#Lockdown india: कोटा मामले पर अब सियासी संग्राम, योगी से मायावती खुश, नीतीश खफा, गृहमंत्री शाह को एतराज
- जेडीयू महासचिव बोले, यूपी सरकार के फैसले से विपक्षी दलों को मिला हमले का मौका
- बसपा प्रमुख ने सीएम योगी के फैसले को बताया स्वागत योग्य कदम
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जेडीयू महासचिव केसी त्यागी ने स्वीकार किया कि कहा कि नीतीश ने गृहमंत्री से बातचीत कर अपना एतराज जताया है। यूपी सरकार के फैसले के कारण बिहार सरकार के सामने धर्म संकट की स्थिति पैदा हो गई है। विरोधी दलों को चुनावी साल में हम पर हमला करने का मौका मिल गया है। जेडीयू सूत्रों ने बताया कि जब बीते 23 मार्च को योगी सरकार ने दिल्ली से प्रवासी मजदूरों को बस से वापस बुलाया था तब भी नीतीश ने केंद्र सरकार के समक्ष नाराजगी जताई थी।
नीतीश का कहना था कि इस फैसले ने उन पर अपने राज्यों के प्रवासी मजदूरों को भी वापस लाने का दबाव बना दिया है। तब केंद्र सरकार में शीर्ष स्तर पर पूरे मामले में हस्तक्षेप किया गया। अब कोटा से छात्रों को वापस लाने के नए सिरे से टकराव की स्थिति बनी है।
इसलिए बढ़ी नीतीश की चिंता...
दरअसल बिहार में इसी साल अक्टूबर महीने में विधानसभा चुनाव होने हैं। विपक्षी दलों ने लॉकडाउन में फंसे बिहारी मजदूरों के मामले को मुद्दा बना लिया है। चूंकि पड़ोसी राज्य यूपी अपने मजदूरों-छात्रों को वापस बुलाना शुरू किया है, इसलिए विपक्षी दल सवाल पूछ रहे हैं कि ऐसा ही कदम नीतीश क्यों नहीं उठा रहे।
प्रवासी मजदूरों के बारे में भी सोचे सरकार
यूपी सरकार ने लॉकडाउन के कारण कोटा में फंसे 7500 छात्रों की सकुशल वापसी के लिए कई बसें भेजी हैं। यह स्वागत योग्य कदम है। बसपा भी इसकी सराहना करती है। लेकिन सरकार से अनुरोध है कि वह उन लाखों प्रवासी मजदूरों के परिवार की चिंता करे जो अपने घरों से दूर नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।’- मायावती, बसपा प्रमुख
लॉकडाउन का पाठ सिखा रहे नीतीश
‘बिहार के लोग देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए हैं, लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री केवल लॉकडाउन के सिद्धांतों का पाठ सिखा रहे हैं। विभिन्न राज्य सरकारें शायद कुछ कर रही हों, लेकिन नीतीश कुमार ने संबंधित राज्य सरकारों से बात तक नहीं की। यहां तक कि उन्होंने पीएम के साथ हुई मुख्यमंत्रियों की बैठक में भी इस मुद्दे को नहीं उठाया।’ - प्रशांत किशोर, पूर्व जेडीयू उपाध्यक्ष