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पश्चिम बंगाल: बकरीद से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर, पशु वध नियंत्रण अधिनियम के तहत छूट की मांग

Wed, 20 May 2026 07:48 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 20 May 2026 07:48 PM IST
सार

बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल में पशु वध नियमों में सख्ती का मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच गया है। कई याचिकाओं में त्योहार के मौके पर राज्य सरकार से कानून के तहत विशेष छूट देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं में टीएमसी नेता भी शामिल हैं। पढ़िए रिपोर्ट-

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Petitions moved in Cal HC seeking exemption of Animal Slaughter Control Act for Eid al-Adha
पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

अगले हफ्ते बकरीद के त्योहार को देखते हुए बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गईं। इन याचिकाओं में पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के तहत छूट की मांग की गई है। नई भाजपा सरकार ने कुछ प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके कारण ये याचिकाएं दायर की गई हैं। 
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गुरुवार को याचिकाओं पर सुनवाई
इन याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ गुरुवार को सुनवाई करेगी। कोर्ट ने कहा कि नवनियुक्त सरकारी वकील ने याचिकाओं को समझने के लिए समय मांगा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक अखरुज्जमान की ओर से दायर एक याचिका में अधिनियम की धारा 12 के तहत छूट की मांग की गई है, जिसके जरिये राज्य सरकार ऐसी अनुमति दे सकती है।
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महुआ मोइत्रा ने क्या तर्क दिया?
■ टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कोर्ट के बाहर बताया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के तहत छूट मांगी है।
■ उन्होंने कहा कि 13 मई को जारी अधिसूचना और 27 या 28 मई को बकरीद त्योहार को देखते हुए यह याचिका दाखिल की गई है, जिसमें कुछ पशुओं के वध की अनुमति देने की मांग की गई है।
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■ महुआ मोइत्रा ने कहा कि अधिनियम की धारा 12 के तहत राज्य सरकार को छूट देने का अधिकार है और इसी के तहत बैल, सांड और भैंस जैसे पशुओं के लिए अनुमति मांगी गई है।
■ उन्होंने दावा किया कि त्योहार में केवल कुछ दिन बचे हैं और कई गरीब परिवार पूरे साल इसकी तैयारी करते हैं। लेकिन अधिसूचना के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।

■ उन्होंने यह भी कहा कि कई पशुपालक अचानक मुश्किल में आ गए हैं और यह मुस्लिम समुदाय के दो प्रमुख त्योहारों में से एक है।
■ उन्होंने बताया कि इन्हीं मुद्दों पर हाईकोर्ट से छूट देने का आदेश देने की मांग की गई है।

ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल: सीएम का एलान- दो हफ्तों में बीएसएफ को सौंपी जाएगी 27 किलोमीटर सीमा जमीन; TMC पर साधा निशाना

राज्य सरकार का क्या कहना है?
राज्य सरकार ने एक अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि केवल 'फिटनेस प्रमाणपत्र' वाले पशुओं का ही वध किया जा सकेगा और खुले सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। सरकार ने कहा है कि ये दिशानिर्देश पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 और कलकत्ता हाईकोर्ट के 2018 और 2022 के आदेशों के पालन में जारी किए गए हैं।

इस मामले की सुनवाई गुरुवार को अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ होगी।
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