मुस्लिमों के प्रति बदले मोदी-भाजपा, क्या मुसलमान मतदाताओं को कर सकेंगे आकर्षित?
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भारतीय समाज की संरचना ऐसी है कि किसी एक जाति या धर्म की राजनीति करके यहां लंबी राजनीतिक पारी नहीं खेली जा सकती। एक सियासी दल के लिए यह बहुत मुश्किल है कि वह समाज के एक बड़े वोट बैंक को लंबे समय के लिए नजरअंदाज कर सके। मायावती-मुलायम हों या शिवसेना, सत्ता की सफलता हासिल करने के लिए एक समय के बाद उन्हें दूसरे लोगों को अपनाना पड़ा और इसके लिए अपनी नीतियों में बदलाव करना पड़ा।
अब सवाल यह है कि क्या नरेंद्र मोदी, भाजपा और आरएसएस की नीतियों में मुस्लिमों के प्रति आ रहा बदलाव इसी सोच का परिणाम है? मोहन भागवत का यह कहना कि हिंदुस्तान मुसलमानों के बिना अधूरा है और नरेंद्र मोदी का मस्जिदों में जाना क्या बड़े नीतिगत बदलाव का संकेत है? और अगर ऐसा ही है तो क्या मुस्लिम नरेंद्र मोदी को अपनाने के लिए तैयार हैं? इस पर लोगों की राय बंटी हुई है।
गुरुवार को 'मत संग्राम में मुसलमानों की भूमिका' नामक कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रीय मंच के नेता इंद्रेश कुमार कहते हैं कि मुस्लिमों के मन में भाजपा और राषट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लिए नफरत बोई गई जिससे उनके वोटों की फसल काटी जा सके। लेकिन आज मुसलमान पढ़-लिख गया है और सच्चाई को समझ रहा है तो उसने पाया कि भाजपा के नाम पर डराकर सिर्फ उसका वोट लिया गया। अगर आज मुस्लिम कमजोर हालात में हैं तो इसका जिम्मेदार कौन है? जिसने उनका वोट लिया उसे इसके लिए जिम्मेदार क्यों न माना जाए।
उन्होंने कहा कि इस सरकार ने अपनी छवि के उलट मुसलमानों के लिए रिकॉर्ड काम किया है। हज कोटा दोगुना करना हो या सऊदी अरब से कैदियों को छुड़ाना, तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं को आजादी दिलाना हो या युवाओं के लिए लोन दिलाना, मोदी सरकार ने रिकॉर्ड काम किया है। यही कारण है कि मुस्लिमों के अंदर से गलतफहमी मिट रही है और वे भाजपा के करीब आ रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस चुनाव में भी मुस्लिम भाजपा को वोट करेंगे।
'विपक्षी दलों की साजिश का पर्दाफाश'
भाजपा नेता सुदेश वर्मा ने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक कि हम समाज के सभी वर्गों का समर्थन न पा लें। भाजपा में पुराने समय से मुस्लिम नेता राष्ट्रीय स्तर पर अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहे। यह भाजपा में उनकी स्वीकार्यता का ही नतीजा था। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की साजिश का पर्दाफाश हो रहा है।
बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज भाजपा के साथ जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की दुनिया में मोदी की स्वीकार्यता का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है कि मुस्लिम देश उन्हें अपना सबसे बड़ा सम्मान दे रहे हैं, मुस्लिमों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पाकिस्तान की मुखालफत के बाद भी भारत को जगह दिया जाता है। यह बड़े बदलाव का संकेत है जिसका असर पूरी दुनिया में दिखाई पड़ेगा।
'मुस्लिमों के अंदर एक हलचल'
भाजपा के एक मुस्लिम नेता ने कहा कि इससे कतई इनकार नहीं किया जा सकता कि मुस्लिम समाज में पार्टी के लिए अभी भी संकोच है। वह खुलकर भाजपा के साथ नहीं आ रहा है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि पढ़े-लिखे मुस्लिमों के अंदर एक हलचल है यह समझने के लिए कि क्या वाकई भाजपा उनके लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम राष्ट्रों के बीच मोदी की लोकप्रियता ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इससे पाकिस्तान की मुस्लिम परस्त राजनीति का भी पर्दाफाश हुआ है।
'कोई मुसलमान भरोसा कैसे करे'
वहीं, एक मुस्लिम संगठन के एक प्रतिनिधि का कहना है कि राजनीति में दिखावे का भी अपना खूब महत्त्व है। अगर आरएसएस-भाजपा की नीतियों में इतना ही बड़ा बदलाव आया है तो यह बदलाव टिकट बंटवारे में नजर क्यों नहीं आया। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया है। जो छह टिकट मुस्लिमों को मिले हैं वे भी इतने कमजोर उम्मीदवारों हैं जो जीतने की स्थिति में नहीं हैं।
यह औपचारिकता से अधिक कुछ नहीं हैं। मुस्लिम नेता का कहना है कि अगर वाकई भाजपा अपने को मुसलमान हितैषी दिखाना चाहती है तो उसे अपने संगठन में और अपनी राज्य सरकारों में मुस्लिमों को बड़े ओहदे देकर इसका सबूत भी पेश करना चाहिए। जब तक भाजपा साध्वी प्रज्ञा जैसों को आगे बढ़ाती रहेगी, तब तक कोई मुसलमान उसका भरोसा कैसे करेगा?