मैन ऑफ आइडियाज : पीएम की सबसे बड़ी खासियत हैं उनके अनोखे विचार, पूरी तरह गैरपरंपरागत नेता हैं मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 71 साल के हो गए हैं...पर उनकी रफ्तार धीमी होती नहीं दिख रही। आपदा में भी लोगों का हौसला थामे रखा। मोदी कई मायनों में एकदम अलग तरह के प्रधानमंत्री हैं। इसकी वजह है कि वो गैरजरूरी परंपराओं से बंधे हुए नहीं है। उन्होंने कई ऐसे आइडिया सामने रखे हैं जिन पर अमल तो छोड़िए, राजनेता कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। कुछ ऐसे ही विचार …
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज 71वां जन्मदिन है और ये इस बात के मूल्यांकन का वक्त भी है कि वो क्या अनोखी चीज है जो हिंदुस्तानियों के मन में मोदी के जादू को बरकरार रखे हुए है। आकर्षण या कहें मोदी इफेक्ट है, जिसने कोरोना जैसी आपदा के वक्त भी लोगों के हौसले को थामे रखा और उनकी उम्मीद और भरोसे को कम नहीं होने दिया।
आप देश के किसी भी कोने में चलते-फिरते सर्वे कर लें, यही बात सामने आएगी कि सबसे बड़ा फैक्टर नरेंद्र मोदी खुद हैं। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं? दरअसल कोरोना के दौरान निराशा भरी खबरों के बीच मैंने कई बार लोगों से बात की। उस वक्त ज्यादातर का एक ही जवाब था, मुश्किल के दिन जल्द ही खत्म होंगे, क्योंकि मोदी किसी भी तरह से कोई तरीका जरूर निकाल लेंगे।
परीक्षाओं और उम्मीदों पर उतरे खरे
किसी एक नेता पर पूरे देश के लोगों की ऐसी उम्मीद, इतना भरोसा नहीं देखा गया। खासतौर पर सात साल से प्रधानमंत्री बने रहने के बाद भी अगर लोगों का भरोसा बरकरार है तो मतलब यही कि वह अब तक की परीक्षाओं और उम्मीदों पर खरे उतरे हैं।
विक्रमी पुरुष, सिर पर, चलता न छत्र पुरखों का धर
अपना बल-तेज जगाता है, सम्मान जगत से पाता है
नरेंद्र मोदी की जिंदगी के सफर में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की ओज से भरी ये पंक्तियां पूरी तरह फिट बैठती हैं। ये उनके व्यक्तित्व का कमाल है, कि जब वो कहते हैं... एक बार हमने कुछ करने का निर्णय कर लिया, तो फिर हम मीलों आगे निकल सकते हैं। तब पूरा देश उनके आत्मविश्वास को आत्मसात कर लेता है।
पीएम की सबसे बड़ी खासियत हैं अनोखे विचार
स्वच्छ भारत
मोदी ने लाल किले से टॉयलेट निर्माण और साफ-सफाई का एलान किया और फिर पूरे अभियान को जमीन पर भी ऐसा उतारा कि लोगों को साफ-सफाई की आदत सी पड़ गई है। मोदी ने खुद भी झाड़ू लगाने में संकोच नहीं किया।
घर-घर शौचालय
मोदी ने दो मोर्चों पर काम किया। गरीबाें को टॉयलेट बनाने के लिए सरकारी मदद दी गई। वहीं, कुप्रथा के चक्कर में जिन्होंने अब तक टॉयलेट नहीं बनवाए थे, उन्हें जागरूक करने पीएम खुद उतरे। 2014 में देश के बमुश्किल 40 फीसदी घरों में टॉयलेट थे, लेकिन अब 95 फीसदी से ज्यादा घरों में टॉयलेट हैं।
मन की बात: जनता से सीधे रूबरू
जनता से सीधे रूबरू होने के लिए मोदी ने रेडियो पर मन की बात शुरू की। रेडियो को पुरानी टेक्नोलॉजी मानने वाले लोग भी इससे हैरान रह गए। इसने रेडियो को नया जीवन दे दिया। इससे पीएम लोगों के और करीब आ गए।
विद्यार्थियों से संवाद...बने किशोराें के दोस्त
पीएम किशोर छात्रों के दोस्त बन गए। सफलता के मंत्र दिए। बताया, दबाव के बगैर भी सफलता मुमकिन है।
फिटनेस: दुनिया मना रही है योग दिवस
मोदी ने लोगों को फिटनेस के लिए उत्साहित किया। योग दिवस की धूम देश ही नहीं पूरी दुनिया में होती है।
आत्मनिर्भर भारत: देश की नब्ज समझना
मोदी ने देश की नब्ज समझी और आत्मविश्वास जगाया। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान देश को आर्थिक तौर पर मजबूत और आत्मनिर्भर बनाएंगे।
स्ट्राइक : सुरक्षित और आक्रामक भारत
पहले सर्जिकल स्ट्राइक और फिर बालाकोट में एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान ही नहीं, चीन जैसे शक्तिशाली पड़ोसी को इसका अंदाजा हो गया कि ये नया भारत है।
रंग ला रही हैं बदलाव की कोशिशें
खेल : बदले माहौल से ही भारत ने टोक्यो ओलंपिक और पैरा ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन किया।
उज्ज्वला योजना : महिलाओं को चूल्हे से मुक्ति मिली। पीएम की अपील पर करोड़ों लोगों ने रसोईगैस सब्सिडी छोड़ दी।