PM Modi Speech: भाई-भतीजावाद और परिवारवाद से पीएम मोदी ने खेला बड़ा दांव! ऐसे बिगाड़े विपक्ष के 2024 के समीकरण
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विस्तार
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर दिए अपने भाषण में भाई-भतीजावाद और परिवारवाद का जिक्र कर 2024 के चुनावी समीकरणों निशाना साधा है। यही नहीं पीएम मोदी ने अपने भाषण में भाई-भतीजावाद और परिवारवाद का जिक्र करके भविष्य में होने वाले विपक्षी दलों के किसी भी बड़े राजनीतिक गठबंधन पर अभी से ही विपक्ष को घेरने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरीके से बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है, उसके बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि राजनीतिक गठबंधन की राह में भाई-भतीजावाद और परिवारवाद भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार साबित होगा।
अभी से घेरना किया शुरू
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए भाषण में परिवारवाद और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को शामिल कर विपक्ष पर बड़ा हमला किया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से बिहार में जेडीयू और आरजेडी का गठबंधन हुआ है उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह गठबंधन बड़े राजनीतिक दलों के साथ एक बड़ा आयाम ले सकता है। राजनीतिक विश्लेषक ओपी मिश्रा कहते हैं कि 2024 में होने वाले लोकसभा के चुनावों में विपक्षी दलों का गठबंधन होता है या नहीं होता है यह तो भविष्य तय करेगा, लेकिन भाजपा को इस बात का अंदाज़ा है कि गठबंधन की राह किस डगर से होकर आगे जानी है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले ही सबसे बड़े मुद्दे के साथ विपक्ष को अभी से घेरना शुरू कर दिया है, जिस पर चुनावी नतीजे बनने और बिगड़ने वाले हैं। वे कहते हैं कि परिवारवाद और भ्रष्टाचार ऐसे मुद्दे हैं जो बीते कुछ समय के विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में बड़े मुद्दे के तौर पर अलग-अलग राज्यों में और क्षेत्रों में जमकर उठाए गए हैं। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस पर दिए जाने वाले भाषण में इसका उल्लेख निश्चित तौर पर चुनावी समीकरणों को साधना ही है।
2024 में हो सकता है बड़ा विपक्षी गठबंधन
वरिष्ठ पत्रकार और राजनैतिक विश्लेषण जीडी शुक्ला कहते हैं कि जिस तरीके से बिहार में आरजेडी और जेडीयू का गठबंधन हुआ उससे आने वाले दिनों में होने वाले कई राजनीतिक दलों के गठबंधन की राह खुलती हुई दिख रही है। वे कहते हैं कि आरजेडी पर लगातार परिवारवाद का आरोप लगता रहा है। बिहार के चुनाव में भाजपा, आरजेडी पर परिवारवाद का आरोप लगाकर चुनावी समर में उतरी थी। जिस तरीके से आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव कांग्रेस के बड़े नेताओं से संपर्क कर रहे हैं और पिछले हफ्ते कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले उससे अंदाजा यह भी लगाया जा रहा है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्षियों का बड़ा गठबंधन कांग्रेस समेत कई अन्य दलों से हो सकता है। चूंकि भाजपा लगातार कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाती रहती है। ऐसे में प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस पर परिवारवाद और भाई-भतीजावाद पर दिया गया भाषण विपक्षियों को घेरने के लिए मजबूत माना जा रहा है। परिवारवाद पर हमले में सिर्फ आरजेडी ही नहीं बल्कि बल्कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अलावा महाराष्ट्र में शिवसेना समेत पंजाब में अकाली दल समेत अन्य परिवारवाद को बढ़ावा देने वाले राजनैतिक घरानों को भी घेरा है।
को 2024 के चुनावों में विपक्ष होगा असहज
शुक्ला कहते हैं कि सिर्फ परिवारवाद और भाई भतीजावाद के अलावा प्रधानमंत्री ने जिस तरीके से भ्रष्टाचार का जिक्र स्वतंत्रता दिवस के भाषण में किया है, वह भी विपक्षियों को 2024 के चुनावों में बड़ा असहज करने वाला है। उनका कहना है कि कांग्रेस से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक को भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा लगातार घेरती आई है। वह कहते हैं कि चुनावी रैलियों में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के आरोप लगाने और स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से इस तरीके के भ्रष्ट सिस्टम को जड़ से उखाड़ फेंकने वाले भाषण में जमीन आसमान का अंतर होता है। उनका कहना है कि चुनावी रैलियां पूरी तरीके से चुनाव को केंद्रित करके की जाती हैं, जिसमें तमाम तरह के आरोप प्रत्यारोपों को लगाने का सिलसिला चलता है। लाल किले से जब देश के प्रधानमंत्री इस तरह के करप्ट सिस्टम को उखाड़ फेंकने की बात करते हैं, तो यह जनमानस में एक भावनात्मक तरीके से असर डालता है।
एक-एक शब्द रखता है बहुत मायने
वे कहते हैं, अगर आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए भाषण का विश्लेषण करें तो पाएंगे उसके अंदर देश की तरक्की से लेकर महिलाओं के सम्मान और अपनी भाषा के प्रति पैदा किए जाने वाले सम्मान से लेकर वह पांच प्रण भी शामिल हैं, जो देश को विकासशील से विकसित देश की श्रेणी में लाने वाले हैं। उनका कहना है कि जब आप देश की आजादी का जश्न मनाने वाले दिन अपने देश को आगे बढ़ाने का सपना करोड़ों लोगों में जगाते हैं, तो उस दौरान आपका बोला गया एक-एक शब्द बहुत मायने रखता है। शुक्ला कहते हैं कि यह राजनैतिक भी हो सकता है, लेकिन उसका असर जनमानस पर पड़ना स्वाभाविक होता है।