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पीएम ने साधा कांग्रेस पर निशाना, कहा- समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती कंफ्यूज पार्टी
Thu, 11 Feb 2021 04:57 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 11 Feb 2021 04:57 AM IST
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पीएम नरेंद्र मोदी
- फोटो : ANI
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राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा की तरह लोकसभा में भी कांग्रेस की चुटकी ली। पीएम मोदी ने कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी जो इस देश में छह दशक तक सत्ता में रही है, बुरी तरह कंफ्यूज है।
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इनका राज्यसभा और लोकसभा में रवैया अलग-अलग है। कांग्रेस के नेता कानूनों के कंटेंट-इंटेंट पर बात करने की जगह अफवाहें फैलाने की साजिश रच रहे हैं।
भाषण के दौरान कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी की टोकाटोकी को पहले तो उन्हें हल्के अंदाज में लिया। हालांकि टोकाटोकी बढऩे पर अचानक नाराज हो गए। उन्होंने अधीर को संबोधित करते हुए कहा कि अब कुछ ज्यादा ही हो रहा है। इसी दौरान पीएम ने कांग्रेस को कंफ्यूज पार्टी बताया।
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उन्होंने कहा कि संसद केदोनों सदनों में पार्टी का अलग-अलग धड़ा है। राज्यसभा का धड़ा आराम से चर्चा करता है, जबकि लोकसभा में इनका रवैया अलग है। ऐसी कंफ्यूज पार्टी न खुद का भला सोच सकती है, न देश की समस्याओं के समाधान के लिए कुछ सोच सकती है। इससे बड़ा कोई दुर्भाग्य नहीं हो सकता। पीएम ने अधीर से यह भी कहा कि वह जिनको संदेश देने के लिए यह कर रहे हैं, उन तक संदेश पहुंच चुका है।
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विशाल देश में सर्वसम्माति संभव नहीं
किसान कानूनों को जरूरी बताते हुए कहा कि विविधताओं से भरे भारत जैसे विशाल देश में किसी फैसले पर सर्वसम्मति संभव नहीं है। किसी भी फैसले से समूचे देश और समूची आबादी का सहमत होना संभव हो ही नहीं सकता।
इस मसले में असहमति के कुछ न कुछ स्वर तो उभरना अस्वाभविक नहीं हैं। किसी एक फैसले से देश के किसी क्षेत्र को ज्यादा तो किसी क्षेत्र को कम लाभ होगा। सवाल है कि क्या इसी आधार पर देशहित के लिए जरूरी सुधारों को रोक देना चाहिए?
कंटेंट-इंटेंट की जगह बस कलर पर चर्चा
पीएम ने कहा कि संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस ने इन कानूनों के कंटेंट, इंटेंट पर चर्चा नहीं की। बस इसके कलर पर चर्चा की। अगर कंटेंट इंटेंट पर चर्चा करती तो उनकी ओर से फैलाए गए भ्रम, अफवाह और साजिशों का पर्दाफाश हो गया होता। क्योंकि देश को पता है कि कृषि कानूनों के लागू होने केबाद भी पुरानी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आया है। एक भी किसान के अधिकार नहीं छीने गए हैं। कहीं मंडी बंद नहीं हुई है। उल्टे किसानों के समक्ष अपनी उपज बेचने के लिए नए विकल्प मुहैया कराए जा रहे हैं।
क्या देश में सबकुछ बाबू ही करेंगे?
सुधार और निजीकरण का समर्थन करते हुए पीएम ने कहा कि देश में एक विशेष प्रकार की सोच में व्यापक बदलाव की जरूरत है। सवाल है कि इस देश में क्या सबकुछ बाबू ही करेंगे। बाबू ही हवाई जहाज उड़ाएंगे? बाबू की खेती किसानी का मामला देखेंगे? क्या इससे का भला होगा। देश के भले के लिए निजी क्षेत्र को भागीदार बनाने की जरूरत है। सभी क्षेत्रों में तेज गति से विकास की जरूरत है। हमें यह मानना होगा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना सभी क्षेत्रों को साथ लाए बिना पूरा नहीं होगा।