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PMAY: प्रधानमंत्री आवास योजना में 50 फीसदी भी मकान बनकर तैयार नहीं, ऐसे तो पांच साल करना होगा इंतजार

Sat, 04 Jun 2022 10:34 PM IST
कुमार संभव डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार संभव Updated Sat, 04 Jun 2022 10:34 PM IST
सार

पीएमएवाई पोर्टल के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एक साल में बनकर तैयार होने वाले मकानों की संख्या पिछले सात साल में एक बार भी 20 लाख के आंकड़े को पार नहीं कर पाई है।

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Pradhanmantri Awas Yojna 50 percent houses not ready under PMAY
प्रधानमंत्री आवास योजना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से प्रधानमंत्री आवास योजना फिलहाल अपने लक्ष्य से कई कदम दूर नजर आ रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसी साल घोषणा की थी कि सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत किफायती आवास के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 48,000 करोड़ रुपए आवंटित करेगी, लेकिन केंद्र सरकार ने बजट के कुछ दिन बाद ही ग्रामीण योजना के तहत मकानों के निर्माण की समय-सीमा दो साल और बढ़ा दी, क्योंकि यह योजना अपने लक्ष्य से काफी पीछे थी। उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सरकार को पीएमएवाई (शहरी क्षेत्र) के लिए भी ऐसा करना पड़ सकता है। दरअसलख् 17 मई तक महज 48.7 फीसदी मकान ही बनकर तैयार हो पाए हैं। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च, 2022 तक 1.21 करोड़ मकान बनाने का था। इस योजना का एलान जून 2015 में हुआ था, लेकिन अब तक सिर्फ 59 लाख मकानों का ही निर्माण हुआ है। 

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सात साल में एक बार भी पार नहीं हुआ 20 लाख का आंकड़ा

पीएमएवाई पोर्टल के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एक साल में बनकर तैयार होने वाले मकानों की संख्या पिछले सात साल में एक बार भी 20 लाख के आंकड़े को पार नहीं कर पाई है। वर्ष 2018-19 में ही सरकार सबसे अधिक 18 लाख मकानों का निर्माण करने में सक्षम हो पाई थी। वर्ष 2019-20 में 840,645 मकानों का निर्माण पूरा हुआ। वहीं, इसके बाद दो वर्षों में 14.6 लाख और 12.1 लाख मकानों का निर्माण किया गया। इस रफ्तार से सरकार को अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए पांच साल का वक्त और लगेगा। इसमें सरकार ने जिन अतिरिक्त आवासों को मंजूरी दी है, उनका हिसाब नहीं है। सरकार ने शुरू में 1.1 करोड़ मकानों के निर्माण को मंजूरी दी थी। बाद में यह संख्या बढ़ाकर 1.2 करोड़ से कुछ अधिक कर दी गई।

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कई राज्यों में निर्माण की रफ्तार बेहद धीमी

आंकड़ों से पता चलता है कि अधिकांश पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा जहां मकानों के पूरी तरह बनकर तैयार होने की दर 30 प्रतिशत से कम थी। इस लिहाज से आंध्र प्रदेश, हरियाणा, बिहार और कर्नाटक भी राष्ट्रीय औसत से नीचे रहे हैं। 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से, 18 राज्यों में मकान बनकर तैयार होने की दर राष्ट्रीय औसत से कम थी। आंध्र प्रदेश में अब तक स्वीकृत मकानों में से केवल 24 प्रतिशत ही तैयार किए जा सके हैं।  वहीं हरियाणा में 31.4 प्रतिशत और बिहार में 34.2 प्रतिशत मकान ही बनकर तैयार हुए हैं।  

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दिल्ली-चंडीगढ़ सबसे आगे

इस बीच, दिल्ली और चंडीगढ़ ने स्वीकृत संख्या से अधिक मकान बनाकर तैयार कर दिए हैं। गोवा में मकान बनाकर तैयार करने की दर 92 प्रतिशत थी, जबकि उत्तर प्रदेश सहित 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 60 प्रतिशत से अधिक मकान बनाकर लाभार्थियों को दिए हैं। सरकार के डैशबोर्ड के अनुसार, इस योजना के लिए अब तक 2 लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित राशि में से 1.18 लाख करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। जैसे-जैसे परियोजनाओं में देरी होगी निर्माण लागत में भी वृद्धि होने की संभावना है।

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