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‘प्रबुद्ध भारत’ की 125 वीं वर्षगांठ: पीएम मोदी ने कहा-विश्व की समस्याओं का समाधान दे रहा देश

Sun, 31 Jan 2021 07:16 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 31 Jan 2021 07:16 PM IST
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PM Narendra Modi Addressed On 125th Anniversary Of Prabuddha Bharata Journal
पीएम मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
स्वामी विवेकानंद द्वारा शुरू की गई ‘प्रबुद्ध भारत’ पत्रिका की 125 वीं वर्षगांठ के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत आज विश्व की कई समस्याओं का समाधान पेश कर रहा है। इनमें कोविड-19 महामारी से लेकर जलवायु परिवर्तन तक शामिल हैं। केंद्र सरकार की विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी स्वामी विवेकानंद की गरीबों की मदद करने की दृष्टि से मेल खाती हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'प्रबुद्ध भारत' पत्रिका की 125 वीं वर्षगांठ के मौके पर कहा कि स्वामी विवेकानंद ने इसके नाम के जरिए देश की भावना को प्रकट किया था। वे 'जागृत भारत' बनाना चाहते थे।  प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि जो लोग भारत को जानते हैं, उन्हें इस बात का पता है कि यह देश  राजनीतिक या भौगोलिक सीमाओं से परे है।  प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत को एक सांस्कृतिक चेतना के रूप में देखा, जो सदियों से जीवित है। एक ऐसा भारत, जो हर चुनौती के बाद मजबूती से उभरा है। विवेकानंद भारत को प्रबुद्ध या जागृत बनाना चाहते थे। 
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रामकृष्ण मिशन की मासिक पत्रिका ‘प्रबुद्ध भारत’ के 125 वें सालगिरह समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने गरीबों के लिए जन धन खाते खोलने से लेकर उनके स्वास्थ्य की चिंता करने वाली आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं तक का जिक्र किया और दावा किया कि ये सभी स्वामी विवेकानंद की दृष्टि से मेल खाती हैं।

अवसरों की सोच कर चलते हैं तो बढ़ते हैं आगे

PM Narendra Modi Addressed On 125th Anniversary Of Prabuddha Bharata Journal
स्वामी विवेकानंद - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

पीएम मोदी ने कहा कि यदि गरीबों की पहुंच बैंकों तक ना हो तो बैंकों को उनके पास पहुंचना चाहिए। ऐसी ही योजना जन धन। यदि गरीबों की पहुंच बीमे तक ना हो तो उन्हें यह मिलना चाहिए और वह है जन सुरक्षा योजना। यदि गरीबों की पहुंच स्वास्थ्य सेवाओं तक ना हो तो स्वास्थ्य सेवाओं को गरीबों तक पहुंचना चाहिए और वह है आयुष्मान भारत योजना। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि कमजोरी का उपाय उसे लटकाए रखना नहीं है बल्कि उसके समाधान के रास्ते तैयार करना है। जब हम बाधाओं की सोच कर चलते हैं तो हम उसमें दब जाते हैं, जब हम अवसरों की सोच कर चलते हैं तो आगे बढ़ते रहते हैं।

महामारी से निपटने के उपायों का किया जिक्र

PM Narendra Modi Addressed On 125th Anniversary Of Prabuddha Bharata Journal
swami vivekanand
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी को ही लीजिए। भारत ने क्या किया? समस्या देखकर वह हताश नहीं हुआ। भारत ने समाधान के रास्ते तलाशे। पीपीई किट के उत्पादन से लेकर विश्व की फार्मेसी बनने तक हमारा देश मजबूत होता गया। भारत कोविड-19 का टीका विकसित करने में अग्रिम मोर्चे पर रहा और कुछ दिनों पूर्व ही देश में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान आरंभ किया। अब हम अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल दूसरे देशों की मदद करने में भी कर रहे हैं।

विवेकानंद की दृष्टि वाला प्रबुद्ध भारत तैयार कर रहे

PM Narendra Modi Addressed On 125th Anniversary Of Prabuddha Bharata Journal
पीएम नरेंद्र मोदी - फोटो : twitter@ bjp for india

प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक ऐसी समस्या है जिसका सामना पूरी दुनिया कर रही है। उन्होंने कहा कि हमने ना सिर्फ समस्या को उठाया बल्कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के रूप में समाधान भी पेश किया। उन्होंने कहा, हम नवीकरणीय संसाधनों के अधिक से अधिक इस्तेमाल पर भी बल दे रहे हैं। स्वामी विवेकानंद की दृष्टि वाला प्रबुद्ध भारत तैयार किया जा रहा है। यह ऐसा भारत है जो आज विश्व को समाधान दे रहा है।

जानिए ‘प्रबुद्ध भारत’ के बारे में

बता दें, ‘प्रबुद्ध भारत’ पत्रिका की शुरुआत 1896 में स्वामी विवेकानंद ने की थी। आरंभ में यह पत्रिका मद्रास अब चेन्नई से प्रकाशित की जाती थी, लेकिन दो वर्ष बाद यह अल्मोड़ा से प्रकाशित होने लगी। अप्रैल 1899 के बाद इसका प्रकाशन अद्वैत आश्रम से होने लगा और उसके बाद से वहां से इसका सतत प्रकाशन हो रहा है। 

नेताजी, तिलक, सिस्टर निवेदिता, श्री अरबिंदो, राधाकृष्णन ने भी लिखे लेख
इस ऐतिहासिक पत्रिका में देश की कई नामचीन शख्सियतों ने योगदान दिया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, सिस्टर निवेदिता, श्री अरबिंदो, पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन आदि ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, दर्शन, इतिहास, मनोविज्ञान, कला और अन्य सामाजिक मुद्दों पर अपने लेखन के माध्यम से ‘प्रबुद्ध भारत’ के पन्नों पर अपनी छाप छोड़ी है।

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