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Supreme Court: 'चुनावी बांड से राजनीतिक दलों को मिला धन किया जाए जब्त', सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका

Sat, 06 Jul 2024 11:06 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 06 Jul 2024 11:06 PM IST
सार

देश की शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की गई है जिसमें 2018 की चुनावी बांड योजना के तहत राजनीतिक दलों को मिले धन को जब्त करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। वहीं याचिकाकर्ता की तरफ से चुनावी बांड से मिले धन पर आयकर लगाने की मांग की गई है।

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Plea in SC for confiscation of money received by political parties under Electoral Bonds scheme
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

चुनावी बांड का मामला एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है। इस बार सुप्रीम कोर्ट से चुनावी बांड योजना 2018 से राजनीतिक दलों को मिले धन को जब्त करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। मामले में याचिकाकर्ता खेम सिंह भाटी की दायर याचिका में कहा गया है कि 15 फरवरी को एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के मामले में, शीर्ष अदालत ने चुनावी बांड योजना को रद्द कर दिया था क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लंघन था।
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'चुनावी बांड से मिल धन दान और स्वैच्छिक योगदान नहीं'
याचिका में कहा गया है कि इस अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को फैसले की तारीख से चुनावी बांड जारी करने पर रोक लगाने और 12 अप्रैल, 2019 से फैसले की तारीख तक खरीदे गए बांडों का विवरण प्रकट करने का निर्देश दिया। वहीं याचिका में आरोप लगाया गया है कि, यह पेश किया गया है कि राजनीतिक दलों की तरफ से चुनावी बांड के माध्यम से हासिल की गई राशि न तो 'दान' थी और न ही 'स्वैच्छिक योगदान' बल्कि यह सरकारी खजाने की कीमत पर दिए गए अनुचित लाभ के लिए कई कॉर्पोरेट घरानों से 'क्विड प्रो क्वो' के रूप में प्राप्त 'वस्तु विनिमय धन' था।
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'चुनावी बांड आपराधिक मुकदमे से बचने के लिए था'
वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया की तरफ से तैयार की गई और अधिवक्ता जयेश के उन्नीकृष्णन के माध्यम से दायर की गई याचिका में दावा किया गया है कि चुनावी बांड की खरीद और नकदीकरण के विवरण से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि कंपनियों की तरफ से राजनीतिक दलों को चुनावी बांड के माध्यम से भुगतान किया गया धन, या तो आपराधिक मुकदमे से बचने के लिए या अनुबंध या अन्य नीतिगत मामलों के माध्यम से मौद्रिक लाभ प्राप्त करने के लिए था।
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पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित हो एक समिति
वहीं याचिकाकर्ता ने सार्वजनिक अधिकारियों की तरफ से दानदाताओं को दिए गए कथित अवैध लाभों की जांच करने के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्देश देने की भी मांग की। बता दें कि 15 फरवरी को, एक ऐतिहासिक फैसले में शीर्ष अदालत ने राजनीतिक फंडिंग के लिए चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया कि यह भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ सूचना के अधिकार का भी उल्लंघन करता है।
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