'संघ को कुचलने के प्रयास हुए, साजिशें हुईं, पर...': शताब्दी समारोह में PM मोदी ने गिनाईं RSS की उपलब्धियां
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पीएम मोदी डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हमें संघ जैसे संगठन का शताब्दी वर्ष देखने को मिल रहा है। उन्होंने स्वयंसेवकों शुभकामनाएं दीं और संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की।
देशवासियों को दी महानवमी की शुभकामनाएं
पीएम मोदी ने समारोह के दौरान कहा, आज महानवमी है। आज देवी सिद्धिदात्री का दिन है। मैं सभी देशवासियों को नवरात्रि की बधाई देता हूं। कल विजयादशमी का महापर्व है- अन्याय पर न्याय की जीत, असत्य पर सत्य की जीत, अंधकार पर प्रकाश की जीत है। विजयदशमी भारतीय संस्कृति के इस विचार और विश्वास का कालजयी उद्घोष है। ऐसे महान पर्व पर 100 वर्ष पूर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना ये कोई संयोग नहीं था। ये हजारों वर्षों से चली आ रही उस परंपरा का पुनरुत्थान था। जिसमें राष्ट्र चेतना, समय समय पर उस युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए नए-नए अवतारों में प्रकट होती है। इस युग में संघ उसी अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है।
'सिक्के के ऊपर अंकित संघ का बोध वाक्य'
उन्होंने बताया कि संघ की 100 वर्ष की इस गौरवमयी यात्रा की स्मृति में आज भारत सरकार ने विशेष डाक टिकट और स्मृति सिक्के जारी किए हैं। पीएम ने जारी किए गए सिक्के की विशेषता बताते हुए कहा, 100 रुपए के सिक्के पर एक ओर राष्ट्रीय चिन्ह है और दूसरी ओर सिंह के साथ वरद-मुद्रा में भारत माता की भव्य छवि है। भारतीय मुद्रा पर भारत माता की तस्वीर संभवत: स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है। इस सिक्के के ऊपर संघ का बोध वाक्य भी अंकित है- राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम।
#WATCH | Delhi | PM Narendra Modi arrives at Dr. Ambedkar International Centre to participate in the centenary celebrations of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) as the Chief Guest.
— ANI (@ANI) October 1, 2025
Source: DD pic.twitter.com/i9E4XFH1dF
1963 में RSS के स्वयंसेवक भी 26 जनवरी की परेड में शामिल हुए थे। उन्होंने बहुत आन-बान-शान से राष्ट्रभक्ति की धुन पर कदमताल किया था। जिस तरह विशाल नदियों के किनारे मानव सभ्यताएं पनपती हैं, उसी तरह संघ के किनारे भी और संघ की धारा में भी सैकड़ों जीवन पुष्पित, पल्लवित हुए हैं। अपने गठन के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विराट उद्देश्य लेकर चला। ये उद्देश्य रहा- राष्ट्र निर्माण।
#WATCH | Delhi | PM Narendra Modi releases a specially designed commemorative postage stamp and coin highlighting the RSS’ contributions to the nation, on the occassion of the organisation's centenary celebrations.
— ANI (@ANI) October 1, 2025
Source: DD pic.twitter.com/8pMYdvMXzK
पीएम मोदी ने संघ के खिलाफ साजिशों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "राष्ट्र साधना की इस यात्रा में ऐसा नहीं है कि संघ पर हमले नहीं हुए, संघ के खिलाफ साजिशें नहीं हुईं, हमने देखा है कि कैसे आजादी के बाद संघ को कुचलने का प्रयास हुआ। मुख्यधारा में आने से रोकने के अनगिनत षड्यंत्र हुए। परमपूज्य गुरुजी को झूठे केस में फंसाया गया, उन्हें जेल तक भेज दिया गया। लेकिन जब पूज्य गुरुजी जेल से बाहर आए तो उन्होंने सहज रूप से कहा और शायद इतिहास में सहज भाव एक बहुत बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने सहजता से कहा था कि कभी-कभी जीभ दांतों के नीचे आकर दब जाती है, कुचल भी जाती है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ देते हैं, क्योंकि दांत भी हमारे हैं और जीभ भी हमारी है।"
'सरकारों ने लंबे समय तक संघ को नहीं दी प्राथमिकता'
प्रधानमंत्री मोदी ने संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं की विशेषता बताते हुए कहा, "खुद कष्ट उठाकर दूसरों के दुख हरना। ये हर स्वयंसेवक की पहचान है। संघ देश के उन क्षेत्रों में भी कार्य करता रहा है जो दुर्गम हैं, जहां पहुंचना सबसे कठिन है। हमारे देश में लगभग 10 करोड़ आदिवासी भाई-बहन हैं। जिनके कल्याण के लिए संघ लगातार प्रयासरत है। लंबे समय तक सरकारों ने उन्हें प्राथमिकता नहीं दी, लेकिन संघ ने उनकी संस्कृति, उनके पर्व उत्सव, उनकी भाषा और परंपराओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सेवा भारती, विद्या भारती, एकल विद्यालय, वनवासी कल्याण आश्रम आदवासी समाज के सशक्तिकरण का स्तंभ बनकर उभरे हैं।