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Natural Farming Conclave: कृषि सम्मेलन में बोले पीएम मोदी, 'गांव कर सकते हैं बदलाव का नेतृत्व'
Sun, 10 Jul 2022 12:06 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sun, 10 Jul 2022 12:06 PM IST
सार
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आजादी के 75 साल के तहत देश ने ऐसे अनेक लक्ष्यों पर काम करना शुरू किया है जो आने वाले समय में बड़े बदलावों का आधार बनेंगे।हमारे गांवों ने दिखा दिया है कि गाँव न केवल बदलाव ला सकते हैं, बल्कि बदलाव का नेतृत्व भी कर सकते हैं।
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पीएम मोदी
- फोटो : ANI
विस्तार
प्राकृतिक खेती का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘सबका प्रयास’ की भावना ही देश के विकास की गति का आधार है जोकि विकास की हमारी यात्रा का मार्गदर्शक है। डिजिटल इंडिया मिशन की असाधारण सफलता भी उन लोगों को देश का जवाब है जो कहते थे कि गांव में बदलाव लाना आसान नहीं है। हमारे गांवों ने दिखा दिया कि वे न केवल बदलाव ला सकते हैं बल्कि बदलाव का नेतृत्व भी कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती को लेकर देश का यह जनआंदोलन भी आने वाले वर्षों में व्यापक रूप से सफल होगा, जो किसान इस बदलाव से जितनी जल्दी जुड़ेंगे, वे सफलता के उतने ही ऊंचे शिखर पर पहुंचेंगे।
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प्राकृतिक खेती पर एक सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये किया संबोधित
पीएम ने गुजरात के सूरत में हुए प्राकृतिक खेती पर एक सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुछ महीने पहले ही प्राकृतिक खेती के विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था। इसमें पूरे देश के किसान जुटे थे। प्राकृतिक खेती को लेकर देश में कितना बड़ा अभियान चल रहा है, इसकी झलक उसमें दिखी थी। आज एक बार फिर सूरत में ये अहम कार्यक्रम इस बात का प्रतीक है कि गुजरात किस तरह से देश के अमृत संकल्पों को गति दे रहा है। हर ग्राम पंचायत में 75 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के मिशन में सूरत की सफलता पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनने जा रही है। गुजरात में 550 से ज्यादा पंचायतों के 40,000 से ज्यादा किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं।
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देशवासी जब खुद संकल्प लेते हैं तो लक्ष्य को हासिल करने में कोई रुकावट नहीं आती
पीएम ने कहा कि जब किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए देशवासी खुद संकल्पबद्ध हो जाते हैं, तो उसकी प्राप्ति में कोई रुकावट नहीं आती है, न हमें कभी थकान महसूस होती है। जल जीवन मिशन का उदाहरण हमारे सामने है।
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प्राकृतिक खेती आर्थिक सफलता का भी एक जरिया
पीएम ने कहा कि प्राकृतिक खेती आर्थिक सफलता का भी एक जरिया है और यह धरती मां की सेवा का भी बहुत बड़ा माध्यम है। इससे आप मिट्टी की गुणवत्ता, जमीन की तबियत, उसकी उत्पादकता की रक्षा करते हैं।
व्यक्तिगत खुशहाली का भी रास्ता खुलता है
उन्होंने कहा कि कीटनाशक और केमिकल मुक्त अन्न लोगों के जीवन की रक्षा करती है और यह रक्षा भी हमें सेवा और पुण्य के अनगिनत अवसर देती है। इसलिए, प्राकृतिक खेती व्यक्तिगत खुशहाली का रास्ता तो खोलती ही है। ये ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामय:’ की भावना को भी साकार करती है।
देश में 30 हजार क्लस्टर, लाखों किसान उठा रहे लाभ
उन्होंने कहा कि परंपरागत कृषि विकास योजना और भारतीय कृषि पद्धति जैसे कार्यक्रमों के जरिए किसानों को संसाधन, सुविधा और सहयोग दिया जा रहा है। इस योजना के तहत देश में 30 हजार क्लस्टर्स बनाए गए हैं, लाखों किसानों को इसका लाभ मिल रहा है।
देसी कहावतों का भी किया जिक्र
पीएम ने अपने भाषण में कई देसी कहावतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जैसे एक कहावत है, यह हर किसान जानता है, 'गोबर, मैला, नीम की खली, या से खेत दूनी फली' यानी गोबर आदि और नीम की खली अगर खेत में पड़े तो फसल दोगुनी होगी। इसी तरह और एक प्रचलित कथा है, 'छोड़े खाद जोत गहराई, फिर खेती का मजा दिखाई' यानी खेत में खाद छोड़ कर फिर जुताई करने से खेती का मजा दिखाई पड़ता है, उसकी ताकत पता चलती है। संस्थाएं, विशेषज्ञ भी इन पर अपना ध्यान केंद्रित करें। अपनी मान्यताओं को खुले मन से एक बार टटोलें।