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राजस्थान का सियासी हाल: गहलोत सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में नए पेंच, दारोमदार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर

Thu, 11 Nov 2021 09:42 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 11 Nov 2021 09:42 PM IST
सार

जानकारी के अनुसार, सीएम अशोक गहलोत फिलहाल विस्तार के पक्ष में तो नजर आ रहे हैं लेकिन वे 9 से ज्यादा खाली पदों पर ही मंत्री बनाए जाने की बात कह रहे हैं। जबकि हाईकमान ठीक से काम नहीं करने वाले मंत्रियों को हटाकर मंत्रिमंडल में फेरबदल करने के पक्ष में दिखाई दे रहा है।

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Political condition of Rajasthan cabinet expansion of Gehlot government Update Congress President Sonia Gandhi in charge Latest News Update
अशोक गहलोत-सचिन पायलट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दिल्ली में जमे हुए हैं। वहीं राज्य में पंजाब जैसे हालात न हों इसलिए गांधी परिवार भी सक्रिय हो गया है। हालांकि इस बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार में अब पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का पेंच फंस गया है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोई व्यापक मंत्रिमंडल विस्तार किए जाने के पक्ष में नहीं है तो वहीं सचिन पायलट अब मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल को लेकर अड़े हुए हैं और 2 साल के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए ज्यादा से ज्यादा नए चेहरों को मंत्रिमंडल में मौका दिए जाने के पक्ष में हैं। उधर, पायलट ने दौसा में एक सवाल के जवाब में कहा है कि अगला चुनाव जीतना है तो कांग्रेस संगठन और सरकार को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने ये भी कहा कि जिन कार्यकर्ताओं और नेताओं ने पिछली बार सत्ता दिलाई है, उनको मान सम्मान मिलना ही चाहिए।  

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विस्तार और फेरबदल में उलझा मामला
जानकारी के अनुसार, सीएम अशोक गहलोत फिलहाल विस्तार के पक्ष में तो नजर आ रहे हैं लेकिन वे 9 से ज्यादा खाली पदों पर ही मंत्री बनाए जाने की बात कह रहे हैं। जबकि हाईकमान ठीक से काम नहीं करने वाले मंत्रियों को हटाकर मंत्रिमंडल में फेरबदल करने के पक्ष में दिखाई दे रहा है। बैठक में गुजरात प्रभारी रघु शर्मा और पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी के साथ प्रदेशाध्यक्ष और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को मंत्री बनाए रखने या न रखने पर भी चर्चा हुई है।
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बैठक में प्रभारियों को लेकर यह कहा गया कि भाजपा ने भी केंद्रीय मंत्रियों को राज्य का प्रभारी बना रखा है इसलिए मंत्रियों को भी संगठन की जिम्मेदारियों के साथ अपने पदों पर बरकरार रखा जाए। इसके अलावा एक व्यक्ति, एक पद वाले फॉर्मूला लागू करने को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। अगर ये फॉर्मूला लागू हुआ तो इसका सबसे ज्यादा असर सीएम गहलोत के गुट पर पड़ेगा, क्योंकि ऐसे में उनके समर्थक मंत्रियों की कुर्सी जा सकती है। हालांकि, इस पर भी फैसला सोनिया गांधी के स्तर पर ही होने की संभावना है।
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सचिन पायलट की भूमिका पर भी चर्चा

  • जानकारी के मुताबिक राजस्थान के मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में सचिन पायलट कैंप के विधायकों-मंत्रियों को भी जगह मिलेगी। पायलट खेमे ने चार से छह मंत्रियों की मांग की थी। लेकिन उनके गुट से 3 से 4 विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। वहीं संकट के समय सरकार का साथ देने वाले निर्दलीय विधायकों को भी मंत्री बनाया जा सकता है। बसपा छोड़ कांग्रेस में आने वाले विधायकों को भी एडजस्ट किया जा सकता है। जबकि मंत्री नहीं बनने की स्थिति में विधायकों को कहां एडजस्ट किया जाए इसका फॉर्मूला भी हाईकमान के साथ तय किया जा रहा है।
  • सूत्रों की मानें तो हाईकमान ही तय करेगा कि पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की भूमिका प्रदेश में क्या रहने वाली है। इसे लेकर प्रदेश प्रभारी अजय माकन और केसी वेणुगोपाल सोनिया गांधी से सलाह लेंगे। सचिन पायलट को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा या फिर उन्हें संगठन में क्या भूमिका दी जाएगी, इस पर भी चर्चा होनी है।


जल्द हो सकता है विस्तार
सूत्रों का कहना है कि राजस्थान सरकार में कुछ नए चेहरों को बतौर मंत्री शामिल किया जा सकता है। हाईकमान से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख तय की जाएगी। फिलहाल राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र भी दिल्ली में हैं। वे 13 नवंबर को जयपुर लौटेंगे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बीच हाईकमान की सहमति मिलने के बाद सोमवार यानी 15 नवंबर को राजभवन में मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। हालांकि, विस्तार की तारीखों में भी पेंच फंसता हुआ नजर आ रहा है। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 17 दिसंबर के बाद मंत्रिमंडल विस्तार के पक्ष में हैं तो वहीं पार्टी के शीर्ष नेता इसी माह मंत्रिमंडल विस्तार के लिए दबाव बना रहे हैं।

राजस्थान में गहलोत सरकार 2018 के अंत में बनी थी। अब प्रदेश में सरकार तीन साल पूरे करने जा रही है। अभी तक के कार्यकाल में गहलोत ने एक बार भी विस्तार या फेरबदल नहीं किया है। पिछले साल राज्य में आए सियासी संकट के बाद उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह और खाद्य मंत्री रमेश मीणा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके अलावा गहलोत सरकार के एक मंत्री मास्टर भंवर लाल मेघवाल का निधन भी हो गया था।

थोड़ा सब्र रखें, सब पता चल जाएगा: गहलोत

  • बुधवार की शाम गहलोत ने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ मंत्रिमंडल फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों पर चर्चा की थी। इस बैठक में सभी खेमों के नेताओं को जगह देकर संतुष्ट करने के फॉर्मूले पर भी चर्चा हुई थी। इसके बाद गुरुवार को सीएम ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। इस बैठक के बाद गहलोत ने कहा कि मैं अपनी रिपोर्ट हाईकमान को दे चुका हूं। राज्य में मंत्रिमंडल फेरबदल पर हाईकमान फैसला करेगा। मैंने राजस्थान के विषय पर सारी स्थिति सोनिया गांधी के साथ कल हुई बैठक में रख दी है। अब आगे का फैसला आलाकमान पर छोड़ा है, जो आलाकमान कहेगा वह हम सब को मंजूर होगा।
  • मंत्रिमंडल फेरबदल होगा या नहीं इस सवाल पर सीएम ने कहा कि यह हाईकमान तय करेगा कि कब फेरबदल करना है। राज्य प्रभारी अजय माकन इस बारे में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष से बात करेंगे, उसके आधार पर हाईकमान फैसला करेगा। उन्होंने कहा कि आप थोड़ा सब्र रखो। मीडिया में तो मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख कई बार घोषित होती रहती है जो मुझे ही पता नहीं होती। हम मिलते रहते हैं। केसी वेणुगोपाल हमारे संगठन महासचिव है। अजय माकन प्रभारी हैं। प्रियंका गांधी ने भूमिका अदा की थी कि हम सब एकजुट रहें। पहले भी चर्चा होती रही है, थोड़ा सब्र रखिए।
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