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PM Degree Row: सीएम केजरीवाल को झटका, गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उनकी याचिका शीर्ष अदालत ने की खारिज
Fri, 25 Aug 2023 05:36 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 25 Aug 2023 05:36 PM IST
सार
गुजरात उच्च न्यायालय ने 11 अगस्त को केजरीवाल और संजय सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। इसके बाद केवल केजरीवाल ने 11 अगस्त के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गुजरात हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षिक योग्यता को लेकर केजरीवाल की टिप्पणी पर गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा दायर आपराधिक मानहानि कार्यवाही पर रोक लगाने के उनके अनुरोध को खारिज कर दिया था। इसके बाद केजरीवाल ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा आरटीआई अधिनियम के तहत पीएम मोदी की डिग्री के बारे में जानकारी प्रदान करने के मुख्य सूचना आयुक्त के आदेश को रद्द करने के बाद गुजरात विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पीयूष पटेल ने केजरीवाल और आप नेता संजय सिंह के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणियों पर मानहानि का मामला दायर किया था। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा कि वह याचिका पर नोटिस जारी नहीं कर रही है क्योंकि मामला गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है और 29 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
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पीठ ने कहा कि गुजरात विश्वविद्यालय और केजरीवाल अपनी शिकायतें उच्च न्यायालय के समक्ष उठा सकते हैं। शुरुआत में, केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। गुजरात यूनिवर्सिटी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केजरीवाल ने तथ्यों को छिपाया है।
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गुजरात उच्च न्यायालय ने 11 अगस्त को केजरीवाल और संजय सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। गुजरात की एक मेट्रोपॉलिटन अदालत ने पहले पीएम मोदी की डिग्री के संबंध में उनके "व्यंग्यात्मक" और "अपमानजनक" बयानों पर मानहानि मामले में केजरीवाल और सिंह को तलब किया था। मामले को 31 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। बाद में आप के दोनों नेताओं ने मामले में मेट्रोपॉलिटन अदालत के समन को चुनौती देते हुए सत्र अदालत में एक पुनरीक्षण आवेदन दायर किया।
हालांकि, सत्र अदालत ने सात अगस्त को मुकदमे पर अंतरिम रोक लगाने की उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सत्र अदालत में रिवीजन अर्जी पर अब 16 सितंबर को सुनवाई होगी। केवल केजरीवाल ने 11 अगस्त के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया।
पीयूष पटेल द्वारा दायर शिकायत के अनुसार, दोनों नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और ट्विटर हैंडल पर पीएम मोदी की डिग्री को लेकर विश्वविद्यालय को निशाना बनाते हुए "अपमानजनक" बयान दिए थे। शिकायतकर्ता ने कहा, गुजरात विश्वविद्यालय को निशाना बनाने वाली उनकी टिप्पणियां अपमानजनक थीं और इससे विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची, जिसने जनता के बीच अपना एक रूतबा कायम किया है। पटेल ने अपनी शिकायत में कहा, उनके बयान व्यंग्यात्मक थे और जानबूझकर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए दिए गए थे।
31 मार्च को, गुजरात उच्च न्यायालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 2016 के आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय को केजरीवाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री के बारे में जानकारी प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। गुजरात उच्च न्यायालय ने कहा था कि आप प्रमुख की आरटीआई याचिका को देखने से यह "सुखद सार्वजनिक हित विचारों" पर आधारित होने के बजाय "राजनीतिक रूप से परेशान करने वाली और प्रेरित" प्रतीत होती है।