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Modi-Putin Meet: पुतिन-पीएम मोदी की मुलाकात से क्या हासिल होगा, ट्रंप और चीन की भी इस बैठक पर नजर

Sun, 30 Nov 2025 05:01 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Sun, 30 Nov 2025 05:01 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भावी बैठक पर अमेरिका और चीन जैसे देशों की भी नजर है। पुतिन के साथ बैठक के बाद पीएम मोदी भारत के लिए क्या हासिल करेंगे, इस पर राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की करीबी नजर है।

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PM Modi Prez Putin Meeting Objectives India Russia Relations US Prez Trump and China keeping eye on talks
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक पर चीन और अमेरिका की करीबी नजर (फाइल) - फोटो : पीटीआई-एएनआई

विस्तार

भारत और रूस पारंपरिक तौर पर दोस्त रहे हैं। यह दोस्ती दोनों के लिए ही फायदे का सौदा साबित हुई है। भारत रूसी सैन्य उपकरणों के लिए बड़ा बाजार साबित हुआ है तो भारत अपनी रक्षा आवश्यकताओं के लिए आज भी बहुत हद तक रूस पर निर्भर रहता है। बदले में रूस भारत के खाद्य, कृषि उत्पादों और आभूषणों के निर्यात के लिए एक अच्छा बाजार साबित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी रूस भारत का एक मजबूत सहयोगी साबित हुआ है। दोनों देशों के बीच यह दोस्ती महज व्यापारिक ही नहीं रही है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान से भी दोनों देशों के बीच रिश्ते मजबूत रहे हैं।   

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एक दूसरे की आवश्यकताओं ने रूस और भारत को एक मजबूत और विश्वसनीय दोस्त बना दिया है। यही कारण है कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को रुकवाने के लिए रूस के तेल व्यापार पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की, भारत ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया और लगातार रूस से तेल की खरीद जारी रखी। 
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डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नीति में कुछ बदलाव करते हुए सीधे देशों पर प्रतिबंध लगाने की बजाय तेल कंपनियों को ब्लैक लिस्ट करने की धमकी देनी शुरू कर दी। तेल कंपनियों के ब्लैक लिस्ट होने का अर्थ यह था कि यदि वे रूसी तेल खरीदती तो उन्हें अमेरिकी बाजार में अपने उत्पाद बेचने से महरूम रह जाना पड़ता। कोई भी अंतरराष्ट्रीय कंपनी दुनिया के सबसे मजबूत बाजार में अपने उत्पाद न बेचने का जोखिम नहीं उठा सकती। इसका यह असर हुआ कि भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज सहित बड़ी तेल कंपनियों ने रूस से तेल की खरीद सीमित कर दी।
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क्या मोदी और पुतिन की मुलाकात में इस मुश्किल का कोई हल खोजने की कोशिश की जाएगी? दोनों ही देशों ने इस पर अब तक कोई खुलासा नहीं किया है। 

मोदी-पुतिन की मुलाकात
विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर रूसी फेडरेशन के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर को भारत की राजकीय यात्रा पर होंगे। अपनी दो दिवसीय यात्रा में वे भारत-रूस शीर्ष नेताओं के 23वें शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। वे चार दिसंबर को भारत पहुंचेंगे और अगले दिन यानी पांच दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी राष्ट्रपति पुतिन के लिए रात्रिभोज देंगी। इस पूरी यात्रा की योजना अजित डोभाल की अगस्त में हुई रुस यात्रा के दौरान ही बना ली गई थी। तारीखों की घोषणा अब की गई है।  

क्या होंगे वार्ता के विषय
अमेरिका भारत पर रूसी तेल खरीद रोककर यूक्रेन युद्ध को रोकने की राह तलाश रहा है, लेकिन भारत महंगे तेल की खरीद से बचने के लिए सस्ता रूसी तेल खरीदने के रास्ते तलाश रहा है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यह मुद्दा दोनों नेताओं की बातचीत में शामिल होगा या नहीं, लेकिन पूरी दुनिया की नजर इस वार्ता पर रहेगी। क्योंकि यदि भारत का रूस से तेल खरीद का रास्ता साफ नहीं होता है तो इससे पूरी दुनिया में तेल कीमतों पर असर पड़ सकता है। 

भारत पाकिस्तान और चीन की सीमा पर इजरायल जैसे ड्रोन हमलों की बारिश से बचने के लिए ठोस योजना पर काम कर रहा है। भारत रूस से एस-400 की नई तकनीक और उपकरणों की खरीद कर अपनी सुरक्षा चिंताओं को दूर करना चाहता है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच एस-400 की खरीद पर बातचीत हो सकती है।    

रूस भारत के लिए बड़ा बाजार साबित हो सकता है, लेकिन दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों के बाद भी रूस-भारत का व्यापार अभी अपनी अपेक्षित ऊंचाई को नहीं हासिल कर सका है। भारत रूस के बाजार में अपनी बेहतर पैठ बनाने के लिए प्रयासरत है। दोनों देश एक दूसरे के लिए मुक्त व्यापार की संभावनाओं पर भी काम कर रहे हैं। रूस भारत से यूपीआई तकनीक हासिल करने और और रूपे कार्ड में व्यापार पर भी बातचीत कर सकता है।      

दुनिया को बड़ा संदेश, सैन्य सुरक्षा पर मास्टर स्ट्रोक- पूर्व ब्रिगेडियर
ब्रिगेडियर भुवनेश चौधरी (रिटायर्ड) ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की होने वाली यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बड़ा संदेश होगी। इसका संदेश अमेरिका और यूरोपीय यूनियन को भी जाएगा जो यूक्रेन युद्ध के बीच बार-बार रूस के खिलाफ परमाणु युद्ध शुरू करने की धमकी देते रहे हैं। रूस का चीन के साथ बेहतर संबंध हैं। अंतरराष्ट्रीय नोटिस के बाद भी व्लादिमीर पुतिन का भारत आना और भारत का पुरजोर तरीके से उनका स्वागत करना अमेरिका को बड़ा संदेश देने वाला होगा। 

ब्रि. भुवनेश चौधरी (रिटायर्ड) ने कहा कि पुतिन की इस यात्रा में महत्त्वपूर्ण विमानों की खरीद और उनका सोर्स कोड साझा करने पर समझौता हो सकता है। यदि यह समझौता होता है तो इससे भारत की विमान तकनीक उन्नत चरण में पहुंचेगी और भारत युद्धक विमानों की निर्माण तकनीक में बेहतर हो जाएगा। जिस तरह केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र में भारत को केवल आत्मनिर्भर बनाने का ही नहीं, बल्कि रक्षा उत्पादों के एक महत्त्वपूर्ण सप्लायर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है, पुतिन की यह यात्रा भारत के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। 


भारत ने भी यह साबित किया है कि वह रूस का ऑल वेदर फ्रेंड है। यही कारण है कि रूसी मंत्री ने खुलकर कहा है कि भारत की रक्षा आवश्यकताओं के लिए रूस सब कुछ देने के लिए तैयार है। पुतिन की इस यात्रा में इस बयान को एक मुहावरे के रूप में तब्दील किया जा सकता है।

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