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PM Modi: ‘आपका आशावाद मुझे पसंद है, भारत निराश नहीं करेगा’, जानिए पीएम मोदी ने क्यों दी यह प्रतिक्रिया
Mon, 27 Nov 2023 06:31 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Mon, 27 Nov 2023 06:31 AM IST
सार
श्रीनिवास ने लिखा कि प्राचीन सभ्यता वाले भारत ने 1991 में उदारीकरण के साथ अपनी सभ्यता का पुनर्जन्म देखा। वैसा ही जैसा 1978 में चीन ने किया। देश लैंडलाइन से सीधे मोबाइल फोन पर आया तो कैश से यूपीआई पर। यह सब सदियों के उपनिवेशवाद व कब्जे के बाद फिर से हुआ जन्म था।
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PM Modi (File Photo)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक भारतीय अमेरिकी निवेशक के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी जिन्होंने भारत में निवेश के माहौल को लेकर उम्मीद जताई थी और भारत को स्टार्टअप देश के रूप में चित्रित किया था। पीएम ने उनके आशावाद की सराहना की। भारतीय-अमेरिकी निवेशक व उद्यमी बालाजी श्रीनिवासन ने सोशल मीडिया पोस्ट पर रविवार को लिखा कि भारत निवेश स्थितियों को बेहतर बना रहा है, देश में बढ़ने की संभावना है, और एक मजबूत व आत्मनिर्भर भारत का होना पूरी दुनिया के लिए अच्छा है। श्रीनिवासन ने पोस्ट में लिखा कि इसी वजह से वे खुद भी भारत में निवेश में रुचि ले रहे हैं। एक अन्य पोस्ट के जवाब में उन्होंने विभिन्न तर्क रख अपने दावों को सही बताया।
उनके इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी ने लिखा, मुझे आपका आशावाद पसंद है और मैं कहूंगा- जब नवाचार की बात आती है तो भारत के लोग ट्रेंडसेटर और आगे रहने वाले हैं। हम अपने देश में निवेश करने के लिए दुनिया का स्वागत करते हैं। भारत निराश नहीं करेगा।
भारत ने सभ्यता का पुनर्जन्म देखा : बालाजी श्रीनिवासन
श्रीनिवास ने लिखा कि प्राचीन सभ्यता वाले भारत ने 1991 में उदारीकरण के साथ अपनी सभ्यता का पुनर्जन्म देखा। वैसा ही जैसा 1978 में चीन ने किया। देश लैंडलाइन से सीधे मोबाइल फोन पर आया तो कैश से यूपीआई पर। यह सब सदियों के उपनिवेशवाद व कब्जे के बाद फिर से हुआ जन्म था।
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दबे हैं, लेकिन जीत की संभावना रखते हैं
सुधारों का मतलब यह नहीं कि हम किसी क्षेत्र में सीधे नंबर 1 या 2 हो जाएं। कई चीजों में भारतीय मानते हैं कि वे पीछे हैं, लेकिन उनके पास जीतने की संभावना है। वे न भूख से मरे जा रहे हैं, न हद दर्जे पर अति उत्साहित हैं। वे जानते हैं कि वे विश्व स्तर पर जा सकते हैं, खुद भारत को विश्व स्तर का बना रहे हैं।
दुनिया में फैले भारतीय बड़ी ताकत
भारतीयों की बड़ी ताकत दुनिया में फैले हुए नागरिक भी हैं। इस सदी में शायद चीन अपने घर में सबसे अच्छा काम करे, लेकिन दुनिया भर में अच्छा काम करने के लिहाज से यह सदी भारत की होगी। इसी वजह से भारत का विकास भी चीन से अलग है। भारतीय कहीं भी जा सकते हैं या जाना चाहते हैं। पश्चिमी देशों के नागरिक खुद को फर्स्ट वर्ल्ड में मानते हुए ऐसा नहीं करना चाहते और चीन के नागरिक ऐसा कर नहीं सकते क्योंकि जहां चीन नहीं चलती, वहां उनकी भी नहीं चलती। तकनीकी क्षेत्र में चीनी प्रवासियों की संख्या घटने पर भारतीयों की बढ़ती है। यह संकेत है कि भारत का युग बस शुरू ही हुआ है।
