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अंडमान से चेन्नई के हवाई मार्ग पर खराब मौसम का असर, पायलट नहीं कर पा रहे संपर्क
Sat, 06 Jul 2019 06:55 PM IST
शिल्पा ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिल्पा ठाकुर
Updated Sat, 06 Jul 2019 06:55 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pexels.com
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खराब मौसम का असर अब विमानों पर भी पड़ रहा है। ये एक बड़े खतरे की ओर संकेत कर रहा है। यहां बंगाल की खाड़ी के ऊपर से उड़ने वाले विमानों को एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीएस) से संपर्क करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कुआलालम्पुर से चेन्नई के लिए उड़ान भरने वाले बी737-800 विमान भी इन्हीं विमानों में से एक है। ये विमान करीब 35 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था। इस विमान को बंगाल की खाड़ी पर उड़ने के दौरान अगले 1600 किमी. तक खतरे का सामना करना पड़ा।
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तीन व्यस्ततम अंतरमहाद्वीपीय मार्ग पर बीते कुछ हफ्तों से यही परेशानी चल रही है। इन मार्गों से ऑस्ट्रेलिया से उड़ने भरने वाले विमान, दक्षिणपूर्वी एशिया से मध्य पूर्व और यूरोप जाने जाने वाले विमान गुजरते हैं। हाई फ्रिक्वेंसी (एचएफ) चैनल के बावजूद भी पायलट एक घंटा या इससे भी अधिक समय तक बिना संपर्क के विमान उड़ाने के लिए मजबूर हैं।
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एक पायलट का कहना है, "हम आसपास उड़ रहे विमानों से संपर्क करने की कोशिश करते हैं, लेकिन सभी पायलट कुछ गलत होने के डर से इसे मंजूरी नहीं देते। ऐसे में वीएचएफ और एचएफ सिस्टम भी काम नहीं करता क्योंकि कई पायलट एटीएस से संपर्क करने की कोशिश करते हैं।"
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चेन्नई से दक्षिणपूर्वी दिशा में उड़ने वाले विमानों में वीएचएफ (वेरी हाई फ्रिक्वेंसी) का इस्तेमाल करीब एक घंटे तक ही किया जा सकता है। इसके बाद पायलट एचएफ पर ही निर्भर रहते हैं। बावजूद इसके विमानों को करीब दो घंटे तक नो-कम्युनिकेशन जोन में उड़ना पड़ता है।
हालांकि विमान बिना निगरानी के नहीं उड़ते हैं। एटीसी उन्हें सैटेलाइट बेस्ड डाटा लिंक (ऑटोमैटिक डिपेंडेंट सर्विलांस- ब्रोडकास्ट) के माध्यम से देखता है। जिसमें दिशा, गति और ट्रांसपोंडर से एक विमान की ऊंचाई का पता चलता है। लेकिन पायलटों का कहना है कि उनके पास नियंत्रकों से बात करने का कोई साधन नहीं होता। एक पायलट का कहना है, "चैनलों को विभाजित करना चाहिए और सिग्नल को मजबूत करने के लिए ग्राउंड सिस्टम को सुधारा जाना चाहिए।"