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चिंताजनक: 5 साल से कम उम्र के एक चौथाई बच्चों की निमोनिया से हो रही मौत, ग्रामीण इलाकों में प्रकोप ज्यादा
Fri, 14 Nov 2025 04:32 AM IST
लव गौर
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: लव गौर
Updated Fri, 14 Nov 2025 04:32 AM IST
सार
चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के बावजूद यह बीमारी आज भी बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार निमोनिया दुनिया में बाल मृत्यु का प्रमुख कारण है और भारत इसका सबसे बड़ा बोझ उठाने वाले देशों में शामिल है।
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5 साल से कम उम्र के एक चौथाई बच्चों की निमोनिया से हो रही मौत
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की लगभग 14 से 26 फीसदी मौतें केवल निमोनिया के कारण होती हैं। यानी हर चौथे बच्चे की मृत्यु इसी संक्रमण से जुड़ी है। चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के बावजूद यह बीमारी आज भी बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार निमोनिया दुनिया में बाल मृत्यु का प्रमुख कारण है और भारत इसका सबसे बड़ा बोझ उठाने वाले देशों में शामिल है। अच्छी बात यह है कि यह बीमारी न केवल उपचार योग्य है बल्कि थोड़ी सतर्कता, स्वच्छता, पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद और टीकाकरण से पूरी तरह रोकी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल द लैंसेट के अनुसार समुदाय-जनित निमोनिया (कम्युनिटी-एक्वायर्ड निमोनिया) के मामले दुनिया के कुल मरीजों के लगभग 23 फीसदी भारत मे हैं।
यह बीमारी तब होती है जब फेफड़ों के वायुकोषों में सूजन आ जाती है और उनमें तरल पदार्थ या पस भर जाता है, जिससे सांस लेना कठिन हो जाता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह संक्रमण घातक साबित हो सकता है। निमोनिया बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से होने वाला संक्रमण है। यह तब फैलता है जब संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है और उसके सूक्ष्म कण हवा में फैलकर दूसरे व्यक्ति के फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं। दूषित सतहों को छूने के बाद चेहरा या नाक-मुंह छूना भी संक्रमण का एक आम कारण है। भीड़भाड़ वाले और प्रदूषित वातावरण में इसके फैलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
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जागरूकता से आएगी 40 फीसदी कमी
भारत में निमोनिया का प्रकोप शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में देखा जाता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे इस बीमारी की चपेट में अधिक आते हैं। इसका मुख्य कारण स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुंच, टीकाकरण में कमी, कुपोषण, और घरों में ठोस ईंधन उपले, कोयला से खाना पकाने के कारण उत्पन्न धुएं का अधिक संपर्क। वहीं, शहरी क्षेत्रों में भी जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं है, क्योंकि प्रदूषण, भीड़भाड़ और वायरस के त्वरित प्रसार की वजह से निमोनिया के मामले तेजी से फैल सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जागरूकता से बाल मृत्यु में 40% तक की कमी संभव है।
ये भी पढ़ें: चिंताजनक: अमीरों की जीवनशैली और निवेश से होने वाला प्रदूषण 118 देशों के कुल उत्सर्जन से भी अधिक
इस तरह से करें बचाव
निमोनिया से बचाव पूरी तरह संभव है। इसके लिए केवल थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी की जरूरत है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार निमोनिया दुनिया में बाल मृत्यु का प्रमुख कारण है और भारत इसका सबसे बड़ा बोझ उठाने वाले देशों में शामिल है। अच्छी बात यह है कि यह बीमारी न केवल उपचार योग्य है बल्कि थोड़ी सतर्कता, स्वच्छता, पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद और टीकाकरण से पूरी तरह रोकी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल द लैंसेट के अनुसार समुदाय-जनित निमोनिया (कम्युनिटी-एक्वायर्ड निमोनिया) के मामले दुनिया के कुल मरीजों के लगभग 23 फीसदी भारत मे हैं।
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यह बीमारी तब होती है जब फेफड़ों के वायुकोषों में सूजन आ जाती है और उनमें तरल पदार्थ या पस भर जाता है, जिससे सांस लेना कठिन हो जाता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह संक्रमण घातक साबित हो सकता है। निमोनिया बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से होने वाला संक्रमण है। यह तब फैलता है जब संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है और उसके सूक्ष्म कण हवा में फैलकर दूसरे व्यक्ति के फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं। दूषित सतहों को छूने के बाद चेहरा या नाक-मुंह छूना भी संक्रमण का एक आम कारण है। भीड़भाड़ वाले और प्रदूषित वातावरण में इसके फैलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
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जागरूकता से आएगी 40 फीसदी कमी
भारत में निमोनिया का प्रकोप शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में देखा जाता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे इस बीमारी की चपेट में अधिक आते हैं। इसका मुख्य कारण स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुंच, टीकाकरण में कमी, कुपोषण, और घरों में ठोस ईंधन उपले, कोयला से खाना पकाने के कारण उत्पन्न धुएं का अधिक संपर्क। वहीं, शहरी क्षेत्रों में भी जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं है, क्योंकि प्रदूषण, भीड़भाड़ और वायरस के त्वरित प्रसार की वजह से निमोनिया के मामले तेजी से फैल सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जागरूकता से बाल मृत्यु में 40% तक की कमी संभव है।
ये भी पढ़ें: चिंताजनक: अमीरों की जीवनशैली और निवेश से होने वाला प्रदूषण 118 देशों के कुल उत्सर्जन से भी अधिक
इस तरह से करें बचाव
निमोनिया से बचाव पूरी तरह संभव है। इसके लिए केवल थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी की जरूरत है।
- बच्चों और बुजुर्गों को निमोनिया व फ्लू के टीके लगवाना सबसे प्रभावी रोकथाम है।
- नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोना संक्रमण के जोखिम को घटाता है।
- पौष्टिक आहार रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है।
- घर के अंदर धुआं या प्रदूषण न हो, खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों के आसपास।
- खांसी, बुखार, ठंड लगना या सांस फूलने जैसे लक्षणों पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
- पर्याप्त नींद केवल आराम नहीं, बल्कि शरीर के रिपेयर मैकेनिज्म का अहम हिस्सा है।
- नींद के दौरान शरीर साइटोकाइन नामक प्रोटीन बनाता है जो संक्रमण और सूजन से लड़ने में मदद करते हैं।
- शोध बताते हैं कि जो लोग सात घंटे से कम सोते हैं, उनमें संक्रमण की आशंका ज्यादा होती है।