10 साल में बड़े बदलाव
भारतीय दुबई, डेलावेर, सिंगापुर, ब्रिटेन में फल-फूलते रहे हैं। 1991 के बाद वे भारत में भी आगे बढ़ रहे हैं। आर्थिक प्रणाली में बदलाव से ऐसा हो रहा है। भारत और भारतीयों में निवेश नए बदलाव ला रहा है। गिफ्ट-सिटी जैसी पहल एसईजेड की तरह है। इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान, बुनियादी ढांचे में बदलाव पिछले 10 साल में नजर आए हैं, इनके बड़े यूजर्स बन जाएंगे, तो कारोबार और तेजी से बढ़ेगा।
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उनके इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी ने लिखा, मुझे आपका आशावाद पसंद है और मैं कहूंगा- जब नवाचार की बात आती है तो भारत के लोग ट्रेंडसेटर और आगे रहने वाले हैं। हम अपने देश में निवेश करने के लिए दुनिया का स्वागत करते हैं। भारत निराश नहीं करेगा।
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भारत ने सभ्यता का पुनर्जन्म देखा : बालाजी श्रीनिवासन
श्रीनिवास ने लिखा कि प्राचीन सभ्यता वाले भारत ने 1991 में उदारीकरण के साथ अपनी सभ्यता का पुनर्जन्म देखा। वैसा ही जैसा 1978 में चीन ने किया। देश लैंडलाइन से सीधे मोबाइल फोन पर आया तो कैश से यूपीआई पर। यह सब सदियों के उपनिवेशवाद व कब्जे के बाद फिर से हुआ जन्म था।
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दबे हैं, लेकिन जीत की संभावना रखते हैं
सुधारों का मतलब यह नहीं कि हम किसी क्षेत्र में सीधे नंबर 1 या 2 हो जाएं। कई चीजों में भारतीय मानते हैं कि वे पीछे हैं, लेकिन उनके पास जीतने की संभावना है। वे न भूख से मरे जा रहे हैं, न हद दर्जे पर अति उत्साहित हैं। वे जानते हैं कि वे विश्व स्तर पर जा सकते हैं, खुद भारत को विश्व स्तर का बना रहे हैं।
दुनिया में फैले भारतीय बड़ी ताकत
भारतीयों की बड़ी ताकत दुनिया में फैले हुए नागरिक भी हैं। इस सदी में शायद चीन अपने घर में सबसे अच्छा काम करे, लेकिन दुनिया भर में अच्छा काम करने के लिहाज से यह सदी भारत की होगी। इसी वजह से भारत का विकास भी चीन से अलग है। भारतीय कहीं भी जा सकते हैं या जाना चाहते हैं। पश्चिमी देशों के नागरिक खुद को फर्स्ट वर्ल्ड में मानते हुए ऐसा नहीं करना चाहते और चीन के नागरिक ऐसा कर नहीं सकते क्योंकि जहां चीन नहीं चलती, वहां उनकी भी नहीं चलती। तकनीकी क्षेत्र में चीनी प्रवासियों की संख्या घटने पर भारतीयों की बढ़ती है। यह संकेत है कि भारत का युग बस शुरू ही हुआ है।
10 साल में बड़े बदलाव
भारतीय दुबई, डेलावेर, सिंगापुर, ब्रिटेन में फल-फूलते रहे हैं। 1991 के बाद वे भारत में भी आगे बढ़ रहे हैं। आर्थिक प्रणाली में बदलाव से ऐसा हो रहा है। भारत और भारतीयों में निवेश नए बदलाव ला रहा है। गिफ्ट-सिटी जैसी पहल एसईजेड की तरह है। इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान, बुनियादी ढांचे में बदलाव पिछले 10 साल में नजर आए हैं, इनके बड़े यूजर्स बन जाएंगे, तो कारोबार और तेजी से बढ़ेगा।