जजों के 'मोर्चे' से सकते में सरकार, फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में
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सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जजों ने आरोप लगाया कि अगर न्यायपालिका की व्यवस्था इस तरह चलती रही तो यह लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा करेगी।
जजों के इन आरोपों के बाद केंद्र की मोदी सरकार में बेचैनी शुरू हो गई है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि, विवाद को बढ़ता देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से बातचीत की है। साफ है कि मामले में खुद पीएम के हस्तक्षेप के बाद सरकार इसपर गंभीर नजर आ रही है। हालांकि पीएम और कानून मंत्री की बातचीत पर सरकार के सूत्रों की ओर से खंड़न भी किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि फिलहाल सरकार इस मुद्दे पर 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है। सरकार इस मुद्दे पर सीधे-सीधे किसी भी तरह का हस्तक्षेप न करने की नीति पर चल रही है और इस सारे विवाद को सुप्रीम कोर्ट का अंदरूनी मामला बताकर खुद को किनारे रखने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार की पूरी कोशिश ये है कि इस विवाद के छीटें किसी भी तरह उसके दामन तक न आएं वर्ना बेवजह एक और विवाद का सामना करना पड़ सकता है।
Prime Minister Narendra Modi spoke to Law Minister RS Prasad about the allegations made by the 4 Supreme Court judges: Sources pic.twitter.com/oxegTQkDRG
— ANI (@ANI) January 12, 2018
दूसरी तरफ सूत्रों के अनुसार जजों के आरोपों से निशाने पर आए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से मुलाकात की है। हालांकि इस मीटिंग में क्या बातचीत हुई ये अभी तक सामने नहीं आ पाया है।
इस बीच सीपीआई के सांसद डी राजा ने जस्टिस चेलमेश्वर से उनके आवास पर मुलाकात की। दोनों के बीच इस मुलाकात के भी कई मायने निकाले जा रहे हैं। मालूम हो कि चीफ जस्टिस के बाद चेलमेश्वर सीनियर मोस्ट जज हैं।
बता दें कि जजों ने पिछले दो महीने के बिगड़े हालातों पर अपनी बात रखने के लिए प्रेस का सहारा लिया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था ठीक नहीं चल रही है। जजों का इशारा सीधे-सीधे चीफ जस्टिस की ओर था।
इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस रंजन गोगई जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस चेलामेश्वर और जस्टिस मदन भीमराव मौजूद रहे, जिसमें उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा- न्यायपालिका में कुछ ठीक नहीं है और अगर ऐसा ही रहा तो लोकतंत्र नहीं चल सकता। जजों ने कहा- कल को कोई ऐसा न कह दे की हमने अपनी आत्मा बेच दी है।