India-US: भारत टैरिफ में कटौती के लिए राजी नहीं, ट्रंप का दावा गलत, सूत्र बोले- अभी कोई राय देना जल्दबाजी
India-US: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के लिए बातचीत शुरू हो गई है। सूत्रों ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत ने शुल्कों में भारी कटौती करने पर सहमति जताई है, लेकिन भारतीय सरकार ने इसे जल्दबाजी में किया गया बयान माना है।
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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर कोई राय देना अभी जल्दबाजी होगी। यह दावा शनिवार को सरकारी सूत्रों ने किया। सूत्र ने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा गलत है कि भारत टैरिफ में कटौती करने के लिए सहमत हो गया है। इस बीच, केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल शनिवार को अमेरिका से भारत लौट आए। गोयल ने अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जेमिसन ग्रीयर व वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक से बातचीत की।
सूत्र ने कहा, दोनों देशों के लिए अपने हित और संवेदनशीलता होना स्वाभाविक है। टैरिफ कटौती करनी है या नहीं, इस पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। बता दें कि पिछले महीने भारत-अमेरिका पारस्परिक रूप से लाभकारी, बहु-क्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत के लिए रजामंद हुए थे।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इस हफ्ते अपने अमेरिकी समकक्ष और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए अमेरिका में थे। शुक्रवार को ट्रंप ने दावा किया था कि भारत ने शुल्कों में भारी कटौती करने पर सहमति जताई है, जिसे नई दिल्ली ने जल्दबाजी में दिया गया बयान माना है। ट्रंप ने कहा था, भारत हम पर भारी शुल्क लगाया है। आप भारत में कुछ भी नहीं बेच सके। यह लगभग प्रतिबंध लगाने जैसा है। वैसे, अब उन्होंने अपने शुल्कों में भारी कटौती करने पर सहमति जताई है, क्योंकि आखिरकार कोई उन्हें बेनकाब कर रहा है।
ट्रंप ने इस हफ्ते 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत दो अप्रैल से अपने साझेदारों और अन्य देशों पर पारस्परिक शुल्क लगाने की घोषणा की, जो अमेरिकी आयात पर उच्च शुल्क लगाते हैं। भारत सरकार के सूत्रों ने कहा कि मोदी की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान व्यापार के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा एक जारी प्रक्रिया है। सूत्रों ने कहा, चर्चा अभी शुरू हुई है, इसलिए इसके विवरण पर बात करना जल्दबाजी होगी। हर पहलू का एक संदर्भ होता है, जो दोनों देशों के हितों को दिखाता है। सूत्रों ने यह भी बताया कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भारत और अमेरिका के बीच एक सीमित व्यापार समझौते पर चर्चा हुई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसका नतीजा नहीं निकला।
सूत्रों ने यह भी बताया कि भारत ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), स्विट्जरलैंड और नॉर्वे जैसे प्रमुख विकसित देशों के लिए अपने औसत लागू शुल्कों में महत्वपूर्ण कटौती की है। इसी तरह की बातचीत यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ भी चल रही है। अमेरिका के साथ चल रही चर्चाओं को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। ट्रंप ने कई मौकों पर भारत की उच्च शुल्क नीति की आलोचना की है और देश को 'टैरिफ किंग' भी कहा है।
भारत ने अपने 2025-26 के केंद्रीय बजट में बॉर्बन व्हिस्की, वाइन और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र पर शुल्क कम करने का फैसला लिया है। इस फैसले को ट्रंप प्रशासन यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि नई दिल्ली कुछ विशेष क्षेत्रों में शुल्क कम करने के लिए तैयार है। वॉशिंगटन भी नई दिल्ली पर अधिक अमेरिकी तेल, गैस और सैन्य उपकरण खरीदने का दबाव बना रहा है, ताकि व्यापार घाटे को कम किया जा सके, जो भारत के पक्ष में करीब 45 अरब अमेरिकी डॉलर है।
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