G20: ‘लोकतंत्र की जननी है भारत, प्राचीन काल से हमें इस पर विश्वास’; पीएम मोदी ने किया संबोधित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम वसुधैव कुटुंबकम के मूल सिद्धांत पर विश्वास करते हैं, जिसका मतलब है कि पूरा विश्व ही एक परिवार है। पूरी दुनिया को एक परिवार मानने के कारण हर भारतीय एक पृथ्वी की धारणा से खुद को जोड़ता है।
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भारत ने पहली बार जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। नौ सितंबर से शुरू हुए सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों सत्रों की अध्यक्षता की। शिखर सम्मेलन के पहले सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र की जननी के रूप में संवाद और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति प्राचीन काल से ही भारत का अटूट विश्वास रहा है। उन्होंने कहा कि हम वसुधैव कुटुंबकम के मूल सिद्धांत पर विश्वास करते हैं, जिसका मतलब है कि पूरा विश्व एक परिवार है। पूरी दुनिया को एक परिवार मानने के कारण हर भारतीय एक पृथ्वी की धारणा से खुद को जोड़ता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत आज उन देशों में से एक है, जहां बड़े पैमाने पर सौर क्रांति जारी है। लाखों भारतीय किसान अब प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती के कारण मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पृथ्वी और स्वास्थ्य की रक्षा होती है। भारत में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन लॉन्च किया गया है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन वैश्विक चुनौती बन चुका है।
पूरे विश्व को दिया संदेश
दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का पीएम मोदी ने उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जी-20 के अध्यक्ष के तौर पर भारत आपका स्वागत करता है। जिस स्थान पर हम एकत्रित हैं, वहां से कुछ ही किमी के फासले पर करीब 2,500 साल पुराना एक स्तंभ लगा है। इसमें पारकृत भाषा में लिखा है- मानवता का कल्याण और सुख सुनिश्चित किया जाए। ढाई हजार साल पहले भारत की भूमि ने यह संदेश पूरे विश्व को दिया था। आइये इस संदेश को याद कर के जी-20 का हम शुभारंभ करें। पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का यह समय दुनिया को नई दिशा दिखाने वाला समय है। यह वह समय है, जब बरसों पुरानी चुनौतियां हमसे नए समाधान मांग रही है।
प्राचीन काल से भारत में लोकतंत्र
भारत की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती लोकतंत्र की जननी भारत प्रदर्शनी, सिंधु सभ्यता से लेकर 2019 तक के आम चुनावों की झांकी पेश करती है। इंदिरा गांधी कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी ने कहा इसके माध्यम से भारत ने दुनिया को यह दिखाने की कोशिश की है कि किस तरह से अनादिकाल से भारत में लोकतंत्र पल्लवित हुआ है। इसमें एक हजार बीसी से लेकर 1947 तक का कालखंड को सम्मिलित किया गया है। जोशी ने कहा, भारत में जनमानस के दृष्टिकोण और उनकी इच्छाओं का सम्मान प्रारंभिक इतिहास से ही जीवन का मूल अंग रहा है।