Manipur: 'PM मोदी स्थिति क्यों नहीं बताते?' खरगे का सवाल, गोयल बोले- गृहमंत्री देंगे जवाब; धनखड़ ने की ये अपील
मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में प्रधानमंत्री मोदी के इस मुद्दे पर जवाब न देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब इतने सारे लोग इस बारे में बात करना चाहते हैं, तो वे बात करने के लिए तैयार क्यों नहीं हैं? मोदी 'साहब' यहां आकर स्थिति क्यों नहीं बताते? बाहर, वह ईस्ट इंडिया कंपनी के बारे में बात करते हैं, लेकिन वह सदन में मणिपुर के बारे में बात करने के लिए तैयार नहीं हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मणिपुर में हिंसा को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। इसकी परिणित संसद में भी देखने को मिल रही है। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ही इस मुद्दे पर वहां हंगामा जारी है। सरकार मणिपुर हिंसा पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष प्रधानमंत्री द्वारा संसद में बयान देने की मांग पर अड़ा है। इस बीच, मंगलवार को इस मुद्दे पर बहस को लेकर विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और सदन के नेता पीयूष गोयल के बीच राज्यसभा में तीखी नोकझोंक हो गई।
राज्यसभा में लगे मणिपुर-मणिपुर' के नारे
दोपहर में सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर प्रश्नकाल की शुरुआत से ही सदन में हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान कांग्रेस और अन्य समान विचारधारा वाले दलों के सदस्यों ने 'मणिपुर-मणिपुर' के नारे लगाए। इस दौरान खरगे ने कहा कि 50 से अधिक सदस्यों ने नियम 267 के तहत मणिपुर मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस दिया है, लेकिन सरकार तैयार नहीं है। वहीं गोयल ने उन पर पलटवार करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में महिलाओं पर अत्याचार से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं।
मोदी 'साहब' यहां आकर स्थिति क्यों नहीं बताते?- खरगे
खरगे ने सदन में मोदी की गैरहाजिरी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, जब इतने सारे लोग इस बारे में बात करना चाहते हैं तो वे बात करने को तैयार क्यों नहीं हैं? मोदी ‘साहब’ यहां आकर स्थिति क्यों नहीं समझाते? बाहर, वह ईस्ट इंडिया कंपनी के बारे में बात करते हैं, लेकिन वह सदन में मणिपुर के बारे में बात करने के लिए तैयार नहीं हैं।
गोयल ने जताया खरगे के बयान पर एतराज
वहीं, सदन के नेता पीयूष गोयल ने खरगे की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने विपक्ष पर सदन को बाधित करने और ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह निरर्थक है और हम चर्चा के लिए तैयार हैं। हम इस पर स्वस्थ बहस और चर्चा चाहते हैं। गृह मंत्री इसके लिए तैयार हैं। वह 'दूध का दूध' और 'पानी का पानी' करेंगे।
गोयल ने आगे कहा कि हम महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को उजागर करना चाहते हैं। हम मणिपुर, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में जो हो रहा है उसे उजागर करना चाहते हैं। देश में जो हो रहा है उसे लेकर हम चिंतित हैं। हम चाहते हैं कि राज्य सरकारें जवाबदेह बनें। यह राजनीतिकरण करने का मामला नहीं है बल्कि हमारे दिल से जुड़ा मामला है।
विपक्ष पर तंज कसते हुए गोयल ने यह भी कहा, 'यदि आप मामले को लेकर संवेदनशील होते तो आप इस मामले पर चर्चा कर रहे होते। आप पिछले चार दिनों से सदन को बाधित कर रहे हैं। आप इस देश के युवाओं का भविष्य खराब कर रहे हैं।'
प्रश्नकाल संसदीय कार्य का हृदय, मर्यादा बनाए रखें- धनखड़
प्रश्नकाल के दौरान राज्यसभा में हंगामे के बीच सभापति धनखड़ ने सदस्यों से शिष्टाचार बनाए रखने और सदन को चलने देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल संसदीय कामकाज का दिल है। प्रश्नकाल जवाबदेही और पारदर्शिता उत्पन्न करता है। यह सदन के प्रत्येक सदस्य को सरकार से जवाब मांगने की अनुमति देता है। प्रश्नकाल बड़े पैमाने पर लोगों के लिए सहायक होता है। यह सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार इनपुट और प्रतिक्रिया एकत्र करती है।
सभापति ने आगे कहा कि मैं सदस्यों से सदन में व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह करूंगा। उन्होंने सदस्यों से कहा कि हमें मर्यादा की कमी और अनुशासन की कमी के प्रति शून्य सहिष्णुता रखनी होगी। मर्यादा और अनुशासन हमारी पहचान होनी चाहिए।
राज्यसभा अध्यक्ष ने की चिदंबरम की आलोचना
इस बीच, राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को असंयमित और अनुचित बयान के लिए कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की आलोचना की। उन्होंने कहा कि चिदम्बरम ने अपने अनुभव के आधार पर मणिपुर के मुद्दे को उठाया। राज्यसभा सभापति ने कहा कि उनका सवाल था, "आप ऐसा कैसे कर सकते हैं?' यह उचित नहीं था क्योंकि इससे कुर्सी पर आक्षेप लगता था। उन्होंने कहा कि सदन के इतने वरिष्ठ सदस्य की ओर से आसन के लिए इस तरह की अत्यधिक असंयमित, अनुचित अभिव्यक्ति निश्चित रूप से उचित नहीं थी।
धनखड़ ने आगे कहा कि विपक्षी दलों ने मणिपुर मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान और नियम 267 के तहत चर्चा की मांग करते हुए कई स्थगन नोटिस दिए हैं। नियम के तहत, सांसद राष्ट्रीय महत्व के किसी मुद्दे पर चर्चा के लिए सूचीबद्ध व्यवसाय को निलंबित करने की मांग करते हुए नोटिस दे सकते हैं।
वहीं, चिदंबरम ने कहा कि उनकी टिप्पणियों को संदर्भ में देखा जाना चाहिए और पूरे रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए क्योंकि इसका उद्देश्य नकारात्मक नहीं था।