सियासत: पुष्कर सिंह धामी के हाथों उत्तराखंड चुनाव की कमान, तीरथ सिंह रावत नहीं थे जिताऊ चेहरा
भाजपा की केंद्रीय टीम मान रही थी कि तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड में पार्टी को जीत नहीं दिला सकते थे, उनकी विदाई का यही सबसे बड़ा कारण रहा।
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भाजपा ने एक बार फिर लोगों को चौंकाते हुए उत्तराखंड में एक ऐसे युवा चेहरे को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी है जो दूर-दूर तक मुख्यमंत्री पद की रेस में नहीं था। बेहद सामान्य सैनिक परिवार की पृष्ठभूमि से आने वाले पुष्कर सिंह धामी पर पार्टी ने दांव लगाया है। धामी खटीमा विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो बार विधायक रहे हैं। ब्राह्मण और ठाकुर समुदाय के बीच संतुलन रखते हुए पार्टी ने इस कुमाऊं राजपूत को जिम्मेदारी दी है। पार्टी को उम्मीद है कि इस नए चेहरे के साथ उसे उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल होगी।
बीजेपी के एक केंद्रीय नेता के मुताबिक, तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाए रखने में संवैधानिक संकट बड़ी बाधा नहीं बन सकता था, चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय से इसकी राह निकाली जा सकती थी, लेकिन असली वजह यह थी कि तीरथ सिंह रावत केंद्रीय नेतृत्व की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। उन्हें भी ठीक इन्हीं उम्मीदों के साथ लाया गया था कि वे युवा हैं और बेहद सामान्य पृष्ठभूमि से आते हैं। उनकी सादगी से जनता को पार्टी के प्रति आकर्षित किया जा सकेगा।
लेकिन उनके विवादास्पद बयानों ने मीडिया में पार्टी की खूब किरकिरी कराई। लड़कियों की 'छोटी-फटी जींस' जैसे विवादित बयानों ने जनता के बीच उनकी छवि खराब कर दी थी। अपने केवल 115 दिन के कार्यकाल में वे सबको साथ नहीं रख पाए। केंद्रीय टीम को लगातार इस बात का संदेश मिल रहा था कि अगर तीरथ सिंह रावत के नेतृत्व में चुनाव में जाने का निर्णय किया जाता है तो यह पार्टी पर उलटा पड़ सकता है। यही कारण है कि उन्हें दिल्ली बुलाकर संवैधानिक संकट की बात बताकर इस्तीफा देने के लिए कह दिया गया।
संघ की रिपोर्ट भी उम्मीद के मुताबिक नहीं
जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड चुनावों को लेकर आरएसएस की रिपोर्ट भी पार्टी की उम्मीदों के मुताबिक नहीं है। संघ पार्टी को लगातार इस बात के लिए चेतावनी दे रहा है कि इस पहाड़ी राज्य में प्रशासन के स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार बड़ी मुसीबत का कारण बन सकता है। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के आरोप त्रिवेंद्र सिंह रावत के समय से ही लगाए जा रहे हैं। संगठन में सभी वर्ग को साथ न ले पाने का दुष्परिणाम पार्टी को उठाना पड़ सकता है।
यही कारण है कि पार्टी ने समय रहते एक ऐसे चेहरे पर दांव लगाया जिस पर अभी तक कोई दाग नहीं है। धामी का सैनिक पृष्ठभूमि से होना भी उत्तराखंड के चुनाव के लिहाज से पार्टी को सूट कर रहा था। पार्टी को उम्मीद है कि युवा, जोशीले और युवा कार्यकर्ताओं के बीच काफी लोकप्रिय धामी पार्टी की चुनावी नैया को पार लगा सकेंगे। ठीक यही उम्मीद तीरथ सिंह रावत से भी लगाई गई थी।
पुष्कर सिंह धामी के सामने चुनौती
पुष्कर सिंह धामी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी में अनेक दिग्गजों को संतुष्ट करके साथ लेकर चलने की होगी। त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत, गणेश जोशी, अरविंद पांडेय और सतपाल महाराज जैसे अनेक दिग्गज पार्टी में मौजूद हैं। सबको संतुष्ट कर पाना धामी के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।
पार्टी नेता जोशी ने कहा
उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी की नेता नेहा जोशी ने अमर उजाला से कहा कि पार्टी ने बहुत सोच-समझकर पुष्कर सिंह धामी के युवा चेहरे पर यह जिम्मेदारी दी है। वे युवा और कर्मठ हैं, पार्टी के हर वरिष्ठ का उन्हें साथ हासिल है। ऐसे में उन्हें पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय टीम का साथ मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में पार्टी एक बार फिर रिकॉर्ड बहुमत प्राप्त करेगी।