने के लिए यह अधिकार केंद्र को दे दिया है।  

पर्यावरणविदों का आरोप है कि आप भी उद्योगों का ही बचाव कर रहे हैं ना कि पर्यावरण का?  

यह लोग तब क्या सोए हुए थे जब यूपीए सरकार ऑफिस मेमोरेंडम लाकर यह सारी प्रक्रिया बदल रही थी? पर्यावरण की सारी चिंता इन्हें हमारी सरकार के दौरान ही हो रही है। यूपीए ने आद्योगिक क्षेत्र में लगने वाले उद्योगों के लिए जनसुनवाई खत्म कर दी थी। हमने तो औद्योगिक क्षेत्रों में लगने वाले सीमेंट, पॉवर, स्टील जैसे 17 उद्योगों के लिए जनसुनवाई अनिवार्य कर दी है।

जनसुनवाई अवधि 60 से घटाकर 40 और 30 से 20 दिन कर दी है?

जनसुनवाई तो एक ही दिन होती है। अब तो संचार क्रांति का जमाना है। सेकंड में सूचना कोने-कोने तक फैल जाती है। वैसे भी अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। मसौदे में खनन के लिए 50 वर्ष तक प्रायर क्लीयरेंस का प्रावधान क्यों किया? अभी नया खनन कानून बन गया है। उसी में खनन खत्म होने या 50 वर्ष तक का पर्यावरण अनुमति का प्रावधान है जो हमने अपने नोटिफिकेशन में शामिल किया है। हम कानून के खिलाफ कैसे जा सकते हैं?

नोटिफिकेशन में कितना समय लगेगा?

हमने एक टीम बनाई है जो तेजी से काम कर रही है। एक से डेढ़ महीने में नोटिफिकेशन जारी हो जाना चाहिए।

वर्चुअल होगा गोवा फिल्म फेस्टिवल?

यदि महामारी का प्रकोप कम हुआ तब तो समारोह गोवा में आयोजित होगा। अन्यथा वर्चुअल हो सकता है। जैसे अभी कांस फिल्म समारोह हुआ है। अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के लिए हमें 400 से अधिक विदेशी फिल्मों की प्रविष्टि मिल चुकी हैं।

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