SC: 'शीर्ष अदालत की अवहेलना कर रहे तमिलनाडु के राज्यपाल', DMK नेता की शपथ रोकने पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार
Supreme Court Updates: तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने डीएमके नेता के.पोनमुडी को कैबिनेट में मंत्री नियुक्त करने से इनकार किया है। इस मामले में कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने द्रमुक नेता के. पोनमुडी को मंत्री पद की शपथ न दिलाने के मामले में तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को फटकार लगाते हुए कहा कि वह शीर्ष कोर्ट की अवहेलना कर रहे हैं। शीर्ष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति मामले में पोनमुडी की सजा व दोषसिद्धि पर रोक के बावजूद शपथ नहीं दिलाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, हम राज्यपाल के आचरण से गंभीर रूप से चिंतित हैं।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने पोनमुडी को शपथ दिलाने के लिए राज्यपाल को 24 घंटे का समय दिया। दरअसल, दोषसिद्धि पर रोक के बाद सीएम एमके स्टालिन ने पोनमुडी को फिर से शपथ दिलाने का अनुरोध किया था, जिसे राज्यपाल ने नहीं माना। पीठ ने कहा, जब सुप्रीम कोर्ट ने पोनमुडी की सजा पर रोक लगा दी है, तो इसे माना जाना चाहिए।
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने राज्य सरकार की ओर से आवेदन दाखिल करने के तरीके पर आपत्ति जताई, तो कोर्ट ने कहा, हम अदालत में खुलकर नहीं कहना चाहते थे, पर बाध्य हैं। जब भारत का सर्वोच्च न्यायालय किसी दोषसिद्धि पर रोक लगाता है, तो राज्यपाल को इससे अलग कुछ कहने का अधिकार नहीं है। राज्यपाल ऐसा कैसे कह सकते हैं कि पोनमुडी को मंत्रिमंडल में शामिल करना सांविधानिक नैतिकता के विरुद्ध है।
राज्यपाल के पास सिर्फ सलाह देने की शक्ति
पीठ ने कहा, हमारे आदेश को लागू किया जाना चाहिए। क्या हम कानून के शासन से शासित नहीं हैं? कोई भी सांविधानिक पदाधिकारी ऐसा कैसे कह सकता है। हमारे आदेश को प्रभावी बनाया जाना चाहिए। यह मंत्री की व्यक्तिपरक धारणा के बारे में नहीं है। राज्यपाल एक औपचारिक प्रमुख हैं। उनके पास बस परामर्श देने की शक्ति है।
...शुक्रवार तक राज्यपाल का जवाब लेकर आएं
पीठ ने वेंकटरमणी से कहा, शुक्रवार तक आप राज्यपाल का जवाब लाएं अन्यथा हम मामले में आदेश पारित कर सकते हैं। हम राज्यपाल को संविधान के अनुसार काम करने के लिए आदेश पारित करेंगे।
केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- जरूरत से ज्यादा उधार ले रहा है केरल
केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि बीते वर्षों में केरल सरकार जरूरत से ज्यादा उधार ले रही है। केंद्र ने कहा कि इस तरह से उधार लेना केरल की वित्तीय स्थिति की तरफ इशारा कर रहा है। हालांकि केरल का कहना है कि राज्य का खजाना पिछले सालों में अधिक ऋण लेने के बोझ को सहने के लिए पर्याप्त है। केंद्र ने केरल पर बाजार से उधारी जुटाने पर रोक लगाई हुई है। इस फैसले को केरल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हुई है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ केंद्र के फैसले के खिलाफ केरल सरकार की अंतरिम राहत देने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही है। केरल ने केंद्र की ओर से उधार लेने की सीमा निर्धारित करने को राज्य के वित्त को विनियमित करने के अपने विशेष, स्वायत्त और पूर्ण अधिकार में हस्तक्षेप बताया है। केरल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सांविधानिक ढांचे के तहत राज्यों का अपना बजट है और वे अपने खर्च का प्रबंधन करने के हकदार हैं। वहीं केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन ने दावा किया कि राज्य की ओर से बहुत सारी गलत बातें कही गई हैं। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि केरल हाल के वर्षों में जरूरत से ज्यादा कर्ज ले रहा है।
बाइक बोट घोटाले में भसीन समूह के निदेशक को मिली अग्रिम जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने 3,500 करोड़ रुपये के बाइक बोट घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भसीन ग्रुप ऑफ कंपनीज के निदेशक सतिंदर सिंह भसीन को अग्रिम जमानत दे दी। नोएडा में पंजीकृत कंपनी 2018 में बहुस्तरीय मार्केटिंग योजना ‘बाइक बोट’ लेकर आई थी। उसने निवेशकों को बाइक में उनके निवेश पर बड़े रिटर्न का वादा कर लुभाया, जिसका इस्तेमाल दोपहिया टैक्सियों के रूप में किया जाना था। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने भसीन के वकील विजय अग्रवाल की दलीलें सुनने के बाद अग्रिम जमानत दे दी। आरोप है कि निवेश की आड़ में भसीन ने कई निवेशकों से धोखाधड़ी कर जुटाए गए धन से संपत्ति की खरीदी । यह भी आरोप है कि यह पैसा भसीन के ग्रैंड वेनिस मॉल में निवेश किया गया। भसीन के वकील अग्रवाल ने कहा कि भसीन ने अग्रिम जमानत की अपनी याचिका खारिज करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 फरवरी के आदेश के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई विशेषज्ञ समिति
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) लुप्तप्राय प्रजाति है। इसे तत्काल संरक्षण की आवश्यकता है। शीर्ष अदालत ने राजस्थान और गुजरात में संभावित और प्राथमिकता वाले जीआईबी निवास वाली जगहों में बिजली लाइनों को भूमिगत बिछाने के लिए क्षेत्रों का सुझाव देने और इस पक्षी के संरक्षण उपायों की सिफारिश करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) विशेष रूप से राजस्थान और गुजरात में पाए जाते हैं। इनकी संख्या में चिंताजनक कमी का कारण उनके निवास स्थान के पास सौर संयंत्रों सहित ओवरहेड बिजली लाइनों के साथ लगातार टकराना है।