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Hindi News ›   India News ›   Post Operation Sindoor of Indian Army India must grow up Bangladesh China and Pakistan posing challenges

रणनीति: चीन-बांग्लादेश-पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों पर पैनी नजर; भारत को अब बच्चों सा नहीं, बड़ों की तरह रहना होगा

Tue, 20 May 2025 11:58 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 20 May 2025 11:58 PM IST
सार

भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के रवैये पर सबकी नजर है। इन देशों के बदलते रुख से साफ है कि अब भारत को अब बच्चों सा नहीं, बड़ों की तरह रहना होगा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेश भी मुंह फाड़ रहा है। ऐसे में भारत के लिए चुनौती बढ़ रही है। ऐसे हालात में पाकिस्तान और चीन खुश हैं। आखिर इनकी खुशी का राज क्या है? आइए समझें इस रिपोर्ट में

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Post Operation Sindoor of Indian Army India must grow up Bangladesh China and Pakistan posing challenges
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग; बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत के प्रधानमंत्री (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

आपरेशन सिंदूर के बाद भारत को अधिक चौकन्ना, सावधान और सतर्क रहना होगा। पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ चीन के सूत्र खुलने के बाद यह नया क्षेत्रीय बदलाव है। पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि यह चुनौती तो पहले भी थी, लेकिन समय से थोड़ा पहले खुलकर सामने आ गई। अब हमें बच्चों की बजाय बड़ों की तरह व्यवहार करना होगा।

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पूर्व एयर वाइस मार्शल एन बी सिंह कहते हैं कि क्षेत्रीय स्तर पर जटिलताएं थोड़ी बढ़ रही हैं, लेकिन भारत इस तरह की चुनौतियों से निबटने में अभ्यस्त हो चुका है। विदेश मंत्रालय के पूर्व अधिकारी एस के शर्मा कहते हैं कि प्रोपेगेंडा राग में पाकिस्तान हमेशा आगे निकल जाता है। वह रोने में मास्टर है। इस समय बांग्लादेश के साथ भी भारत के रिश्ते उनते मजबूत नहीं रहे हैं। चीन की नजर हमेशा अपने फायदे और सीमा विस्तार पर रहती है। उसे पाक अधिकृत कश्मीर में अपने हितों का डर सता रहा है, लेकिन यही दिन हमेशा नहीं रहते।
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पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन
आपरेशन सिंदूर में बुरी तरह पिटने के बाद भी पाकिस्तान जीत का जश्न मना रहा है। उसके रक्षा मंत्री चीन में बैठे हैं और चीन ने पाकिस्तान को अगस्त 2025 तक अपना पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान देने का भरोसा दिया है। चीन ने भारत के सामने पाकिस्तान के साथ चल रहे अनिश्चितकालीन संघर्ष विराम को स्थायी संघर्ष विराम में बदलने का प्रस्ताव दिया है। चीन यह जानता है कि भारत और पाकिस्तान 1971 में हुए शिमला समझौते से बंधे हैं। भारत, पाकिस्तान के साथ अपने द्विपक्षीय मामले में कभी तीसरे देश की भूमिका स्वीकार नहीं करता। अमेरिका के भी प्रस्ताव को भारत से आदर के साथ खारिज कर दिया, लेकिन चीन ने इस प्रस्ताव के जरिए अपने क्षेत्रीय प्रभुत्व का संदेश देने की कोशिश की है। भारत और पाकिस्तान के बीच में टकराव के समय चीन के एनएसए और विदेश मंत्री वांग यी ने खुल कर पाकिस्तान का साथ देने की घोषणा की थी।
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अब बांग्लादेश चलते हैं, वहां मोहम्मद युनूस की सरकार लालमुनिर हॉट वायुसैनिक हवाई अड्डे को विकसित करना चाहता है। चीन की नजर पहले से वहां टिकी है। चीन ने बांग्लादेश को दो पनडुब्बियां दे रहा है। बांग्लादेश के नौसैनिक तट पर छह पनडुब्बियों की क्षमता का प्लान है। चीन बांग्लादेश के इस डेवलपमेंट को लेकर हमारे रणनीतिकार गंभीर है। दरअसल लालमुनिर हॉट चिकन नेक एरिया से सटा हुआ है। चिकन नेक एरिया ही पश्चिम बंगाल को पूर्वोत्तर से जोड़ता है।

