नाकाफी साबित होगा पार्टियों के कैश चंदे पर लगाम का ऐलान, जानें क्यों
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में ऐलान किया है कि कोई भी राजनैतिक दल किसी दानदाता से दो हजार से ज्यादा का नकद नहीं ले सकता है। ये माना जा रहा है कि इससे राजनैतिक दलों में पारदर्शिता आएगी।
एडीआर के संस्थापक सदस्य जगदीप छोकर कहना है कि इससे फिर भी यह पता नहीं लग पाएगा कि किस राजनैतिक पार्टी को किसने कितने चंदा दिया है अगर दानदाता 20 हजार रुपए से कम चंदा देता है तो। क्योंकि चुनाव आयोग से राजनैतिक पार्टियों को छूट मिली हुई है कि वह दानदाता के 20 हजार रुपए से कम चंदा देने वाले का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं है। यह नियम अब भी लागू होगा।
चुनाव आयोग की सिफारिशें दरकिनार
एडीआर की सदस्या लक्ष्मी श्रीराम ने बताया कि चंदे और आय से संबंधित वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट अक्टूबर तक चुनाव आयोग को सौंपती हैं। जिसमें नकदी, बैंक बैलेंस सहित कई अन्य जानकारियां होती हैं। उस रिपोर्ट में उन्हीं दानदाताओं का ब्यौरा होता जिन्होंने 20 हजार रुपए से अधिक चंदा दिया है। इन्हें ज्ञात स्त्रोत कहते हैं। लेकिन उसमें उनका ब्यौरा नहीं जिन्होंने 20 हजार रुपए से कम चंदा दिया हो। इन्हें अज्ञात स्त्रोत की श्रेणी में रखा जाता है। चुनाव आयोग इस रिपोर्ट को बाद में आयकर विभाग को सौंप देती है।
जेटली के इस कदम से सिर्फ पार्टी के पास ही जानकारी होगी कि किसने चेक से या डिजिटल माध्यम से चंदा दिया है। आयकर विभाग और चुनाव आयोग को इसकी जानकारी नहीं होगी। इस कारण यह जानकारी फिर भी सार्वजनिक नहीं हो पाएगी।
चुनाव आयोग ने चुनाव सुधार को लेकर केन्द्र सरकार के सामने कुछ सिफारिश रखे थे। चुनाव आयोग ने सुझाया था कि जो भी व्यक्ति चंदा दे रहा है उसका पैन कार्ड का ब्यौरा जरूर लिया जाए। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने केन्द्र सरकार से सिफारिश की थी कि दो हजार से ऊपर चंदा देने का ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए। लेकिन आयोग की सिफारिशों को बजट में दरिकनार किया गया।