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विशेष सत्र: नई संसद के पहले दिन लोकसभा में पीएम ने मांगी माफी, जानें किससे कहा 'मिच्छामी दुक्कड़म'
Tue, 19 Sep 2023 05:57 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Tue, 19 Sep 2023 05:57 PM IST
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नए संसद भवन में पीएम मोदी
- फोटो :
सोशल मीडिया
विस्तार
संसद का विशेष सत्र नई संसद में शुरू हो गया है। नए भवन के अपने पहले संबोधन में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि, नया भवन है तो भाव भी नया होना चाहिए, भावना भी नई होनी चाहिए। आज गणेश चतुर्थी और संवत्सरी के अवसर पर नई संसद का गृह प्रवेश हुआ है, इसलिए हमें इन दोनों पर्वों की मूल भावनाओं को भी हमेशा के लिए आत्मसात कर लेना चाहिए। पीएम मोदी ने संवत्सरी के पर्व का हवाला देकर जाने-अनजाने में हुई अपनी किसी भी गलती के लिए सांसदों और देशवासियों से माफी भी मांगी। उन्होंने कहा, मेरी तरफ से सबको 'मिच्छामी दुक्कड़म'।
पीएम ने कहा कि आज जब हम एक नई शुरुआत कर रहे हैं तब हमें अतीत की हर कड़वाहट को भुलाकर आगे बढ़ना है। इस भावना के साथ हम यहां से हमारे आचरण, हमारी वाणी, हमारे संकल्पों से जो भी करेंगे, वो देश के लिए, राष्ट्र के एक-एक नागरिक के लिए प्रेरणा का कारण बनना चाहिए और हम सबको इस दायित्व को निभाने के लिए भरसक प्रयास भी करना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से राष्ट्रहित में दलगत भावना से ऊपर उठकर व्यवहार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि, यत भावो, तत भवति। यानी हम जैसी भावना करते हैं, वैसा ही घटित होता है। हमारी भावना जैसी होगी, हम वैसे ही बनते जाएंगे। भवन बदला है, मैं चाहूंगा- भाव भी बदलना चाहिए, भावना भी बदलनी चाहिए। यह संसद दलहित के लिए नहीं है। हमारे संविधान निर्माताओं ने इतने पवित्र संस्थान का निर्माण दलहित के लिए नहीं, सिर्फ और सिर्फ देशहित के लिए किया।'
मिच्छामी दुक्कड़म का मतलब जानिए
'मिच्छामी दुक्कड़म' जैन धर्म से जुड़ा है। श्वेतांबर समाज हर वर्ष 'अष्टाह्निका' नाम से आठ दिन का पर्युषण पर्व मनाता है। पर्युषण पर्व के दौरान ही 'विश्व मैत्री दिवस' यानी संवत्सरी पर्व मनाया जाता है। इस पर्व के समापन पर जैन धर्म के सभी अनुयायी एक-दूसरे से क्षमा प्रार्थना करते हैं। जैनियों का दिगंबर संप्रदाय 'उत्तम क्षमा' तो श्वेतांबर संप्रदाय 'मिच्छामी दुक्कड़म' कहकर जाने-अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगते हैं। मिच्छामी दुक्कड़म प्राकृत भाषा का शब्द है। मिच्छामी का अर्थ क्षमा जबकि दुक्कड़म का अर्थ दुष्ट कर्म यानी बुरे कर्म होता है। इस तरह मिच्छामी दुक्कड़म का मतलब होता है- बुरे कर्मों के लिए क्षमा प्रार्थना।