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PM Modi: प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में PRAGATI की 50वीं बैठक, विकसित भारत बनाने का दिया मंत्र

Wed, 31 Dec 2025 09:02 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Wed, 31 Dec 2025 09:02 PM IST
सार

50th Meeting Of PRAGATI: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में प्रगति की 50वीं बैठक हुई। इसमें सुधार, प्रभावी क्रियान्वयन और परिवर्तन को विकसित भारत की कुंजी बताया गया। पीएम ने कहा कि प्रगति ने शासन की संस्कृति बदली है और 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति दी है। 

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PM Modi 50th meeting of PRAGATI was held under chairmanship  Prime Minister Modi says has helped complete
पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सुधार, प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक परिवर्तन बेहद जरूरी हैं। प्रगति मंच की 50वीं बैठक में उन्होंने पिछले एक दशक की यात्रा को ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया और कहा कि इस अवधि में शासन की कार्यसंस्कृति में बड़ा बदलाव आया है, जिससे निर्णय लेने और योजनाओं को जमीन पर उतारने की गति तेज हुई है।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधारों का मतलब प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर समाधान तक पहुंचना है। उन्होंने जोर दिया कि प्रक्रियाएं सरल हों, जीवन और कारोबार में आसानी बढ़े और सिस्टम ज्यादा अनुकूल बने। क्रियान्वयन में समय, लागत और गुणवत्ता तीनों पर समान ध्यान जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रगति के जरिए परिणाम आधारित शासन को मजबूती मिली है और अब इसे और गहराई तक ले जाने की जरूरत है।
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जब फैसले समय पर होते हैं, तो जवाबदेही तय होती है- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने प्रगति को पिछले दस वर्षों में भारत की शासन संस्कृति में आए गहरे परिवर्तन का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जब फैसले समय पर होते हैं, समन्वय मजबूत होता है और जवाबदेही तय होती है, तो सरकारी कामकाज की रफ्तार अपने आप बढ़ती है और उसका सीधा असर नागरिकों के जीवन में दिखता है।
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प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रगति सिर्फ एक समीक्षा बैठक नहीं, बल्कि टीम इंडिया की भावना और सहकारी संघवाद का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने सड़क, रेल, बिजली, जल संसाधन और कोयला जैसे क्षेत्रों की पांच अहम बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की, जो पांच राज्यों में फैली हैं और जिनकी कुल लागत 40,000 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व की कई लंबित परियोजनाएं अब पूरी हो चुकी हैं।

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पीएम श्री योजना की भी की समक्षा
पीएम श्री योजना की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे समग्र और भविष्य के लिए तैयार स्कूली शिक्षा का राष्ट्रीय मानक बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि योजना का क्रियान्वयन ढांचागत नहीं, बल्कि परिणाम केंद्रित होना चाहिए। सभी मुख्य सचिवों से उन्होंने पीएम श्री योजना की कड़ी निगरानी करने और इन स्कूलों को राज्य सरकारों के अन्य स्कूलों के लिए बेंचमार्क बनाने को कहा। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को जमीनी दौरे कर मूल्यांकन करने की सलाह दी।

प्रधानमंत्री ने बताया कि प्रगति का विचार उनके गुजरात के मुख्यमंत्री रहते समय आया था। उस समय उन्होंने तकनीक आधारित जनशिकायत निवारण मंच शुरू किया था, जिससे अनुशासन, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। इसी अनुभव ने आगे चलकर प्रगति का स्वरूप लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र में आने के बाद उसी भावना को राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के माध्यम से लागू किया गया। बड़े प्रोजेक्ट, प्रमुख कार्यक्रम और जनशिकायत निवारण को एकीकृत मंच पर लाकर समीक्षा, समाधान और फॉलो-अप की व्यवस्था की गई, जिससे कामकाज में गति और पारदर्शिता बढ़ी।

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प्रगति के कारण हुए ये बड़े बदलाव
प्रधानमंत्री ने बताया कि प्रगति आधारित पारिस्थितिकी तंत्र ने 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति दी है। 2014 से अब तक प्रगति के तहत 377 परियोजनाओं की समीक्षा हुई, जिनमें पहचाने गए 3,162 मुद्दों में से 2,958 यानी करीब 94 प्रतिशत का समाधान किया गया। इससे देरी, लागत बढ़ने और समन्वय की कमी में बड़ी कमी आई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रगति के जरिए कई दशकों से अटकी परियोजनाएं पूरी हुईं। इनमें असम का बोगीबील रेल-सह-सड़क पुल, जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भिलाई स्टील प्लांट का आधुनिकीकरण और गडरवारा व लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट शामिल हैं। ये सभी निरंतर निगरानी और बेहतर अंतर-सरकारी समन्वय का परिणाम हैं।

विकसित भारत बनाने का दिया मंत्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाना एक राष्ट्रीय संकल्प और समयबद्ध लक्ष्य है। प्रगति इस लक्ष्य को हासिल करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि सामाजिक क्षेत्र में विशेष रूप से मुख्य सचिव स्तर पर PRAGATI जैसे तंत्र को संस्थागत किया जाए। साथ ही उन्होंने परियोजना के हर चरण में तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में प्रगति को और मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि तेज क्रियान्वयन, उच्च गुणवत्ता और नागरिकों के लिए मापने योग्य परिणाम सुनिश्चित हों।


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