पहले 100 पैसे भेजते थे तो 85 पैसे मार जाते थे बिचौलिये, आज पूरा पैसा गरीब के खाते में: मोदी
- पीएम ने पूर्व पीएम राजीव गांधी के बहाने कांग्रेस पर कसा तंज
- कहा- दशकों से लटकी परियोजनाएं हमने पूरी कीं
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कर्नाटक के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को पूर्व पीएम राजीव गांधी के बहाने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, देश में एक वह दौर भी था जब देश में गरीब के लिए एक रुपये भेजा जाता था तो सिर्फ 15 पैसे पहुंचते थे। बाकी के 85 पैसे बिचौलिये मार जाते थे।
आज जितने भेजे जा रहे हैं, उतने, पूरे के पूरे सीधे गरीब के खाते में पहुंच रहे हैं। पीएम ने कहा, नए वर्ष में मैं उम्मीद करता हूं कि जो राज्य पीएम सम्मान किसान योजना से नहीं जुड़े वे भी जरूर जुड़ेंगे। ये योजना इस दल की है ऐसी सोच ने गरीबों का, किसानों का बहुत नुकसान किया है।
सिद्धगंगा मठ में आयोजित कार्यक्रम के बाद पीएम ने तुमकुर में आयोजित एक जनसभा में कहा, हमारी सरकार ने हमेशा किसानों के हित को प्राथमिकता दी। दशकों से लटकी सैकड़ों सिंचाई परियोजनाएं हों, फसल बीमा से जुड़े नियमों में बदलाव हो, स्वायल हेल्थ कार्ड हो या फिर यूरिया की शत- प्रतिशत नीम कोटिंग, हमने हमेशा किसानों के हितों को प्राथमिकता दी।
कई सालों से किसान मांग कर रहे थे कि न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना बढ़ाया जाए। यह ऐतिहासिक फैसला भी हमारी सरकार ने लिया। पीएम ने कहा, नए वर्ष की शुरुआत में अन्नदाता के दर्शन होने से बड़ा कोई सौभाग्य नहीं है। मैं शुभकामना देता हूं।
अन्न उपजाने वालों का आभार जताता हूं। आपकी मेहनत से ही आज भारत में अन्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है। कांग्रेस के पूर्व पीएम राजीव गांधी ने एक बार कहा था कि केंद्र से एक रुपया भेजा जाता है तो गांव तक 15 पैसे ही पहुंच पाता है।
इनाम नेटवर्क का हो रहा विस्तार
पीएम मोदी ने कहा, आपकी वर्तमान जरूरतों का समाधान करने के साथ ही हमारा ध्यान भविष्य की आवश्यकताओं पर भी है। किसानों को अनाज भंडारण, फल-फूल और सब्जियों के भंडारण की दिक्कत न हो इसके लिए देश भर में कोल्ड स्टोरेज की क्षमता बढ़ाई जा रही है। किसान अपनी फसल देश के किसी भी हिस्से के इलेक्ट्रॉनिक मंडी में बेच सकें, इसलिए इनाम नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।
किसानों को लिया हिरासत में
मोदी के कर्नाटक पहुंचने से पहले बंगलूरू, तुमकुर, शिवमोगा में कुछ किसानों को हिरासत में लिया गया था। ये किसान स्वामीनाथन समिति की सिफारिशें लागू नहीं करने पर प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
तीन संकल्पों पर संतों से मांगा सहयोग
मोदी ने कहा कि संतों के दिखाए मार्ग के कारण ही हमने 21वीं सदी के तीसरे दशक में हमने उम्मीद और उत्साह के साथ कदम रखे हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को मालूम है कि बीते दशक की शुरुआत किस तरह के माहौल में हुई थी और अब क्या स्थिति है।
उन्होंने संतों से तीन संकल्पों के लिए सक्रिय सहयोग भी मांगा। पहला- अपने कर्तव्यों और दायित्वों को महत्व देने की अपनी पुरातन संस्कृति को हमें फिर मजबूत करना है। दूसरा, प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा। तीसरा, जल संरक्षण, जल संचयन के लिए जनजागरण में सहयोग।