‘प्रबुद्ध भारत’ की 125 वीं वर्षगांठ: पीएम मोदी ने कहा-विश्व की समस्याओं का समाधान दे रहा देश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'प्रबुद्ध भारत' पत्रिका की 125 वीं वर्षगांठ के मौके पर कहा कि स्वामी विवेकानंद ने इसके नाम के जरिए देश की भावना को प्रकट किया था। वे 'जागृत भारत' बनाना चाहते थे। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि जो लोग भारत को जानते हैं, उन्हें इस बात का पता है कि यह देश राजनीतिक या भौगोलिक सीमाओं से परे है। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत को एक सांस्कृतिक चेतना के रूप में देखा, जो सदियों से जीवित है। एक ऐसा भारत, जो हर चुनौती के बाद मजबूती से उभरा है। विवेकानंद भारत को प्रबुद्ध या जागृत बनाना चाहते थे।
Swami Vivekananda named this journal as Prabuddha Bharata to manifest spirit of our nation. He wanted to create awakened India. Those who understand Bharat, are aware that it is beyond just political or territorial entity: PM Modi at 125th anniversary celebrations of the journal pic.twitter.com/lNXl8eWPJT
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) January 31, 2021
रामकृष्ण मिशन की मासिक पत्रिका ‘प्रबुद्ध भारत’ के 125 वें सालगिरह समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने गरीबों के लिए जन धन खाते खोलने से लेकर उनके स्वास्थ्य की चिंता करने वाली आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं तक का जिक्र किया और दावा किया कि ये सभी स्वामी विवेकानंद की दृष्टि से मेल खाती हैं।
अवसरों की सोच कर चलते हैं तो बढ़ते हैं आगे
पीएम मोदी ने कहा कि यदि गरीबों की पहुंच बैंकों तक ना हो तो बैंकों को उनके पास पहुंचना चाहिए। ऐसी ही योजना जन धन। यदि गरीबों की पहुंच बीमे तक ना हो तो उन्हें यह मिलना चाहिए और वह है जन सुरक्षा योजना। यदि गरीबों की पहुंच स्वास्थ्य सेवाओं तक ना हो तो स्वास्थ्य सेवाओं को गरीबों तक पहुंचना चाहिए और वह है आयुष्मान भारत योजना। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि कमजोरी का उपाय उसे लटकाए रखना नहीं है बल्कि उसके समाधान के रास्ते तैयार करना है। जब हम बाधाओं की सोच कर चलते हैं तो हम उसमें दब जाते हैं, जब हम अवसरों की सोच कर चलते हैं तो आगे बढ़ते रहते हैं।
महामारी से निपटने के उपायों का किया जिक्र
विवेकानंद की दृष्टि वाला प्रबुद्ध भारत तैयार कर रहे
प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक ऐसी समस्या है जिसका सामना पूरी दुनिया कर रही है। उन्होंने कहा कि हमने ना सिर्फ समस्या को उठाया बल्कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के रूप में समाधान भी पेश किया। उन्होंने कहा, हम नवीकरणीय संसाधनों के अधिक से अधिक इस्तेमाल पर भी बल दे रहे हैं। स्वामी विवेकानंद की दृष्टि वाला प्रबुद्ध भारत तैयार किया जा रहा है। यह ऐसा भारत है जो आज विश्व को समाधान दे रहा है।
जानिए ‘प्रबुद्ध भारत’ के बारे में
बता दें, ‘प्रबुद्ध भारत’ पत्रिका की शुरुआत 1896 में स्वामी विवेकानंद ने की थी। आरंभ में यह पत्रिका मद्रास अब चेन्नई से प्रकाशित की जाती थी, लेकिन दो वर्ष बाद यह अल्मोड़ा से प्रकाशित होने लगी। अप्रैल 1899 के बाद इसका प्रकाशन अद्वैत आश्रम से होने लगा और उसके बाद से वहां से इसका सतत प्रकाशन हो रहा है।
नेताजी, तिलक, सिस्टर निवेदिता, श्री अरबिंदो, राधाकृष्णन ने भी लिखे लेख
इस ऐतिहासिक पत्रिका में देश की कई नामचीन शख्सियतों ने योगदान दिया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, सिस्टर निवेदिता, श्री अरबिंदो, पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन आदि ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, दर्शन, इतिहास, मनोविज्ञान, कला और अन्य सामाजिक मुद्दों पर अपने लेखन के माध्यम से ‘प्रबुद्ध भारत’ के पन्नों पर अपनी छाप छोड़ी है।