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उपासना स्थल कानून: मथुरा मस्जिद समिति ने केंद्र पर लगाया आरोप, सुप्रीम कोर्ट से अधिकार खत्म करने की मांग की

Tue, 21 Jan 2025 11:24 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 21 Jan 2025 11:24 PM IST
सार

शाही मस्जिद समिति ने कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान रिट याचिका और संबंधित रिट याचिकाओं की सुनवाई की तिथि 17 फरवरी तय की है इसलिए यह न्याय के हित में होगा कि केंद्र के जवाबी हलफनामा या जवाब दाखिल करने के अधिकार को समाप्त कर दिया जाए।

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Places of Worship Act: Mathura Masjid Committee accuses Centre, demands Supreme Court to abolish its rights
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

मथुरा की शाही मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उपासना स्थल अधिनियम के खिलाफ दाखिल याचिकाओं में जवाब दाखिल करने के केंद्र के अधिकार को खत्म करने की मांग की है। समिति ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर इस मामले में जवाब देने में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है। शीर्ष अदालत ने मार्च 2021 में केंद्र को नोटिस जारी किया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने कई मौकों के बावजूद अपना जवाब दाखिल नहीं किया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया चार हफ्ते का समय
मस्जिद समिति ने याचिका में कहा कि केंद्र के इस रवैये का उद्देश्य वर्तमान रिट याचिका और संबंधित रिट याचिकाओं की सुनवाई में देरी करना है। जिससे पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 को चुनौती देने वालों को अपनी-अपनी लिखित प्रस्तुतियां/प्रतिक्रियाएं दाखिल करने में बाधा हो रही है, क्योंकि केंद्र के रुख का उस पर असर पड़ेगा। समिति ने बताया कि 12 दिसंबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था लेकिन वह ऐसा करने में विफल रहा। 
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शाही मस्जिद समिति ने कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान रिट याचिका और संबंधित रिट याचिकाओं की सुनवाई की तिथि 17 फरवरी तय की है इसलिए यह न्याय के हित में होगा कि केंद्र के जवाबी हलफनामा या जवाब दाखिल करने के अधिकार को समाप्त कर दिया जाए।
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सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों को दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर, 2024 को 1991 के कानून के खिलाफ कई याचिकाओं पर कार्रवाई करते हुए सभी अदालतों को नए मुकदमों पर विचार करने और धार्मिक स्थलों को पुनः प्राप्त करने की मांग करने वाले लंबित मामलों में कोई भी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 1991 के कानून के क्रियान्वयन के लिए गैर सरकारी संगठनों जमीयत उलमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दायर याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया था। वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की मुख्य याचिका समेत कई याचिकाओं में उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के कई प्रावधानों को चुनौती दी गई है।
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