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Global South: पीएम मोदी ने 'ग्लोबल डेवलपमेंट कॉम्पैक्ट' का प्रस्ताव रखा, जरूरतमंद देशों की मदद करेगी नई पहल

Sat, 17 Aug 2024 03:51 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 17 Aug 2024 03:51 PM IST
सार

Global South: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की मेजबानी में आयोजित तीसरे 'वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ' सम्मेलन में नई पहल 'ग्लोबल डेवलपमेंट कॉम्पैक्ट' का प्रस्ताव रखा। इस पहल के तहत वैश्विक दक्षिण के जरूरतमंद देशों की वित्तीय मदद की जाएगी। 

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PM Modi proposes 'Global Development Compact' at Voice of Global South Summit
वॉयस ऑफ ग्लोबल समिट में पीएम मोदी और अन्य देशों के शीर्ष नेता - फोटो : एएनआई

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को एक नई पहल 'ग्लोबल डेवलपमेंट कॉम्पैक्ट' का एलान किया। यह पहल खासतौर पर वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए होगी और इसका फोकस व्यापार, स्थिर विकास, तकनीकी साझा करने और परियोजनाओं के लिए आसान वित्तीय मदद पर होगा। यह पहल भारत के विकास के अनुभवों पर आधारित होगी। 

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'जरूरतमंद देशों को नहीं उठाना पड़ेगा कर्ज का बोझ'
पीएम मोदी ने कहा कि इस योजना के तहत जरूरतमंद देशों को विकास के नाम पर कर्ज का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। इस नई पहल का एलान भारत की मेजबानी में आयोजित तीसरे 'वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ' सम्मेलन में किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 'ग्लोबल डेवलपमेंट कॉम्पैक्ट' वैश्विक दक्षिण के देशों की विकास प्राथमिकताओं पर केंद्रित होगा।
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'साझेदार देशों का होगा संतुलित और स्थिर विकास'
समापन सत्र में उन्होंने कहा, "मैं भारत की ओर से एक व्यापक 'ग्लोबल डेवलपमेंट कॉम्पैक्ट' का प्रस्ताव करता हूं। इसका आधार भारत की विकास यात्रा और साझेदारों के अनुभव पर होगा।" मोदी ने कहा, "यह पहल मानव-केंद्रित होगी और विकास के एक व्यापक दृष्टिकोण को बढ़ावा देगी। विकास वित्त के नाम पर जरूरतमंद देशों पर कर्ज का बोझ नहीं डालेगी।" प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना से साझेदार देशों का संतुलित और स्थिर विकास होगा। 
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'25 लाख डॉलर का विशेष कोष शुरू करेगा भारत'
उन्होंने कहा, "हम व्यापार, सतत विकास के लिए क्षमता निर्माण, तकनीक साझा करने, परियोजनाओं के लिए वित्तीय मदद और अनुदान पर फोकस करेंगे। भारत व्यापार को प्रोत्साहन देने के लिए 25 लाख डॉलर का विशेष कोष शुरू करेगा। क्षमता निर्माण के लिए व्यापार नीति के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।" उन्होंने आगे कहा कि दुनियाभर के संघर्षों और तनावों का समाधान एक न्यायपूर्ण और समावेशी वैश्विक शासन में है।



'कम हो वैश्विक उत्तर और वैश्विक दक्षिण के बीच अंतर'
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "वैश्विक उत्तर और वैश्विक दक्षिण के बीच अंतर को कम करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। अगले महीने संयुक्त राष्ट्र में होने वाला  'समिट ऑफ द फ्यूचर' (भविष्य का सम्मेलन) इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।" उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को पूरा करने की अहमियत पर भी जोर दिया। 




समिट में 123 देशों ने लिया हिस्सा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ग्लोबल साउथ समिट के तृतीय सत्र का समापन किया गया। इसमें 123 देशों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा 21 राष्ट्राध्यक्ष, 118 मंत्री और 34 विदेश मंत्रियों ने इसमें सहभागिता की। इसे अलावा 10 मंत्रिस्तरीय सत्र आयोजित किए गए। जहां टिकाऊ भविष्य के लिए वैश्विक दक्षिण को सशक्त बनाने पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट में आतंकवाद और उग्रवाद के मुद्दे का जिक्र किया। कर्ज को लेकर किसी खास देश ने जानकारी नहीं दी। 

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