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पेट्रोल-डीजल का मुद्दा भी राजनीति का शिकार: आम लोगों तो कैसे मिलेगी महंगाई से राहत?

Thu, 28 Apr 2022 07:40 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 28 Apr 2022 07:40 PM IST
सार

केंद्र सरकार के पूर्व सचिव अजय शंकर ने अमर उजाला से कहा कि जनता को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के अंदर लाना चाहिए। एकत्रित टैक्स को उचित तरीके से केंद्र-राज्य में बंटवारा कर इस समस्या का सर्वमान्य हल निकाला जा सकता है...

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Petrol Diesel Price Hike: Former Secretary Ajay Shankar said, petroleum products should brought under GST to save the public from inflation
महंगे होते पेट्रोल-डीजल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पेट्रोल के मुद्दे पर वैट कम करने की पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद विपक्ष भी हमलावर हो गया है। वह केंद्र से अपनी एक्साइज ड्यूटी कम करने और अन्य भाजपा शासित राज्यों में वैट कम करने की दलीलें देने लगा है। लेकिन इस बीच आम उपभोक्ताओं के संकट का कोई हल निकलता दिखाई नहीं पड़ता, जो महंगाई के कारण परेशान हैं और उसका घर चलाना मुश्किल हो रहा है। अमर उजाला ने ऊर्जा विशेषज्ञों से इस मुद्दे पर बातचीत की कि जनता को महंगाई से बचाने के लिए क्या उपाय किये जा सकते हैं?

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महंगे तेल से छुटकारे की संभावना नहीं

ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने अमर उजाला को बताया कि भारत प्रतिदिन 52 लाख बैरल तेल की खपत करता है। इस पूरी खपत का 86 फीसदी तेल भारत को विदेशी बाजार से आयात करना पड़ता है। चूंकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, अनुमान है कि आने वाले समय में भी तेल कीमतों की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। यदि रूस-यूक्रेन विवाद का समाधान हो जाए तो भी आने वाले समय में कई वर्षों तक तेल कीमतों पर संकट लगातार बरकरार रहेगा और आम आदमी को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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तनेजा के मुताबिक भारत सहित अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेल के नए स्रोतों की पहचान नहीं की जा रही है। तेल के एक नए स्रोत की खोज करने, उसे उत्पादन शुरू करने योग्य बनाने और उत्पादन करने में लगभग सात साल तक का समय लगता है। इसमें भारी कीमत भी लगती है, जिसके लिए ज्यादातर कंपनियां इच्छुक नहीं दिखतीं। जबकि इसी बीच आबादी बढ़ने और सुख-सुविधाओं के बढ़ रहे उपभोग के कारण मांग-आपूर्ति में असंतुलन का खतरा बढ़ रहा है। यही कारण है कि तेल उत्पादक देश उत्पादन सीमित रखकर ज्यादा लाभ कमाने की रणनीति अपना रहे हैं।
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अंतरराष्ट्रीय कारणों से आने वाले समय में भी ऊर्जा की मांग बढ़ती रहेगी और तेल कीमतें दबाव में रहेंगी। यदि भारत की बात करें तो आने वाले 30 साल तक किसी भी सरकार के लिए ऊर्जा सबसे बड़ी चुनौती बना रहेगा। इसका नजदीकी समय में कोई समाधान संभव नहीं है।    

कैसे कम हो महंगाई?

केंद्र सरकार के पूर्व सचिव अजय शंकर ने अमर उजाला से कहा कि जनता को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के अंदर लाना चाहिए। टैक्स पाने के कारण ज्यादातर सरकारें इसके लिए इच्छुक नहीं हो सकतीं, लेकिन एकत्रित टैक्स को उचित तरीके से केंद्र-राज्य में बंटवारा कर इस समस्या का सर्वमान्य हल निकाला जा सकता है। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर साथ आकर खुले मन से बातचीत करनी चाहिए।

उत्पादन लागत कम करने का उपाय  

अजय शंकर का मानना है कि आज एक आम भारतीय उपभोक्ता जब बाजार से कोई वस्तु खरीदता है, उसके द्वारा चुकाए गए कुल मूल्य का लगभग 14-15 फीसदी हिस्सा केवल परिवहन-लॉजिस्टिक्स लागत के कारण होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह कीमत केवल छह फीसदी के करीब होती है।

यदि तेल पर टैक्स कम किया जाए, तो इससे वस्तुओं की कीमत में नौ से 10 फीसदी की कमी की जा सकती है। यह लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाने से महंगाई से राहत मिल सकती है। यानी ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ ‘कॉस्ट ऑफ डूइंग बिजनेस’ (उत्पादन लागत) कम करने पर विचार किया जाना चाहिए।  

क्या हो सकते हैं अन्य विकल्प

जानकारों का कहना है कि तेल की सबसे ज्यादा खपत यात्री और माल परिवहन के लिए होती है। यदि यात्री परिवहन के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा दिया जाए तो निजी वाहनों की खपत में कमी आ सकती है। इससे भी तेल की खपत कम होगी, महंगाई का असर कम होगा और देश पर तेल आयात पर खर्च कम हो सकेगा।



परिवहन के लिए तेल पर निर्भर रहने की बजाय ई-वाहनों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। अभी बैटरी से चलने वाली कारों की कीमत पेट्रोल-डीजल कारों की तुलना में बहुत ज्यादा होती है। इसे कम कर अन्य कारों के बराबर लाया जाना चाहिए। केंद्र सरकार को हाइड्रोजन और आणुविक ऊर्जा से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देने की नीति पर आगे बढ़ना चाहिए। ये ईंधन भविष्य के ऊर्जा स्रोत कहे जा रहे हैं। इनका समय रहते पर्याप्त दोहन किया जाना चाहिए।

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