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दृष्टिबाधा नहीं बन पाई बाधा, IIM अहमदाबाद में गाड़े सफलता के झंडे
amarujala.com- Presented by: जया पाण्डेय
Updated Tue, 11 Apr 2017 10:04 AM IST
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प्राची सुखवानी
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अगर हौसला हो तो इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता। अपने हौसले के दम पर ऐसा ही कुछ कर दिखाया है प्राची सुखवानी ने। 80 फीसदी दृष्टिबाधित प्राची ने आज वो मुकाम हासिल किया है जहां पहुंचने के लोग सपने देखा करते हैं।
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अपनी कमजोर पड़ रही आंखों की रोशनी को उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने दुनिया के अग्रणी मैनेजमेंट संस्थानों में शामिल इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद में दाखिला पा लिया।
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ये पहला ऐसा मामला नहीं है जब उन्होंने सफलता का स्वाद चखा हो। इससे पहले उन्होंने कैट 2016 में सफलता के झंडे गाड़ दिए थे। उन्होंने कैट में 98.55 पर्सेंटाइल हासिल की थी।
मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली प्राची के पिता का कपड़ों का बिजनेस है और उनकी मां होममेकर के साथ एलआईसी के एजेंट के तौर पर भी काम करती हैं।
प्राची जब 3 साल की थी तभी वो रेटिनल डिग्रेडेशन नाम की बीमारी की शिकार हो गई थीं, जिसका कोई इलाज नहीं है। लेकिन उन्होंने इस बीमारी को उनकी मंजिल पाने की दिशा में कभी नहीं आने दिया।
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प्राची से जब उनके आगे की योजनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पढ़ाई पूरी होने के बाद मैं मल्टीनेशनल कंपनी ज्वॉइन करूंगी। अनुभव होने पर अपना खुद का स्टार्टअप खोलूंगी। और नेत्रहीनों के लिए एक एनजीओ भी खोलूंगी।