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Agnipath: 'कुछ फैसले अनुचित लग सकते हैं, पर राष्ट्र निर्माण के लिए वे अहम होते हैं', अग्निपथ योजना पर जारी विवाद के बीच बोले पीएम मोदी

Mon, 20 Jun 2022 09:24 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 20 Jun 2022 09:24 PM IST
सार

प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब आज देशभर में कुछ संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है।

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PM Narendra Modi speech in Karnataka says decisions may look unfair but help in building the nation indirect reference to Agnipath Scheme
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को कर्नाटक के बेंगलुरु में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे। यहां उन्होंने अपने भाषण के दौरान देश के रेलवे सिस्टम की तारीफ की। हालांकि, इसी दौरान उन्होंने बिना अग्निपथ योजना का जिक्र किए कहा कि कुछ योजनाएं शुरुआत में अनुचित लग सकती हैं, लेकिन ये बाद में राष्ट्र निर्माण में मदद करती हैं। पीएम ने कहा- सुधार का रास्ता ही हमें आगे नए लक्ष्यों और नए संकल्प की ओर ले जा सकता है।

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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब आज देशभर में कुछ संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है। इसका अलग-अलग राज्यों में मिलाजुला असर देखा जा रहा है। 
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इससे पहले पीएम ने भाषण के दौरान कहा कि हर देश को स्वास्थ्यसेवा को सर्वाधिक महत्व देना चाहिए। उन्होंने यह बात मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र (सीबीआर) का उद्घाटन करने और यहां एक मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल की नींव रखने के बाद कही। मोदी ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) परिसर में 280 करोड़ रुपये की लागत से बने मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र (सीबीआर) का उद्घाटन किया, जिसकी आधारशिला उन्होंने स्वयं रखी थी। उन्होंने कहा कि सीबीआर का उद्घाटन करके उन्हें बहुत खुशी हुई।
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मोदी ने कहा, ‘‘यह खुशी इसलिए और भी बड़ी है, क्योंकि इस परियोजना की नींव रखने का सम्मान भी मुझे ही मिला था। यह केंद्र मस्तिष्क संबंधी विकारों के प्रबंधन संबंधी अनुसंधान में अग्रणी रहेगा।’’ अधिकारियों ने बताया कि सीबीआर को अपनी तरह के एक अलग अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित किया गया है और इसमें उम्र से संबंधित मस्तिष्क विकारों के समाधान के लिए साक्ष्य-आधारित जन स्वास्थ्य उपचार मुहैया कराने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण अनुसंधान करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

मैसूर में क्या क्या बोले पीएम मोदी?

  • इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैसूर पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि कर्नाटक देश के उन राज्यों में से एक है जहां देश की आर्थिक और आध्यात्मिक संपन्नता, दोनों के दर्शन एक साथ होते हैं। अपनी पुरातन संस्कृति को समृद्ध करते हुए हम कैसे 21वीं सदी के संकल्पों को सिद्ध कर सकते हैं, इसका कर्नाटका एक उत्तम उदाहरण है। 
  • उन्होंने कहा कि इस धरती ने नलवाडी कृष्णा वोडेयार, सर एम विश्वेश्वरैया, राष्ट्रकवि कुवेंपु जैसे अनेक महान व्यक्तित्व देश को दिए हैं। ऐसे व्यक्तित्वों का भारत की विरासत और विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
  • पीएम मोदी ने कहा कि बीते 8 वर्षों में हमारी सरकार ने जो योजनाएं बनाईं उनमें इस भावना को प्राथमिकता दी गई कि वो समाज के सभी वर्गों, सभी क्षेत्रों को छूएं, उन तक पहुंचें। एक तरफ हमने स्टार्ट अप पॉलिसी के तहत युवाओं को इंसेंटिव दिए तो वहीं किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा भी दे रहे हैं।
  • उन्होंने कहा कि हमारी सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि हमारे दिव्यांग साथियों की दूसरों पर निर्भरता कम से कम हो। इसलिए हमारी करेंसी में, सिक्कों में दिव्यांगों की सुविधा के लिए नए फीचर जोड़े गए हैं। देश भर में दिव्यांगों की पढ़ाई से जुड़े कोर्स को अधिक समृद्ध किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने पूजा-अर्चना भी की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैसूर में श्री चामुंडेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना और प्रार्थना की।





केएसएस संस्कृत पाठशाला और छात्रावास भवन का उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केएसएस संस्कृत पाठशाला और छात्रावास भवन का उद्घाटन किया और मैसूर के सुत्तुर मठ में पुस्तकों का विमोचन किया। पीएम मोदी ने कहा कि मैं मैसूर की अधिष्ठात्री देवी माता चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। ये मां की कृपा ही है कि आज मुझे मैसूर आने का सौभाग्य मिला। मैसूर के विकास के लिए कई बड़े कार्यों के लोकार्पण का अवसर भी मिला और अब मैं यहाँ आप सब संतों के बीच इस पुण्य कार्यक्रम में उपस्थित हूं।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि ज्ञान के समान पवित्र कुछ और नहीं है, ज्ञान का कोई और विकल्प नहीं है, इसलिए हमारे ऋषियों, मनीषियों ने भारत को उस चेतना के साथ गढ़ा- जो ज्ञान से प्रेरित है, विज्ञान से विभूषित है, जो बोध से बढ़ती है और शोध से सशक्त होती है।
  • उन्होंने कहा कि युग बदले, समय बदला, भारत ने समय के अनेक तूफानों का सामना किया लेकिन जब भारत की चेतना क्षीण हुई, तो देश के कोने-कोने में संतों-ऋषियों ने पूरे भारत को मथकर देश की आत्मा को पुनर्जीवित कर दिया।
  • पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में आज ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ का उदाहरण हमारे सामने है। शिक्षा हमारे भारत के लिए सहज स्वभाव रही है। इसी सहजता के साथ हमारी नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई के विकल्प दिए जा रहे हैं।
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