फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Political discord in Nepal KP Sharma Oli not in mood for any compromise with Prachanda faction

नेपाल में राजनीतिक कलह, प्रचंड गुट से किसी तरह के समझौते के मूड में नहीं केपी शर्मा ओली 

Mon, 30 Nov 2020 04:52 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 30 Nov 2020 04:52 AM IST
विज्ञापन
Political discord in Nepal KP Sharma Oli not in mood for any compromise with Prachanda faction
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली - फोटो : एएनआई

नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी में आपसी कलह आर-पार की लड़ाई का रूप लेने लगी है। शनिवार देर शाम तक चली पार्टी सचिवालय की बहुप्रतीक्षित बैठक में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने ये साफ कर दिया है कि वह पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ गुट से किसी तरह के समझौते के मूड में नहीं है।

विज्ञापन


अब सब कुछ दहल पर निर्भर करता है के वह मेलमिलाप करें या अपना अलग रास्ता चुनें। ओली का संदेश साफ है पार्टी के सह अध्यक्ष प्रचंड को उनके सामने झुककर रहना होगा। ओली ने आरोप लगाया है कि प्रचंड ने मतभेदों को दुश्मनी में बदल दिया है।  
विज्ञापन


पीएम बोले- मतभेदों को दुश्मनी में बदल प्रचंड ने पार्टी को संकट में धकेला, दस्तावेज किए खारिज 
प्रधानमंत्री ओली ने 13 नवंबर को दहल की ओर से पेश 19 पेज के राजनीतिक दस्तावेज के जवाब में बैठक के दौरान अपना राजनीतिक दस्तावेज पेश किया। ओली का संदेश साफ था कि पार्टी के कर्ताधर्ता वही हैं। नेपाली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ओली ने प्रचंड पर व्यक्तिगत टिप्पणी तो की हीं उनके राजनीतिक हैसियत पर भी सवाल खड़ा कर दिया। दहल ने 13 नवंबर की बैठक में ओली पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


ओली ने उन्हीं आरोपों का जवाब 38 पेज में बैठक के दौरान दिया साथ ही दहल पर कई गंभीर आरोप भी मढ़े। यही नहीं उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल को भी आडे़ हाथों लिया नतीजतन माधव भी अब ओली के खिलाफ खड़े हो गए हैं। माधव ने प्रचंड से हाथ मिलाया तो ओली ने उन्हें याद दिलाया कि प्रचंड ने ही उन्हें राष्ट्रपति की कुर्सी पाने से रोका था। 

ओली नहीं चाहते पार्टी में दो अध्यक्ष 
फिलहाल ओली और प्रचंड दोनों नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सह अध्यक्ष हैं। यहां के अखबार काठमांडो पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट में राजनीतिक विश्लेषक हरि रोका के हवाले से यह कहा गया है कि शनिवार को ओली ने यह साफ कर दिया कि अब वे पार्टी में दो अध्यक्षों की व्यवस्था के साथ चलने के तैयार नहीं हैं। यानी वह चाहते हैं कि प्रचंड यह पद छोड़ दें और उनके लिए पार्टी में कोई और इंतजाम किया जाए। 

दहल से मिलन का एक रास्ता खुला 
पीएम ओली ने अपने तीखे तेवरों के बावजूद दहल से मेलमिलाप का एक रास्ता खुला रखा है। बैठक में ओली ने कहा कि अगर दहल अपना राजनीतिक दस्तावेज वापस ले लें, तो वे भी अपने दस्तावेज को वापस ले लेंगे। उसके बाद दोनों पक्ष एक साझा दस्तावेज पेश कर सकते हैं। इसका मतलब है कि उन्होंने गेंद दहल के पाले में डाल दी है। अगर दहल ओली की बात मानते हैं मतलब वह झुक रहे हैं, जिसका असर उनके सियासी हैसियत पर पड़ेगा। 

राजनीतिक करियर को बचाया था 
ओली ने कहा, 2018 में प्रचंड की पार्टी के साथ अपनी पार्टी के विलय पर राजी होकर असल में उन्होंने प्रचंड के खत्म हो चुके राजनीतिक करियर को बचा लिया था। उन्होंने ये आरोप भी लगाया कि 2017 में मेयर के चुनाव में प्रचंड ने अपनी बेटी को जितवाने के लिए धोखाधड़ी का सहारा लिया। 


ओली के दस्तावेज बदले की भावना से भरे 
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के मुताबिक, ओली का दस्तावेज बदले की भावना से भरा हुआ है। ओली ने जो व्यक्तिगत टिप्पणियां की हैं उससे सब नाराज हैं। ओली ने दहल के दस्तावेज को इल्जामों का पुलिंदा बताया, जबकि खुद अपने दस्तावेज में भी उन्होंने यही काम किया है। ओली ने पार्टी के नेताओं से पार्टी की एकता कायम रखने की अपील की है पर पार्टी नेताओं का कहना है कि उन्होंने खुद इसकी राह मुश्किल बना दी है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed