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पीयूष गोयल के पायलट प्रोजेक्ट को पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा 'ना'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 09 Apr 2018 03:09 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे की महत्वाकांक्षी सिगनलिंग योजना को ना कह दिया है। यह योजना यूरोप की ट्रेन कंट्रोल स्कीम लेवल-टू पर आधारित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस योजना को हरी झंडी नहीं दिए जाने की बड़ी वजह इसकी लागत को बताया जा रहा है। बता दें कि उस पूरे सिस्टम की लागत 78 हजार करोड़ थी। रेलवे बोर्ड की एक मीटिंग के दौरान ये फैसला लिया गया।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पीएम मोदी ने इस पूरे सिस्टम के लागत के पहलुओं को उठाया और साथ ही नई तकनीक को विकसित करने को कहा है। उनका मानना है कि भारतीय परिस्तिथियों के हिसाब से मौजूदा तकनीकी अभी कमजोर है।
उन्होंने रेलवे को कहा है कि इसके लिए एक व्यापक परीक्षण किया जाना चाहिए। ये परीक्षण रेलवे के हैवी ट्रैफिक एरिया में किया जाना चाहिए और उसकी सफलता के नतीजों के आधार पर ही इस योजना को आगे बढ़ाया जाये।
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बता दें कि रेलवे मंत्री पीयूष गोयल इस योजना को लेकर काफी उत्साहित थे। उनका मानना था कि पूरा कॉन्ट्रैक्ट एक ही कंपनी को दिया जाये, इससे रेलवे को आर्थिक तौर पर भी फायदा होगा।वहीं रेलवे का सिगनलिंग सिस्टम भी मजबूत होगा जिससे ट्रेन समय पर पहुंचेगी। वित्त विभाग ने इसमें शामिल विशाल लागत का आंकड़ा तैयार किया था जिसके हिसाब से इस योजना को पूरा करने के लिए निर्धारित रकम से डेढ़ गुना ज्यादा खर्च होगा।
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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पीएम मोदी ने इस पूरे सिस्टम के लागत के पहलुओं को उठाया और साथ ही नई तकनीक को विकसित करने को कहा है। उनका मानना है कि भारतीय परिस्तिथियों के हिसाब से मौजूदा तकनीकी अभी कमजोर है।
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उन्होंने रेलवे को कहा है कि इसके लिए एक व्यापक परीक्षण किया जाना चाहिए। ये परीक्षण रेलवे के हैवी ट्रैफिक एरिया में किया जाना चाहिए और उसकी सफलता के नतीजों के आधार पर ही इस योजना को आगे बढ़ाया जाये।
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बता दें कि रेलवे मंत्री पीयूष गोयल इस योजना को लेकर काफी उत्साहित थे। उनका मानना था कि पूरा कॉन्ट्रैक्ट एक ही कंपनी को दिया जाये, इससे रेलवे को आर्थिक तौर पर भी फायदा होगा।वहीं रेलवे का सिगनलिंग सिस्टम भी मजबूत होगा जिससे ट्रेन समय पर पहुंचेगी। वित्त विभाग ने इसमें शामिल विशाल लागत का आंकड़ा तैयार किया था जिसके हिसाब से इस योजना को पूरा करने के लिए निर्धारित रकम से डेढ़ गुना ज्यादा खर्च होगा।
रेलवे मंत्री पीयूष गोयल इस योजना को लेकर काफी उत्साहित थे
सूत्रों के अनुसार मीटिंग में पीएम ने कहा कि भविष्य में इस तरह के संकेत अपग्रेड के लिए स्वदेशी विकसित तकनीकी तैयार की जाए। रेलवे बोर्ड एआरटीएस-लेवल 2 के लाभों का विवरण देते हुए अर्नस्ट एंड यंग द्वारा तैयार की गई एक परियोजना रिपोर्ट का मूल्यांकन कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 78,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत है और इसके लिए 8 कंपनियों से संपर्क किया जा सकता है। ये कंपनियां सीमेंस, थेल्स, अलस्टॉम, बॉम्पाइडर, एस्साल्दो, एसटीएस, सीएएफ, और मेमैक ग्रुप हैं।
वित्त विभाग के अनुसार पूरा प्रोजेक्ट अनुमानित राशि से 1.5 गुणा ज्यादा खर्चा आता। प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीटिंग के दौरान रेलवे को इस तरह के सिगनल अपग्रेड के लिए अन्य विकल्प तलाश करने को कहा है
ईटीसीएस-लेवल 2, लोकोमोटिव ट्रेन सिग्नल को ट्रैक करने के लिए ट्रैक के साथ स्थापित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की एक जटिल प्रणाली है, इसकी मुख्य विशेषता यह है कि पटरियों में लगाए गए उपकरणों को नियमित रूप से सिंक्रोनाइज किया जाता है ताकि मौजूदा संकेतों को मार्ग पर दिखाया जा सके और वायरलेस के माध्यम से चल रहे लोकोमोटिव में उस सूचना को अपडेट किया जा सके। यह एक्सीडेंट की संभावना को कम कर देता है क्योंकि ट्रेनों को इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों से रोक दिया जाता है, और लोकोमोटिव स्वचालित रूप से बंद हो जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 78,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत है और इसके लिए 8 कंपनियों से संपर्क किया जा सकता है। ये कंपनियां सीमेंस, थेल्स, अलस्टॉम, बॉम्पाइडर, एस्साल्दो, एसटीएस, सीएएफ, और मेमैक ग्रुप हैं।
वित्त विभाग के अनुसार पूरा प्रोजेक्ट अनुमानित राशि से 1.5 गुणा ज्यादा खर्चा आता। प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीटिंग के दौरान रेलवे को इस तरह के सिगनल अपग्रेड के लिए अन्य विकल्प तलाश करने को कहा है
ईटीसीएस-लेवल 2, लोकोमोटिव ट्रेन सिग्नल को ट्रैक करने के लिए ट्रैक के साथ स्थापित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की एक जटिल प्रणाली है, इसकी मुख्य विशेषता यह है कि पटरियों में लगाए गए उपकरणों को नियमित रूप से सिंक्रोनाइज किया जाता है ताकि मौजूदा संकेतों को मार्ग पर दिखाया जा सके और वायरलेस के माध्यम से चल रहे लोकोमोटिव में उस सूचना को अपडेट किया जा सके। यह एक्सीडेंट की संभावना को कम कर देता है क्योंकि ट्रेनों को इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों से रोक दिया जाता है, और लोकोमोटिव स्वचालित रूप से बंद हो जाता है।