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अनाथों को आरक्षण देने की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 06 Jul 2018 10:32 AM IST
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अनाथ बच्चे (फाइल फोटो)
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अनाथ बच्चों के लिए आरक्षण की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। नोएडा निवासी पौलोमी पाविनी शुक्ला ने यह याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए केंद्र समेत सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है। पौलोमी का दावा है कि देश में पहली बार अनाथ बच्चों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है, कि देश में अनाथ बच्चों की संख्या करीब दो करोड़ है। जो श्रीलंका की कुल आबादी के करीब बराबर है। भारत सरकार ने कभी भी इसका औपचारिक सर्वे नहीं कराया है, जबकि म्यांमार इस तरह का सर्वे हो चुका है। देश में एससी-एसटी व ओबीसी के अभिभावकों के साथ ही बच्चों को भी आरक्षण दिया जाता है, जबकि अनाथ बच्चों के लिए न कोई स्कॉलरशिप है और न ही किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग की सुविधा।
बैंक कर्ज में भी उनको कम ब्याज दर की सुविधा नहीं है, जबकि एससी-एसटी व ओबीसी के बच्चों को सुविधा प्राप्त है। शिक्षण संस्थानों व नौकरियों में भी उनको आरक्षण नहीं मिला है। देश भर में 117 जिले ऐसे हैं, जहां एक भी अनाथालय नहीं बने हैं। इस साल केंद्र सरकार ने बाल सुरक्षा के लिए 725 करोड़ रुपये का बजट पास किया है, लेकिन अनाथ बच्चों के लिए कोई योजना नहीं है।
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पौलोमी पाविनी शुक्ला ने बताया कि वे आठ राज्यों के 50 से अधिक अनाथालयों का भ्रमण कर चुकी हैं। देश में अनाथ बच्चों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने यह याचिका दायर की है। पौलोमी अनाथ बच्चों पर ही ‘वीकेस्ट ऑन अर्थ’ नाम से पुस्तक भी लिख चुकी हैं।
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याचिकाकर्ता का कहना है, कि देश में अनाथ बच्चों की संख्या करीब दो करोड़ है। जो श्रीलंका की कुल आबादी के करीब बराबर है। भारत सरकार ने कभी भी इसका औपचारिक सर्वे नहीं कराया है, जबकि म्यांमार इस तरह का सर्वे हो चुका है। देश में एससी-एसटी व ओबीसी के अभिभावकों के साथ ही बच्चों को भी आरक्षण दिया जाता है, जबकि अनाथ बच्चों के लिए न कोई स्कॉलरशिप है और न ही किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग की सुविधा।
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बैंक कर्ज में भी उनको कम ब्याज दर की सुविधा नहीं है, जबकि एससी-एसटी व ओबीसी के बच्चों को सुविधा प्राप्त है। शिक्षण संस्थानों व नौकरियों में भी उनको आरक्षण नहीं मिला है। देश भर में 117 जिले ऐसे हैं, जहां एक भी अनाथालय नहीं बने हैं। इस साल केंद्र सरकार ने बाल सुरक्षा के लिए 725 करोड़ रुपये का बजट पास किया है, लेकिन अनाथ बच्चों के लिए कोई योजना नहीं है।
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पौलोमी पाविनी शुक्ला ने बताया कि वे आठ राज्यों के 50 से अधिक अनाथालयों का भ्रमण कर चुकी हैं। देश में अनाथ बच्चों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने यह याचिका दायर की है। पौलोमी अनाथ बच्चों पर ही ‘वीकेस्ट ऑन अर्थ’ नाम से पुस्तक भी लिख चुकी हैं।