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बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन होने पर भारत की राह में रोड़े अटका सकता है चीन

Mon, 17 Oct 2016 03:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 17 Oct 2016 03:48 AM IST
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Power Conversion in  Bangladesh can change relation

भारत-रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में हुए अहम करार से चिंतित चीन निकट भविष्य में भारत के खिलाफ अपना कूटनीतिक अभियान और तेज कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कड़ी में चीन भारत के पड़ोसी देशों नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में अपनी सक्रियता बढ़ाने के लिए पूरी ताकत झोंकेगा। इसके अलावा वह एनएसजी में भारत के प्रवेश और जैश ए मोहम्मद के मुखिया मौलान मसूद अजहर को आतंकी घोषित कराने के भारत के प्रयास को विफल करने के अपने रुख पर डटा रहेगा।

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हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ बने विश्वव्यापी माहौल में चीन के लिए पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति का माहौल बनाना फिलहाल कठिन होगा। जहां तक बांग्लादेश की बात है तो वहां सत्ता परिवर्तन के बाद ही चीन के अभियान को बल मिल सकता है।
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दक्षिण एशिया मामलों केविशेषज्ञ और नेपाल-अफगानिस्तान में भारत के राजदूत रह चुके राकेश सूद का मानना है कि बांग्लादेश में शेख हसीना के रहते चीन उसे भारत से दूर करने में कामयाब नहीं हो पाएगा। 

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पूर्व पीएम खालिदा जिया जिनका भारत विरोधी रुख है

Power Conversion in  Bangladesh can change relation

वहां बीएनपी के मुखिया और पूर्व पीएम खालिदा जिया जिनका भारत विरोधी रुख सर्वविदित है, उनके सत्ता में आने के बाद चीन भारत के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। यह भी बड़ी सच्चाई है कि बांग्लादेश सामरिक, भौगोलिक सहित कई क्षेत्रों में भारत पर बहुत हद तक निर्भर है। ऐसे में सत्ता परिवर्तन के बाद भी खालिदा चीन को उसके मनमाफिक सहायता नहीं कर पाएंगी। मगर निश्चित रूप से चीन बांग्लादेश सहित नेपाल और श्रीलंका को साधने के लिए पूरी ताकत लगाएगा।

सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ मेजर जनरल जीडी बक्शी का मानना है कि चीन की चिंता भारत और रूस के बीच हुई एस-400 मिसाइल सिस्टम समझौते ने बढ़ा दी है। दरअसल चीन को लगता था कि भारत संबंधों के मामले में विपरीत ध्रुवों पर खड़े अमेरिका और रूस को एक साथ नहीं साध सकता। उसे रूस-भारत के रिश्ते बिगड़ने की पूरी उम्मीद थी। मगर एस-400 मिसाइल सिस्टम समझौते ने दोनों देशों की दोस्ती और गहरी कर दी। ऐसे में जाहिर तौर पर चीन परोक्ष और प्रत्यक्ष कूटनीतिक चालों के जरिये भारत की घेरेबंदी की कोशिश करेगा।

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