वायरल वीडियो पर पुलिस का दावा: व्यक्ति अकेला कर रहा था यात्रा , ट्रैफिक जाम में नहीं फंसी थी कोई गर्भवती महिला
बंगलूरू में वीआईपी मूवमेंट के कारण गर्भवती पत्नी के ट्रैफिक में फंसने के मामले में पुलिस ने दावा किया है किव्यक्ति अकेले यात्रा कर रहा था। वहीं, पुलिस ने कहना है कि मेडिकल इमरजेंसी को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है और झूठी खबरें फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विस्तार
बंगलूरू पुलिस ने मंगलवार को जनता से आग्रह किया कि वह किसी भी मुद्दे को सनसनीखेज बनाने से पहले तथ्यों की पुष्टि करें। पुलिस ने कहा कि एक जांच में पता चला है कि वायरल वीडियो में दिख रहा वह व्यक्ति, जो यह आरोप लगा रहा था कि वीआईपी आवाजाही के लिए यातायात रुकने के कारण उसकी गर्भवती पत्नी फंस गई थी। असल में वह अकेले यात्रा कर रहा था।
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क्या है पूरा मामला?
रविवार को हुई इस घटना ने सोशल मीडिया पर आक्रोश पैदा कर दिया, क्योंकि ऐसी खबरें थीं कि राज्यपाल के काफिले की आवाजाही के लिए ओल्ड एयरपोर्ट रोड पर यातायात रोक दिया गया था। यह स्पष्टीकरण उस वीडियो के सामने आने के एक दिन बाद आया है, जिसकी जांच सोशल मीडिया पर शुरू की गई थी। इस वीडियो में कथित तौर पर एक व्यक्ति को ओल्ड एयरपोर्ट रोड पर धरना देते हुए दिखाया गया है, जिसमें वह दावा कर रहा है कि वीआईपी आवाजाही के लिए लागू यातायात अवरोध के कारण उसकी गर्भवती पत्नी उनकी गाड़ी के अंदर फंसी हुई है।
झूठी खबरें फैलाने पर की जाएगी कार्रवाई
वायरल घटना के संबंध में, बंगलूरू पुलिस ने एक्स पोस्ट में कहा कि जांच के दौरान यह पाया गया कि संबंधित व्यक्ति अकेले यात्रा कर रहा था। इसमें कहा गया है, 'हम यह दोहराना चाहते हैं कि सड़क यात्रा के दौरान किसी भी स्थिति में, एम्बुलेंस और चिकित्सा आपातकालीन मामलों को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है।' पुलिस ने जनता से किसी भी मुद्दे को सनसनीखेज बनाने या फैलाने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने का भी अनुरोध किया। इसके साथ ही कहा है कि झूठी खबरें फैलाने पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक यूजर ने वीडियो अपलोड किए, जो वायरल हो गया है। वीडियो में एक परेशान वाहन चालक पुलिसकर्मियों के सामने सड़क पर बैठा हुआ दिखाई दे रहा है। जब पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया, तो उसने कथित तौर पर हटने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही दावा किया कि उसकी गर्भवती पत्नी कार के अंदर थी। उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सार्वजनिक आपात स्थितियों की तुलना में वीआईपी आवाजाही को प्राथमिकता क्यों दी जाती है।