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भारत में मृदा स्वास्थ्य कार्ड ने दुनिया के कई देशो का किया मार्गदर्शन : प्रकाश जावड़ेकर
Sun, 06 Dec 2020 06:52 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sun, 06 Dec 2020 06:52 AM IST
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर
- फोटो : ANI
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देश के 14 करोड़ में से 11.69 करोड़ किसानों के पास मृदा स्वास्थ कार्ड है। यानि अब देश के किसानों को अपने खेत की मिट्टी के स्वास्थ के बारे में पूरी जानकारी है। विश्व मृदा दिवस के मौके पर केंद्रीय पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि भारत ने कृषि सुधारों के तहत मृदा स्वास्थ कार्ड जारी करके महत्वपूर्ण कार्य किया है।
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मृदा कार्ड खेत और किसान के लिए जीवन दायक
उन्होंने कहा मोदी सरकार की इस पहल ने देश के किसानों को मिट्टी की स्थिति के आधार पर जहां खेती करने के अवसर मुहैया कराए हैं, वहीं दुनिया के कई देशों को एक रास्ता दिखाने का काम किया है। केंद्रीय मत्री ने कहा, पूरी दुनिया में मिट्टी के स्वास्थ की जानकारी और जागरुकता अच्छी मिट्टी और अच्छी फसल दोनों के लिए जरूरी है। देश में पिछले तीन सालों में इस दिशा में महत्वपूर्ण काम हुआ है, इसके चलते किसान उर्वरकों के इस्तेमाल में एतिहात बरतने के लिए तत्पर हुआ है।
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केंद्रीय मंत्री ने शनिवार को सोशल मीडिया पर ट्वीट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में मृदा स्वास्थ कार्य योजना की शुरुआत की और किसानों से कृषि के साथ खेत की मिट्टी के स्वास्थ पर ध्यान देने का आह्वान किया। इससे उत्पादकता में बढ़ोत्तरी के बाद किसान की समृद्धि का राह भी प्रशस्त हो, इसी के आधार पर उन्होंने स्वास्थ धरा खेत हरा का नारा दिया।
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भारत में केंद्र सरकार की पहल से 2015 से 17 के मध्य पहले चरण में 10.74 करोड़ कार्ड बनाए गए , जबकि इसके बाग 2019 तक 11.69 करोड़ कार्ड किसानों को दिए जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2013 से 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है। तब से हर साल दुनिया के किसान इस दिन के उपलक्ष्य में तमाम आयोजन करते हैं।
इसका लक्ष्य आम आदमी को मिट्टी के महत्व को बताना और किसान को खेत की मिट्टी के हालातों से अवगत करना है जिससे वह मिट्टी के हालात के अनुसार, उत्पादन करके अधिकतम आय अर्जित कर सके। इस साल 2020 में खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार, विश्व मृदा दिवस की थीम है- मिट्टी को जीवित रखें, मिट्टी की जैव विविधता की रक्षा करें।