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आखिर भारत में कोरोना के कम मामलों की असल वजह क्या है?
Wed, 18 Mar 2020 07:22 PM IST
अनिल पांडेय
बीबीसी
बीबीसी
Published by: अनिल पांडेय
Updated Wed, 18 Mar 2020 07:22 PM IST
सार
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या कम करके बताई जा रही है या टेस्ट कम किए जा रहे हैं, जिसके कारण अब तक सामने आने वाले मामलों की संख्या रविवार तक केवल 110 ही है?
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भारत में कोरोना वायरस परीक्षण की व्यवस्था
- फोटो : PTI
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विस्तार
अगर आपको बुखार और जुकाम जैसे कोरोना वायरस के लक्षण हैं और आप सीधे दिल्ली के किसी सरकारी अस्पताल जाकर कोरोना वायरस के लिए टेस्ट कराना चाहते हैं तो आपको वापस भेज दिया जाएगा। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव की सहायक डॉक्टर ऋतु कहती हैं कि पहले कोरोना वायरस के लिए स्थापित हेल्पलाइन को फोन करना पड़ेगा।
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डॉक्टर ऋृतु कहती हैं, "अगर आपको कोरोना वायरस से पीड़ित होने का शक है तो आप पहले अस्पताल जाने के बजाय हेल्पलाइन को फोन करें। हेल्पलाइन में लोग आपसे कई सवाल करेंगे, जैसे कि क्या आपने हाल में कोई विदेश यात्रा की थी या ऐसे किसी व्यक्ति के साथ समय बिताया था जो हाल ही में विदेश यात्रा से लौटे हैं? या फिर इस बीमारी से पीड़ित किसी व्यक्ति से मिले थे? अगर जवाब है हां तो आपको अस्पताल भेज करकर टेस्ट कराया जाएगा और अगर जवाब है नहीं तो आपको टेस्ट के लिए नहीं भेजा जाएगा।"
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वो आगे कहती हैं कि इस सिलसिले में दिल्ली सरकार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा फंडेड संस्था इंडियन कॉउन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की गाइडलाइन्स के अनुसार काम कर रही है।
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आईसीएमआर गाइडलाइन में कहा गया है, "बीमारी मुख्य रूप से प्रभावित देशों की यात्रा करने वाले व्यक्तियों या पॉजिटिव मामलों के करीबी संपर्क में होती है। इसलिए सभी व्यक्तियों का परीक्षण नहीं किया जाना चाहिए।"
'टेस्ट ही कम हो रहे हैं'
कोरोना वायरस के लिए भारत में केंद्रीय हेल्पलाइन नंबर है 011-23978046
इसके इलावा हर राज्य का अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर भी है।
दिल्ली के महारानी बाग की एक महिला स्वाति कुछ दिन पहले बुखार और खांसी से पीड़ित होने के बाद राम मनोहर लोहिया अस्पताल गईं ताकि कोरोना वायरस का टेस्ट करा सकें। वो एक गरीब परिवार से है और हाल ही में बिहार से लौटी थी। उनका टेस्ट नहीं किया गया। अस्पताल वालों ने ये कहकर वापस भेज दिया कि 'उन्होंने विदेश यात्रा नहीं की थी और बुखार-खांसी होने से जरूरी नहीं कि कोरोना वायरस हो।''
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कोरोना वायरस का टेस्ट करने की सरकार की इस प्रणाली से चिंतित हैं। उनके अनुसार एक अरब से अधिक आबादी वाले देश भारत में टेस्ट बहुत कम किए जा रहे हैं।
टेस्ट का तरीका
एशिया और ओशिनिया में चिकित्सा संघों की संस्था (CMAAO) के अध्यक्ष डॉक्टर केके अग्रवाल इस तरीके से असहमत हैं।
वो कहते हैं, "ये तरीका रेस्ट्रिक्टिव (सीमित करने वाला) है। दक्षिण कोरिया, हांगकांग और सिंगापुर में लिबरल (उदार) तरीका अपनाया गया है जहां कोरोना वायरस के लक्षण वाले हर मरीज का सरकारी और निजी अस्पतालों में तुरंत टेस्ट किया जाता है।"
डॉक्टर अग्रवाल की संस्था में दक्षिण कोरिया भी शामिल है जहां के डॉक्टरों से वो लगातार संपर्क में हैं। वो चाहते हैं कि भारत में भी दक्षिण कोरिया का मॉडल अपनाया जाए। तो क्या इस बात की संभावना है कि भारत में कोरोना वायरस की रिपोर्टिंग कम करके बताई जा रही है?
डॉक्टर अग्रवाल कहते हैं, "मैं ये नहीं कहूंगा। कम करके बताने का मतलब ये हुआ कि अगर मामले 100 हैं तो आप 60 की जानकारी दे रहे हैं। यहां तो टेस्ट ही कम कराए जा रहे हैं जिसके कारण कम मामले सामने आ रहे हैं।"
डॉक्टर अग्रवाल का अनुमान है कि अगर भारत दक्षिण कोरिया का मॉडल अपनाए तो मामलों की संख्या 5000 तक पहुंच सकती है। वो कहते हैं, "अधिक मामले सामने आने से प्रॉब्लम क्या है?, ये कोई बुरी बात नहीं होगी"
दक्षिण कोरिया में हर 50 लाख आबादी पर 3692 लोगों का टेस्ट किया जा रहा है। इटली में हर 10 लाख आबादी पर 826 लोगों का टेस्ट किया जा रहा है। लेकिन भारत में अब तक कुछ हजार लोगों का ही टेस्ट हुआ है। देश में कोरोना वायरस के लिए टेस्ट करने की किट की संख्या आबादी के हिसाब से बहुत ही कम है।
इस घातक बीमारी से अब तक दिल्ली में एक व्यक्ति की मौत हुई है और पूरे भारत में केवल दो लोगों ने दम तोड़ा है। लेकिन पूरी दुनिया में इस बीमारी ने अब तक 6,000 से अधिक लोगों की जान ली है।
कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने जिम, नाइट क्लब्स, स्पा और 50 से अधिक लोगों की भीड़ पर 31 मार्च तक के लिए पाबंदी लगाई है।