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धार्मिक नाम वाली पार्टियों पर बैन की मांग: अदालत ने कहा- याचिकाकर्ता को धर्मनिरपेक्ष और निष्पक्ष होना चाहिए

Tue, 31 Jan 2023 11:01 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Tue, 31 Jan 2023 11:01 PM IST
सार

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के वकील ने सैयद वसीम रिजवी (जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी) की जनहित याचिका पर आपत्ति जताई और कहा कि उन्होंने (रिजवी) सिर्फ उन दो पार्टियों को पक्षकार बनाया है जिनके नाम में मुस्लिम शब्द हैं।

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Petitioner must be secular not selective SC on PIL to ban political parties with religious names and symbols
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक प्रतीकों और नामों का इस्तेमाल करने वाली राजनीतिक पार्टियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता से मंगलवार को कहा कि उसे धर्मनिरपेक्ष और सभी के लिए निष्पक्ष होना चाहिए और अपने दृष्टिकोण में चयनात्मक नहीं होना चाहिए। न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि अदालत इस बात पर विचार करेगी कि क्या इस मामले को पांच न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजा जाना चाहिए।

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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के वकील ने सैयद वसीम रिजवी (जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी) की जनहित याचिका पर आपत्ति जताई और कहा कि उन्होंने (रिजवी) केवल उन दो पार्टियों को पक्षकार बनाया है जिनके नाम में मुस्लिम शब्द है, लेकिन उन पार्टियों को छोड़ दिया है जिनका अन्य धर्मों से संबंध है।
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एआईएमआईएम की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि अदालत इस मामले को पांच न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के पास भेजने पर विचार कर सकती है क्योंकि किसी भी आदेश के दूरगामी परिणाम होंगे। इस पर न्यायमूर्ति  शाह ने कहा कि अदालत इस बात पर विचार करेगी कि इस मामले को बड़ी पीठ को भेजा जाए या नहीं।
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पीठ ने याचिकाकर्ता रिजवी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया से कहा कि आपको अन्य पक्षों द्वारा की गई आपत्तियों को ध्यान में रखना चाहिए। अदालत ने कहा, ऐसे आरोप नहीं लगने चाहिए कि आप किसी एक धर्म विशेष के खिलाफ जा रहे हैं। 


सैयद वसीम रिजवी ने जनहित याचिका में अन्य निर्देशों के साथ-साथ उन राजनीतिक दलों को आवंटित प्रतीकों या नामों को रद्द करने की मांग की थी जिनका धार्मिक अर्थ है। न्यायमूर्ति नागरत्न ने भाटिया से कहा कि याचिकाकर्ता को धर्मनिरपेक्ष और सभी के लिए निष्पक्ष होना चाहिए। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कई तथ्यों को छिपाया है जैसे कि वह एक आपराधिक मामले में जमानत पर हैं और उसने अपने खिलाफ आपराधिक आरोपों का खुलासा नहीं किया है।

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