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राफेल डील में मोदी ने रक्षामंत्री, कानून मंत्रालय और डिफेंस अक्विजीशन विंग को किनारे कर दिया

Thu, 15 Nov 2018 04:23 PM IST
अमर उजाला डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Thu, 15 Nov 2018 04:23 PM IST
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PM Modi side away defense minister, law ministry and defence acquisition wing In rafale Deal
Randeep Surjewala
कांग्रेसी नेता रणदीप सुरजेवाला ने राफेल डील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा, राफेल डील में मोदी ने रक्षामंत्री, कानून मंत्रालय और डिफेंस अक्विजीशन विंग को किनारे कर दिया था। राफेल की बेंच मार्क प्राइस की फाइल पर मोदी ने किसी की नहीं सुनी। इस मामले में मोदी सरकार पूरी तरह फंस चुकी है। केंद्र सरकार को राफेल मामले की जांच के लिए अब बिना कोई देरी किए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन कर देना चाहिए।
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वीरवार को एक प्रेसवार्ता में रणदीप सुरजेवाला ने कहा, मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ कर दिया है। प्रधानमंत्री ने राफेल की बेंच मार्क प्राइस वाली फाइल, जिसमें 39, 422 करोड़ रुपए का जिक्र था, उसे दरकिनार कर बेंच मार्क प्राइस 62, 166 करोड़ रुपए कर दिया। मोदी ने ऐसा कर किसका फायदा किया है। रक्षा मंत्रालय के वित्तीय हेड सुधांशु मोहन्ते ने भी इस बाबत सवाल उठाया था, लेकिन उनकी बात भी नहीं सुनी गई। इसके बाद वह फाइल तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के पास गई।
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उन्होंने भी उस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। नेगोशिएशन कमेटी ने इस पर ऐतराज जताया। वही फाइल बाद में डिफेंस ऐक्वीजेशन काउंसिल के पास जाती है। वहां भी नए बेंचमार्क प्राइस को मानने से इंकार कर दिया गया। सुरजेवाला ने कहा, अब वह फाइल मोदी के पास जाती है। उन्होंने सबकी राय खारिज कर जहाज का बेंच मार्क प्राइस 62,166 करोड़ रुपए तय कर दिया। इसके बाद बैंक गारंटी या सोवरेन गारंटी का नंबर आता है। 
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कानून मंत्रालय ने 9 दिसंबर 2015 को सलाह दी कि राफेल सौदे में बैंक गारंटी जरूरी है। मंत्रालय की दलील थी कि यह सौदा दूसरे देश के साथ हो रहा है। पैसा एडवांस में दिया जा रहा है, अगर बीच में सौदा रद्द हो गया तो पैसे फंस जाएंगे। 7 मार्च 2016 को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी कानून मंत्रालय की सलाह पर अपनी सहमति जताई और फाइल में कोई बदलाव नहीं किया। 18 अगस्त 2016 को वही फाइल एयर ऐक्वीजीशन विंग के पास पहुंच जाती है।


विंग ने भी इसे गलत करार दिया। मोदी ने यहां पर भी किसी की नहीं सुनी। उन्होंने समझोते के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को नामित कर दिया, जबकि ऐसे रक्षा सौदे की कीमत का अंतिम निर्धारण वायु सेना करती है। इतना ही नहीं, मोदी ने यह समझौता राफेल कंपनी डसॉल्ट और भारत सरकार के बीच करा दिया, जबकि यह समझौता फ्रांस और भारत सरकार के बीच होना चाहिए था। इसके अलावा यह समझौता भारत में न कराकर उसे पेरिस में करा दिया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि कल कोई कानूनी अड़चन आए तो आरोपी साफ बच निकले। मोदी सरकार को इसका जवाब देना होगा। अगर वह जवाब नहीं देगी तो चुनाव में जनता उनसे सारा हिसाब किताब ले लेगी।
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