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गलवां घाटी में नई 'दीवार', चीनी सेना को पीछे खींचने पड़ सकते हैं कदम

Sun, 05 Jul 2020 11:35 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sun, 05 Jul 2020 11:35 AM IST
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PLA may need to shift its soldiers on Galwan bank have been flooded due to sharp rise in water levels
लद्दाख की गलवां घाटी (फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में गतिरोध के प्वाइंट पर पांच किलोमीटर की दूरी पर बड़ी संख्या में सैनिकों को एकत्र किया हुआ है। अब उसे अपने सैनिकों को गलवां के छोर से पीछे हटाना पड़ेगा क्योंकि जल स्तर में इजाफा हो रहा है। घटनाक्रम से परिचित लोगों ने इस बात की जानकारी दी।

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एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर ने कहा कि बर्फ से ढकी गलवां नदी जो अक्साई चीन क्षेत्र से निकलती है उसका जल स्तर तापमान में बढ़ोतरी के कारण बढ़ रहा है। एक वरिष्ठ सेनाधिकारी ने कहा, ‘तीव्र गति से बर्फ पिघलने की वजह से नदी तट पर कोई भी स्थिति खतरनाक हो सकती है।’ उन्होंने कहा कि उपग्रह और ड्रोन तस्वीरों से पता चलता है कि नदी किनारे स्थित चीनी टेंट बाढ़ की वजह से डूब सकते हैं।भारत और चीनी सेना के जनरल के बीच स्थिति को सामान्य करने, गतिरोध को खत्म करने और अपनी-अपनी पोजिशन पर वापस जाने की योजना बनाने के लिए तीन बार बातचीत हुई है। दोनों देशों के बीच लगभग 60 दिनों से गतिरोध चल रहा है। सैन्य कमांडर का कहना है कि चीन के लिए गलवां, गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स और पैंगोंग त्सो में वर्तमान पीएलए पोजिशन पर कब्जा करना कठिन होगा।
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उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से अस्थिर हैं। यदि बीजिंग वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति बहाल नहीं करता है तो सर्दियों के महीनों में गतिरोध जारी रह सकता है। वहीं अपने लद्दाख दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत शांति चाहता है लेकिन हम सभी परिस्थितियों में अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए खड़े होंगे। गतिरोध को किस तरह से खत्म करना है यह पूरी तरह से बीजिंग पर निर्भर करता है। 

फिलहाल के लिए चीन के गतिरोध समाप्त करने की बात कहने के बावजूद इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वह विवादित प्वाइंट पर पीछे हटने को तैयार है। इसके विपरीत ऐसी रिपोर्टें हैं कि पीएलए गलवां घाटी में अपने क्षेत्रों में फाइबर ऑप्टिक केबल बिछा रही है। ऐसी भी रिपोर्ट है कि पीएलए पैंगोंग झील के फिंगर एरिया  में एक सुरंग बनाने की कोशिश में है।

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