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नाकाफी साबित होगा पार्टियों के कैश चंदे पर लगाम का ऐलान, जानें क्यों

Wed, 01 Feb 2017 06:26 PM IST
अमित कुमार निरंजन, नई दिल्ली
अमित कुमार निरंजन, नई दिल्ली Updated Wed, 01 Feb 2017 06:26 PM IST
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 political Parties are not obliged to tell the source of income
चंदे पर चोट - फोटो : amar ujala
आम बजट में वित्त मंत्री के राजनैतिक दल की 2000 रुपए नकदी चंदे की सीमा तय करने के फैसले को ऐतिहासिक माना जा रहा है। लेकिन इस पहल से फिर भी पता नहीं चल पाएगा कि किसी दानदाना ने चेक या ऑनलाइन माध्यम से कितना पैसा राजनैतिक पार्टियों को दिया। क्योंकि पार्टियां उस दानदाता का चंदा बताने के लिए बाध्य नहीं हैं जो उन्हें 20 हजार रुपए से कम चंदा देता है।
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में ऐलान किया है कि कोई भी राजनैतिक दल किसी दानदाता से दो हजार से ज्यादा का नकद नहीं ले सकता है। ये माना जा रहा है कि इससे राजनैतिक दलों में पारदर्शिता आएगी।
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एडीआर के संस्थापक सदस्य जगदीप छोकर कहना है कि इससे फिर भी यह पता नहीं लग पाएगा कि किस राजनैतिक पार्टी को किसने कितने चंदा दिया है अगर दानदाता 20 हजार रुपए से कम चंदा देता है तो। क्योंकि चुनाव आयोग से राजनैतिक पार्टियों को छूट मिली हुई है कि वह दानदाता के 20 हजार रुपए से कम चंदा देने वाले का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं है। यह नियम अब भी लागू होगा।
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चुनाव आयोग की सिफारिशें दरकिनार

 political Parties are not obliged to tell the source of income

एडीआर की सदस्या लक्ष्मी श्रीराम ने बताया कि चंदे और आय से संबंधित वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट अक्टूबर तक चुनाव आयोग को सौंपती हैं। जिसमें नकदी, बैंक बैलेंस सहित कई अन्य जानकारियां होती हैं। उस रिपोर्ट में उन्हीं दानदाताओं का ब्यौरा होता जिन्होंने 20 हजार रुपए से अधिक चंदा दिया है। इन्हें ज्ञात स्त्रोत कहते हैं। लेकिन उसमें उनका ब्यौरा नहीं जिन्होंने 20 हजार रुपए से कम चंदा दिया हो। इन्हें अज्ञात स्त्रोत की श्रेणी में रखा जाता है। चुनाव आयोग इस रिपोर्ट को बाद में आयकर विभाग को सौंप देती है। 

जेटली के इस कदम से सिर्फ पार्टी के पास ही जानकारी होगी कि किसने चेक से या डिजिटल माध्यम से चंदा दिया है। आयकर विभाग और चुनाव आयोग को इसकी जानकारी नहीं होगी। इस कारण यह जानकारी फिर भी सार्वजनिक नहीं हो पाएगी।

चुनाव आयोग ने चुनाव सुधार को लेकर केन्द्र सरकार के सामने कुछ सिफारिश रखे थे। चुनाव आयोग ने सुझाया था कि जो भी व्यक्ति चंदा दे रहा है उसका पैन कार्ड का ब्यौरा जरूर लिया जाए। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने केन्द्र सरकार से सिफारिश की थी कि दो हजार से ऊपर चंदा देने का ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए। लेकिन आयोग की सिफारिशों को बजट में दरिकनार किया गया।

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