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LAC: चीन सीमा पर 130 गांवों में मजबूत होगा आधारभूत ढांचा, इंफ्रा परियोजनाओं के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस योजना

Sat, 24 Dec 2022 12:29 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 24 Dec 2022 12:29 AM IST
सार

लेफ्टिनेंट जनरल कलिता ने कहा कि हम एलएसी से 100 किलोमीटर के भीतर आने वाले किसी भी बुनियादी ढांचे के लिए एकल खिड़की मंजूरी की एक पद्धति विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में एलएसी के साथ लगने वाले कई क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों, वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों और आरक्षित वनों के अंतर्गत आते हैं और परियोजनाओं के लिए विभिन्न स्वीकृतियां प्राप्त करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

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Plan afoot for single window clearance for infra projects within 100 km from LAC
सेना की पूर्वी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता। - फोटो : ANI (फाइल फोटो)

विस्तार

भारतीय सेना ने बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में सीमावर्ती क्षेत्रों में 130 गांवों की पहचान की है।वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के निकट चीन द्वारा नागरिक बस्तियों के विस्तार पर बढ़ती चिंताओं की पृष्ठभूमि में सेना की पूर्वी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

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एलएसी से 100 किमी के भीतर किसी भी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एकल खिड़की प्रणाली
लेफ्टिनेंट जनरल कलिता ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि एलएसी से 100 किलोमीटर के भीतर किसी भी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अनुमोदन प्रदान करने के हेतु एक प्रकार की ‘एकल खिड़की प्रणाली’ के लिए प्रयास चल रहे हैं क्योंकि विभिन्न नियामक मंजूरी प्राप्त करने में लगने वाले समय के कारण प्रमुख परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी होती है।
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कमांडर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में एलएसी के साथ लगने वाले कई क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों, वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों और आरक्षित वनों के अंतर्गत आते हैं और परियोजनाओं के लिए विभिन्न स्वीकृतियां प्राप्त करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि हम एलएसी से 100 किलोमीटर के भीतर आने वाले किसी भी बुनियादी ढांचे के लिए एकल खिड़की मंजूरी की एक पद्धति विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन की गति को तेज करना है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम सेक्टर में एलएसी की निगरानी करने वाली पूर्वी कमान के कमांडर ने कहा कि चीन की सीमा से लगे प्रमुख इलाकों में सड़क और दूरसंचार नेटवर्क विकसित करने के लिए काफी काम चल रहा है।

सेना द्वारा 130 गांवों की पहचान की गई
एलएसी के साथ आदर्श गांवों के विकास पर लेफ्टिनेंट जनरल कलिता ने कहा कि योजना का उद्देश्य ‘रिवर्स माइग्रेशन’ (विपरीत पलायन) सुनिश्चित करना है और लोगों को बेहतर संभावनाओं के लिए क्षेत्रों को छोड़ने से रोकना है। कमांडर ने कहा कि सेना द्वारा पहचाने गए 130 गांवों में से 28 सिक्किम में हैं, बाकी अरुणाचल प्रदेश में हैं।

फरवरी में अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चीन की सीमा से लगे गांवों में बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने की योजना के बारे में बात की थी। केंद्र प्रायोजित योजना के अलावा, अरुणाचल सरकार भी आदर्श गांवों का विकास कर रही है। योजना के तहत विकसित किए जाने वाले गांवों की पहचान एक परामर्श प्रक्रिया के तहत की जा रही है, जिसमें गृह मंत्रालय सहित संबंधित राज्य और केंद्रीय मंत्रालय शामिल हैं।

अरुणाचल प्रदेश के कहो गांव में शुरू हो चुका है काम
लेफ्टिनेंट जनरल कलिता ने कहा कि सशस्त्र बलों की सिफारिशें भी शामिल की गई हैं। हमने अपनी सिफारिशें दी हैं। हमने पूरे सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में 130 गांवों की पहचान की है। उनमें से लगभग 28 सिक्किम में हैं और बाकी अरुणाचल प्रदेश में हैं। कमांडर ने कहा कि परियोजना के तहत बुनियादी ढांचे के विकास का काम अरुणाचल प्रदेश के कहो गांव (Kaho village) में शुरू हो चुका है। सड़क के बुनियादी ढांचे के विकास पर, जनरल कलिता ने सुझाव दिया कि व्यापक ध्यान सीमांत दर्रों की लाइन से कनेक्टिविटी पर है।

गौरतलब है कि नौ दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर के यांग्त्से में एलएसी पर चीन और भारत के सैनिकों के बीच झड़प के बाद दोनों के बीच तनाव में एक नया उछाल आया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 दिसंबर को संसद में कहा कि चीनी सैनिकों ने यांग्त्से क्षेत्र में यथास्थिति को "एकतरफा" बदलने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने अपनी अटल और दृढ़ प्रतिक्रिया से उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया।


चीन कथित तौर पर एक सैन्य उद्देश्य के साथ एलएसी के साथ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आवासीय परिसरों की स्थापना कर रहा है। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, चीन एलएसी के साथ वाले क्षेत्रों में तेजी से हेलीपैड, बंकर और गोला-बारूद भंडारण इकाइयों जैसे सैन्य बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है। भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख विवाद के बाद एलएसी के साथ लगने वाले क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सड़कों, पुलों और गोला-बारूद के डिपो के निर्माण से लेकर अपने निगरानी तंत्र को मजबूत करने तक, सेना सैनिकों को तेजी से जुटाने के लिए सैन्य बुनियादी ढांचे को तेज गति से बढ़ा रही है।

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