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उपलब्धि: चांद की माटी में उगे पौधे, अंतरिक्ष में भोजन-हवा की जगी आस, सिर्फ 12 ग्राम मिट्टी में वैज्ञानिकों ने किया ऐतिहासिक कारनामा

Sat, 14 May 2022 06:41 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला रिसर्च डेस्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला रिसर्च डेस्क, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 14 May 2022 06:41 AM IST
सार

फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए प्रयोग में चांद की माटी में न सिर्फ बीज का अंकुरण हुआ बल्कि पौधे बड़े होने में भी सफल रहे। वैज्ञानिकों ने यह शोध सिर्फ 12 ग्राम मिट्टी में किया है, जो अलग-अलग अपोलो मिशन में अंतरिक्ष यात्री लेकर आए हैं।

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Plants grow in lunar soil for the first time space scientists did a historic feat in just 12 grams of soil
Plants grow in lunar soil - फोटो : Twitter@NASASpaceSci

विस्तार

इंसान ने चांद पर बसने की ख्वाहिश का जो ‘बीज’ बोया था, उसमें अब ‘कोपलें’ फूटने लगी हैं। दरअसल, वैज्ञानिकों ने चांद से धरती पर लाई गई मिट्टी में पहली बार पौधे उगाने का अनूठा कारनामा कर दिखाया है, जो भविष्य में अंतरिक्ष में भोजन और ऑक्सीजन पैदा करने की दिशा में बड़ा ऐतिहासिक कदम बन गया है।

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फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए प्रयोग में चांद की माटी में न सिर्फ बीज का अंकुरण हुआ बल्कि पौधे बड़े होने में भी सफल रहे। वैज्ञानिकों ने यह शोध सिर्फ 12 ग्राम मिट्टी में किया है, जो अलग-अलग अपोलो मिशन में अंतरिक्ष यात्री लेकर आए हैं।
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‘कम्युनिकेशंस बायोलॉजी’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में चंद्रमा की मिट्टी में इन पौधों के जैविक विकास का विवरण पेश किया गया है। बता दें, चांद की मिट्टी (लूनर रेगोलिथ) धरती की मृदा से बहुत अलग और पथरीली होती है, जिसमें कुछ उपजाना काफी मुश्किल काम है। लेकिन वैज्ञानिकों ने यह कामयाबी ऐसे समय हासिल की है, जब नासा के अर्तेमिस मिशन में एक बार फिर इंसान चांद पर भेजने की तैयारी है।
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ऐसे हुआ प्रयोग, चार प्लेटों में रोपे सरसों के बीज
प्रयोग के लिए वैज्ञानिकों को नासा से महज कुछ चम्मच (12 ग्राम) रेगोलिथ मिली थी, जो अपोलो 11, अपोलो 12 और अपोलो 17 अभियानों के दौरान एकत्र की गई थी। उन्होंने इसे बहुत छोटे आकार की चार प्लास्टिक प्लेटों में रखकर अरबइडॉप्सिस (एक किस्म की सरसों) के बीज रोपे। फिर इन्हें पानी, धूप और ऐसे पोषक तत्व दिए, जो चांद की माटी में नहीं मिलते। इसके बाद चंद दिनों में बीजों में अंकुर फूटे और पौधे बढ़ने लग गए। 20 दिन बाद पौधों को निकालकर वैज्ञानिकों ने इनके डीएनए का अध्ययन किया।


अंतरिक्ष केंद्र बन पाएगा चांद : शोध के लेखकों में से एक रॉब फर्ल के मुताबिक, भविष्य में लंबी अवधि के अंतरिक्ष अभियानों के लिए हम चांद का इस्तेमाल एक केंद्र या लॉन्चिंग पैड की तरह कर सकते हैं। ऐसे में जिस मिट्टी में हमने पौधे उगाए हैं, वह वहां रहने के लिए काफी मायने रखेगी और हम उसका उपयोग करना चाहेंगे।

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