भारत को अब आगे सावधान रहना होगा
पूर्व वायुसैनिक एयर वाइस मार्शल कहते हैं कि भारत और चीन के बीच में व्यापारिक संबंध अपनी जगह हैं, लेकिन यह सभी को पता है कि पाकिस्तान 80 प्रतिशत मिलिट्री हार्डवेयर उसी से खरीदता है। बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के बाद सत्ता में आए मोहम्मद युनूस का रुख किसी से छिपा नहीं है। वह चीन यात्रा पर थे, तभी इसके कयास लग रहे थे। एनबी सिंह कहते हैं कि चीन तो पहले से सामरिक दृष्टि से भारत को घेर रहा था। चीन भारत के पड़ोसी देशों में लगातार अपनी पैठ बना रहा है। भारत इसे जानता है और अब हमें थोड़ा और अधिक सावधान रहना होगा। अपनी सैन्य क्षमता पर विशेष ध्यान देना होगा। आर्थिक विकास पर जोर देना होगा। 

विदेश मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं कि भारत इस समय अपने सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भेज रहा है। रंजीत कुमार कहते हैं कि पाकिस्तान और भारत की अर्थ, राजनीति, रक्षा समेत किसी भी क्षेत्र में कोई तुलना नहीं है। बांग्लादेश को तो अभी बहुत कुछ पाना है, लेकिन पाकिस्तान के साथ चीन का इतनी जल्दी खुलकर आ जाना थोड़ा तंग करता है। इससे पहले भारत पाकिस्तान में कई टकराव हुए, लेकिन चीन ने अपनी भूमिका को सीमित रखा था। रंजीत कहते हैं कि पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीस तो ढाई दशक पहले चीन से खुले तौर पर चौकन्ना कर चुके थे। रंजीत कहते हैं कि चीन का यह गेम प्लान 5-10 साल और पर्दे के पीछे रहता तो ठीक था।

पश्चिम के देश और रूस का संदेश
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भारत को नसीहत देते हैं कि पश्चिम के देश चीन को भिड़ाने में लगे हैं। भारत के कुछ रणनीतिकारों कहना है कि चिंता की बात नहीं है। भारत के पास शुभचिंतकों की कमी नहीं है। इस्राइल भारत का अच्छा साथ देता है। यूरोप के कुछ देशों समीकरण ठीक है। रूस और अमेरिका में थोड़ी समझ बन रही है और रूस कुछ कारणों से चीन से दूरी बनाकर रखना चाहता है। एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। एनबी सिंह कहते हैं कि एक खिड़की बंद होती है तो कई खुल जाती हैं। इसलिए संभावनाएं खत्म नहीं होती।


पाकिस्तान इतना खुश क्यों है?
पाकिस्तान को लग रहा है कि आपरेशन सिंदूर में भारत की  सच्चाई पर उनका प्रोपेगेंड़ा जीत गया। कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय रंग देने में उसे थोड़ी कामयाबी मिल गई और विश्व के कुछ देश उसके साथ खड़े हुए। रंजीत कुमार कहते हैं कि पाकिस्तान को सबसे बड़ी खुशी चीन के खुलकर साथ आने की हुई होगी। क्योंकि कारगिल से लेकर अभी तक अमेरिका भारत और पाकिस्तान के बीच में टकराव रुकवाने में भूमिका निभाता था। पहली बार इस क्षेत्रीय तनाव में चीन अपनी टांग अड़ा रहा है। पाकिस्तान के रणनीतिकारों को चीन के टांग अड़ाने में अपनी जीत नजर आ रही है, क्योंकि चीन का यह प्रयास भारत के गले उतरने वाला नहीं है।

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