PM Modi: रिसर्च की कमान खुद संभालेंगे पीएम, 50 हजार करोड़ रुपये के बजट वाले NRF से निकलेगी तरक्की की नई राहें
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विस्तार
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को लोकसभा में राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन विधेयक, (NRF) 2023 पेश कर दिया है। यह महत्वपूर्ण बिल अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देगा और विकसित करेगा। इस विधेयक का उद्देश्य भारत के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, अनुसंधान संस्थानों और आर.एंड.डी प्रयोगशालाओं में अनुसंधान-नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले माह ही राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन विधेयक 2023 को मंजूरी दी थी। मानसूत्र सत्र के शुरुआत के पहले दिन ही पीएम मोदी ने कहा था कि समय की मांग की अनुसार सरकार नए कानून बनाने जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन विधेयक 2023 सरकार इस सत्र में पेश करेगी।
यह है इस NRF बिल में, यह होगी पीएम की भूमिका
इस बिल के मुताबिक, भारत के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, अनुसंधान संस्थानों और अनुसंधान व विकास प्रयोगशालाओं में अनुसंधान और विकास की गति को और तेज करना है। साथ ही देश में नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक शीर्ष निकाय स्थापित करना है। केंद्र सरकार ने इस शीर्ष संस्थान की स्थापना के लिए अगले पांच वर्षों 2023-28 के लिए 50,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। एनआरएफ का दायरा बहुत व्यापक होगा। प्रधानमंत्री बोर्ड के पदेन अध्यक्ष होंगे और केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होंगे। एनआरएफ का कामकाज भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार की अध्यक्षता में एक कार्यकारी परिषद द्वारा शासित होगा। इसकी गवर्निंग बॉडी में 20 से 15 शोधकर्ता भी शामिल होंगे।
इस तरह जुटेगा NRF के लिए फंड, यह करेगा काम
नेशनल रिसर्च फाउंडेशन शिक्षा, उद्योग और सरकारी विभागों और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग स्थापित करेगा। इसके अलावा राज्य सरकारों की भागीदारी का इंटरफेस तैयार करेगा। यह अनुसंधान से संबंधित नीतिगत ढांचा बनाने और नियामक प्रक्रिया बनाने में भी सहायक होगा। इसके लिए आवंटित 50 हजार करोड़ रुपये में 36 हजार करोड़ उद्योगों और परोपकारियों से निवेश के माध्यम से जुटाए जाएंगे। जबकि शेष राशि 10 हजार करोड़ रुपये केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित की जाएगी। बचे हुए 4000 करोड़ विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड के एनआरएफ में विलय से प्राप्त होंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुसार देश में वैज्ञानिक अनुसंधान की उच्च स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान के लिए ही इस शीर्ष निकाय की स्थापना की जा रही है। नया एनआरएफ बिल साल 2008 में संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित विज्ञान-इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड को निरस्त कर देगा और उसे एनआरएफ में मिला देगा।