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एकनाथ खडसे के भाजपा छोड़ने से महाराष्ट्र में एनसीपी के आएंगे अच्छे दिन!

Thu, 22 Oct 2020 08:14 PM IST
गौरव पाण्डेय सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 22 Oct 2020 08:14 PM IST
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Political Scenario could change in North Maharashtra after Eknath Khadse left BJP and joined NCP
एकनाथ खडसे - फोटो : एएनआई (फाइल)

महाराष्ट्र में राजनीति ने नई करवट ली है। यह सिलसिला बीते साल विधानसभा चुनाव के बाद तब शुरू हुआ था, जब शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी के बेमेल गठबंधन से बनी महाविकास आघाड़ी सरकार अस्तित्व में आई थी। उसके बाद से सूबे में भाजपा की मुश्किलें शुरू हुईं जो अब तक जारी हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे के पार्टी से इस्तीफे के बाद एक बार फिर प्रदेश इकाई उलझन में है। इससे खानदेश में राजनीतिक समीकरण बदलने के कयास लगाए जा रहे हैं।

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एकनाथ खडसे ने भाजपा छोड़ने का ठीकरा पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस पर फोड़ते हुए शुक्रवार को शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में प्रवेश करने की घोषणा की है। कहा जा रहा है कि खडसे के एनसीपी में आने से जलगांव में भाजपा का किला ढह जाएगा। उत्तर महाराष्ट्र यानि खानदेश की राजनीति बदल जाएगी और अब तक पश्चिम महाराष्ट्र में सबसे मजबूत स्थिति में रही एनसीपी के लिए इस इलाके में भी अच्छे दिन आएंगे। 
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लेकिन देवेंद्र फडणवीस ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि जलगांव जिला भाजपा का है। वहां नेता नहीं कार्यकर्ता पार्टी की जान हैं। इसलिए खडसे के जाने का कोई असर नहीं होगा। दूसरी ओर, एनसीपी के प्रदेश सचिव रवींद्र पवार कहते हैं कि खानदेश के जलगांव, नांदुरबार और धुले जिले में खडसे का अच्छा जनाधार है। खडसे के पार्टी में शामिल होने से उत्तर महाराष्ट्र में पार्टी मजबूत होगी।
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खडसे के एनसीपी में आने से नाराज है एक तबका
दूसरी ओर, एनसीपी के कुछ नेता एकनाथ खडसे को पार्टी में शामिल करने से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि वर्षों से जो ईमानदारी से पार्टी में काम कर रहे हैं उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी जाती है। लेकिन, दूसरी पार्टी से आने वाले नेताओं को सहज ही सब कुछ मिल जाता है। 

कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि यह राजनीति है। विधानसभा चुनाव से पहले फडणवीस ने एनसीपी के कई नेताओं को भाजपा में शामिल कर बड़ा गेम खेला था। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने एकनाथ खडसे जैसे बड़े नेता को भाजपा से फोड़कर इसका बदला लिया है।


स्थानीय निकाय संस्थाओं में बढ़ेगा एनसीपी का दबदबा
एकनाथ खडसे के आने से फिलहाल कोई लाभ हो या न हो लेकिन स्थानीय नगर निकाय संस्थाओं में एनसीपी का दबदबा बढ़ सकता है। जलगांव महानगरपालिका में भाजपा की सत्ता है जिसमें से कई पार्षद खडसे समर्थक हैं। माना जा रहा है कि यदि पार्षदों का समर्थन मिला तो जलगांव महानगरपालिका में भाजपा सत्ता से बेदखल भी हो सकती है। वहीं, जलगांव के ग्रामीण भाग में सावदा, यावल और भुसावल नगरपालिका में भी सत्ता में बदलाव हो सकता है।

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