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चिंताजनक: प्रशासनिक देरी से नहीं हो पाई टीबी जांच, संसदीय समिति ने जरूरी सुधारों पर भी दिया जोर

Thu, 20 Feb 2025 07:01 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 20 Feb 2025 07:01 AM IST
सार

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी संसदीय स्थायी समिति टीबी जांच के लिए अभिकर्मकों (री-एजेंट) और किट की खरीद में प्रशासनिक देरी की पहचान की है, जिसकी वजह से अस्पतालों में टीबी की जांच समय पर नहीं हो पाई।
 

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PM TB Free India Campaign Parliamentary Committee blamed administrative delays for lack of patients testing
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल

विस्तार

मरीजों की टीबी जांच न होने के लिए संसदीय समिति ने प्रशासनिक देरी को जिम्मेदार ठहराया। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी संसदीय स्थायी समिति टीबी जांच के लिए अभिकर्मकों (री-एजेंट) और किट की खरीद में प्रशासनिक देरी की पहचान की है, जिसकी वजह से अस्पतालों में टीबी की जांच समय पर नहीं हो पाई।

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समिति ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के उस जवाब को भी खारिज कर दिया जिसमें सीबीएनएएटी और ट्रूनेट कार्ट्रिज जैसे जांच उपकरणों की आपूर्ति प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा को लेकर सीधी जानकारी नहीं दी गई। समिति ने कहा कि अस्पतालों में इन उपकरणों की लगातार आपूर्ति होते रहना चाहिए। सरकार को इन अभिकर्मक और किटों के घरेलू उत्पादन पर ध्यान देना चाहिए जिसके लिए विशेष प्रोत्साहनों पर काम करें।
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समिति ने जरूरी सुधारों पर भी दिया जोर
समिति ने तत्काल आवश्यक सुधारों पर ध्यान देने पर भी जोर दिया। इनमें सभी अस्पतालों में टीबी वार्ड, नियमित समीक्षा, सख्त निगरानी, कुशल जनशक्ति और गुणवत्तापूर्ण टीबी दवाओं की निरंतर आपूर्ति के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय करना शामिल है। इसके अलावा समिति ने सरकार को आयात पर निर्भरता कम करने और स्वास्थ्य सेवा स्थिरता को बढ़ाने के लिए जेनेरिक टीबी दवाओं के घरेलू उत्पादन का भी समर्थन करते हुए टीबी अनुसंधान और नैदानिक परीक्षणों के लिए खर्च बढ़ाने के लिए कहा है।
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वेतनभोगी मरीजों को नुकसान से बचाना जरूरी
समिति ने कहा, टीबी संक्रमण को लेकर वेतनभोगी मरीजों के दृष्टिकोण से भी सोचने की जरूरत है। सरकार को इस पर सख्ती करनी चाहिए कि उपचार पूरा होने तक वेतनभोगी मरीजों को वेतन हानि नहीं हो। इसमें जहां संभव हो नियोक्ता प्रोत्साहन भी शामिल हो सकते हैं।


हर मरीज तक आणविक निदान की सुविधा क्यों नहीं
प्रोफेसर रामगोपाल यादव की अध्यक्षता में समिति ने कहा कि पूरी दुनिया में टीबी संक्रमण का सबसे ज्यादा बोझ भारत पर है। डीआर-टीबी मामलों की खतरनाक वृद्धि भी चिंताजनक है। ऐसे में सरकार को त्वरित अपफ्रंट आणविक निदान तक मरीजों की पहुंच आसान बनाने के लिए कार्य करना चाहिए। एक वर्ष पहले तक भारत में महज 20 फीसदी मामलों में आणविक जांच हुई। यह परीक्षण दर साल 2024 में बढ़कर 30 फीसदी तक पहुंची है लेकिन अभी भी 70 फीसदी रोगियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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