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SC: UP गैंगस्टर एक्ट को शीर्ष अदालत में दी गई चुनौती, कुछ प्रावधानों को गैर कानूनी घोषित करने की मांग
Tue, 06 Dec 2022 10:52 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 06 Dec 2022 10:52 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट को साल 1986 में लाया गया था। इस एक्ट के जरिए गैंगस्टर नियमों के नियम-22 में पुलिस या कार्यपालिका को किसी व्यक्ति के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट लगाने की विवेकाधीन शक्तियां प्रदान की गई हैं।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश का गैंगस्टर एक्ट अकसर विवादों में रहा है। वहीं अब इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। आज सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई एक याचिका में कहा गया है कि पुलिस उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं समाज विरोधी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, 1986 का दुरुपयोग कर रही है। इस याचिका में इस एक्ट के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है। एडवोकेट अंसार अहमद चौधरी ने अपनी याचिका में गैंगस्टर कानून की धारा तीन, 12 और 14 और उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और समाज विरोधी गतिविधियां रोकथाम नियम 16(3), 22, 35, 37(3) व 40 को असंवैधानिक, गैरकानूनी और निरर्थक घोषित करने के लिए उचित निर्देश जारी करने की मांग की है।
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संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में एडवोकेट अंसार अहमद चौधरी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं समाज विरोधी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, 1986 की धाराएं 16(3), 22, 35, 37(3) व 40 संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ हैं। ये संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 20(2), 21 व 300ए का भी उल्लंघन करते हैं। इसके अलावा याचिका में आरोपी की 60 दिनों के रिमांड वाले प्रावधान को भी चुनौती दी गई है।
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याचिका में कहा गया है, 'न्यायपालिका मौलिक अधिकारों की संरक्षक है और उसके पास न्यायिक समीक्षा की शक्ति है जो अदालतों को विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों की पड़ताल करने और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने पर उन्हें अवैध घोषित करने का अधिकार प्रदान करती है। सरकार की हर कार्रवाई का कारण होना चाहिए और वह स्वेच्छाचारिता से मुक्त होनी चाहिए। यह कानून के शासन का सार है और उसकी न्यूनतम आवश्यकता है।'
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1986 में लाया गया था उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट को साल 1986 में लाया गया था। इस एक्ट के जरिए गैंगस्टर नियमों के नियम-22 में पुलिस या कार्यपालिका को किसी व्यक्ति के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट लगाने की विवेकाधीन शक्तियां प्रदान की गई हैं।